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मानसून में होने वाली बीमारियां, लक्षण और बचाव – Monsoon Diseases, Symptoms And Prevention In Hindi

मानसून में होने वाली बीमारियां, लक्षण और बचाव - Monsoon Diseases, Symptoms And Prevention In Hindi

Monsoon diseases in Hindi मानसून में होने वाली बीमारियों से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बरसात का मौसम आने पर गर्मी से तो हमें राहत मिलती है, लेकिन कई मानसूनी बीमारियां भी साथ में आ जाती हैं मानसून आने के साथ ही मलेरिया, डेंगू, हैजा, चिकनगुनिया और पीलिया जैसी कई खतरनाक बीमारियां भी दस्तक देने लगती हैं। इसके अलावा, सर्दी जुकाम, खांसी जैसे वायरल संक्रमण होने का भी इन दिनों खतरा बढ़ जाता है। आज इस लेख के माध्यम से आप मानसून में होने वाली बीमारियां, उनके लक्षण और बचने के उपाय के बारे में जानेंगे।

मानसून के मौसम में बाहर जाना, मौसम की पहली बारिश का आनंद लेना, तथा बाजार के समोसे और अन्य खाद्य पदार्थों को मजे से खाना, किसे पसंद नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बारिश के मौसम में कुछ छोटी-छोटी गलतियाँ कष्टदायक हो सकती हैं, तथा अनेक प्रकार के रोगों का कारण बन सकती हैं। मानसून के मौसम में विभिन्न कीटाणुओं और वायरस के संपर्क में आने का ख़तरा अधिक होता है, जिसके कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस स्थिति में व्यक्तियों को स्वस्थ रहने और बारिस का पूरी तरह मजा लेने के लिए मानसून से होने वाली बीमारियों और उनके कारणों का ज्ञान होना आवश्यक हो जाता है। आइये जानतें हैं मानसून में होने वाली बीमारियां और उनके बचाव के बारे में।

  1. मानसून में होने वाली बीमारियां – Monsoon Diseases In Hindi
  2. मानसून में मच्छरों से होने वाली बीमारियां – Mosquito borne monsoon diseases in Hindi
  3. मानसून के दौरान मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव – Mosquito borne diseases prevention during rainy season in Hindi
  4. बारिश के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां – Water borne diseases during rainy season in Hindi
  5. मानसूनी बीमारियों को रोकने के उपाय – monsoon diseases prevention in Hindi

मानसून में होने वाली बीमारियां – Monsoon Diseases In Hindi

मानसून में होने वाली बीमारियां - Monsoon Diseases In Hindi

मानसूनी बीमारियां,  बारिश के मौसम में दूषित भोजन और जल, वायरस, बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण उत्पन्न होती हैं। अतः बारिश न केवल चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाती है, बल्कि कीटाणुओं और जीवाणुओं के प्रजनन के लिए उचित स्थितियां भी प्रदान करती है, जिसके कारण व्यक्तियों में अनेकों बीमारियाँ देखने को मिलती हैं। मानसून के मौसम में तापमान में अचानक गिरावट होने के कारण स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे एलर्जी या दमा (allergic or asthmatic) जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

मानसून से संबंधित रोग कई प्रकार के होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • फूड बोर्न डिजीज (Food Borne diseases) – हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए, डायरिया, इत्यादि।
  • वेक्‍टर जन्‍य रोग (Vector-borne diseases) – मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया बुखार, इत्यादि।
  • पानी या बारिश के संपर्क में आने के कारण रोग (Due to exposure to water/rain) – हाइपोथर्मिया (Hypothermia), श्वसन तंत्र में संक्रमण (Respiratory tract infections), लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis), इत्यादि।

(और पढ़े – बरसात में होने वाली बीमारियां और उनके घरेलू उपाय…)

मानसून में मच्छरों से होने वाली बीमारियां – Mosquito borne monsoon diseases in Hindi

बारिश के मौसम में मच्छरों के पैदा होने की अधिक संभावना अधिक बढ़ जाती है, जो अनेक प्रकार की बीमारियों के उत्पन्न होने का कारण बनते हैं। मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली बीमारियों में निम्न शामिल हैं:

मलेरिया – Malaria in Hindi

मलेरिया - Malaria in Hindi

मानसून के दौरान मलेरिया बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे आम बीमारियों में से एक है। यह बीमारी प्लाज्मोडियम परजीवी (plasmodium parasite) के कारण उत्पन्न होती है, जिनका वाहक मादा एनोफिलीज (anopheles) मच्छर होता है। जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो प्लाज्मोडियम परजीवी रक्त में प्रवेश करता है और मलेरिया की बीमारी का कारण बनता है। संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग और संक्रमित व्यक्ति के खून का स्थानांतरण भी, मलेरिया रोग के फैलने का कारण बन सकता है।

(और पढ़े – मलेरिया के कारण, लक्षण और बचने के घरेलू उपाय…)

मलेरिया के लक्षण – Symptoms of malaria in Hindi

मलेरिया रोग के सामान्य संकेतों और लक्षणों में निम्न को शामिल किया जाता है, जैसे:

(और पढ़े – सिरदर्द दूर करने के घरेलू उपाय…)

डेंगू – Dengue in hindi

डेंगू – Dengue in hindi

मानसून के दौरान डेंगू बुखार एक वायरल संक्रमण है जो मच्छरों के काटने से फैलता है। यह बीमारी एडिस इजिप्ती (Aedes aegypti) मच्छर द्वारा फैलाई जाती है, जो सुबह के समय अधिक प्रभावी होते हैं। डेंगू बुखार को डेन्‍डी और ब्रेकबोन बुखार (dandy and breakbone fever) के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी के प्रभाव से मरीज के रक्त में प्लेटलेंट्स का स्तर बहुत तेजी से गिरने लगता है, जिसके कारण मरीज में कमजोरी आ जाती है। जो व्यक्ति एक बार डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, वे अपने जीवन के किसी भी हिस्से में इस बीमारी का शिकार हो सकते हैं।

(और पढ़े – डेंगू बुखार क्या है, कारण, लक्षण, उपचार, निदान, बचाव के घरेलू उपचार…)

डेंगू के लक्षण – Dengue symptoms in Hindi

कुछ विशेष लक्षण होते हैं जो डेंगू बुखार की पहचान करने के लिए निम्न लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए, जैसे:

  • अचानक तेज बुखार आना (लगभग 106 डिग्री फ़ारेनहाइट तक)
  • सरदर्द होना
  • मांसपेशियों, हड्डी और जोड़ों में दर्द
  • जी मिचलाना
  • उल्टी होना
  • आंखों के पीछे दर्द होना
  • त्वचा पर लाल चकत्ते उत्पन्न होना
  • थकान महसूस होना

डेंगू बुखार के अधिक गंभीर लक्षणों में निम्न को शामिल किया जाता है:

  • गंभीर पेट दर्द
  • मसूड़ों या नाक से रक्‍तस्राव
  • मल या मूत्र में रक्त की उपस्थिति
  • सांस लेने में कठिनाई
  • ठंडी और चिपचिपी त्वचा, इत्यादि।

(और पढ़े – डेंगू से बचने के लिए ये हैं आसान घरेलू उपाय…)

चिकनगुनिया – Chikungunya in Hindi

चिकनगुनिया – Chikungunya in Hindi

मानसून के दौरान चिकनगुनिया बुखार एडिस एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडीस एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर रात के अलावा दिन में भी सक्रीय हो सकते हैं। इस वायरल रोग के कारण पीड़ित व्यक्ति में बुखार और जोड़ो का दर्द आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर स्थिर पानी में पैदा होते हैं।

(और पढ़े – चिकनगुनिया के कारण लक्षण और बचाव के घरेलू उपाय…)

चिकनगुनिया के लक्षण – Chikungunya Symptoms in Hindi

प्रत्येक व्यक्ति में चिकनगुनिया के लक्षण प्रगट होने में 2 से 5 दिन का समय लग सकता है। चिकनगुनिया के मुख्य लक्षणों निम्न को शामिल किया जाता है:

  • तेज बुखार
  • जोड़ों में सूजन और दर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • त्वचा पर निशान
  • स्वाद ना आना
  • मुंह में छाले
  • मितली और उल्टी
  • शरीर में अत्यधिक थकावट महसूस होना, आदि

(और पढ़े – चिकनगुनिया से होने वाले जोड़ों के दर्द का इलाज और आयुर्वेदिक उपचार…)

मानसून के दौरान मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव – Mosquito borne diseases prevention during rainy season in Hindi

मानसून के दौरान मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव - Mosquito borne diseases prevention during rainy season in Hindi

चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया आदि बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका मच्छर के काटने से बचना और मच्छरों की पैदावार को कम करने के लिए प्रयास करना है। अतः मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव तथा इन बीमारियों की रोकथाम के लिए निम्न तरीके अपनाये जा सकते है:

  • घरों के आसपास पानी को एकत्रित न होने दें,
  • घरों के आसपास मच्छर प्रतिरोधी (mosquito repellent) दवाओं का छिड़काव करें
  • पशु स्थानों को उचित तरीके से साफ कर कीटनाशकों का प्रयोग करें।
  • वातानुकूलित आवास का चयन करें
  • सोते समय मच्छर दानी का उपयोग करें
  • मच्छरों को भागने के लिए कमरे में कपूर जलाएं
  • यदि आप जंगली या उष्णकटिबंधीय (tropical) क्षेत्र में रहते हैं, तो खुली त्वचा और कपड़ों पर मच्छर प्रतिरोध का उपयोग करें
  • मच्छर प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों को काटने से रोकने के लिए त्वचा को पूरी तरह से ढकें, इसके लिए लंबी अस्तीन वाली शर्ट, लंबे पैंट, मोजे और जूते पहनने चाहिए,
  • मच्छर प्रतिरोधी के रूप में उपयोग की जाने वाली दवा पर्मेथ्रिन (Permethrin) है। अतः पर्मेथ्रिन (Permethrin) का छिडकाव कपड़ों, जूते, घर के सामान और बिस्तर की जाल (bed netting) पर किया जा सकता है।

(और पढ़े – मच्छरों से बचने के प्राकृतिक घरेलू उपाय…)

बारिश के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां – Water borne diseases during rainy season in Hindi

मानसूनी बीमारियां,  बारिश के मौसम में दूषित भोजन और जल के कारण भी उत्पन्न होती हैं। आइये जानते हैं बारिश के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां और उनसे बचने के उपाय।

हैजा – Cholera in Hindi

हैजा – Cholera in Hindi

मानसून या बारिश के मौसम में हैजा होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। हैजा एक संक्रामक बीमारी (infectious disease) है, जो संक्रमित व्यक्ति की आंतों को प्रभावित करती है। इस बीमारी में पानी की तरह पतले दस्त लगते हैं। वाइब्रियो कोलेरी बैक्टीरिया (vibrio cholerae becteria), हैजा का कारण बनता है, जो संक्रमित पानी या खाने से फैलता है। हैजा रोग का इलाज समय रहते न किया जाए तो व्यक्ति में पानी की कमी (dehydration) के साथ कई जरूरी लवण, सोडियम और पोटेशियम आदि में भी गंभीर रूप से कमी आ जाती है, जिससे व्यक्ति के शरीर का रक्त अम्लीय हो जाता है और व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है।

(और पढ़े – हैजा कारण लक्षण और बचाव…)

हैजा के लक्षण – Cholera Disease symptoms in Hindi

हैजा रोग से सम्बंधित लक्षणों और संकेतों में निम्न को शामिल किया जाता है, जैसे:

  • लगातार दस्त लगना, दस्त पानी के समान पतले हो सकते हैं
  • रोगी का शरीर ठंडा पड़ने लगना
  • रोगी की नाड़ी और हृदय गति बढ़ जाना
  • हाथ-पैरों की माँसपेशियों में ऐंठन उत्पन्न होना
  • रोगी को अत्यधिक प्यास लगना
  • पेशाब में कमी
  • शरीर में निर्जलीकरण, इत्यादि।

(और पढ़े – दस्त (लूस मोशन) रोकने के उपाय…)

हैजा से बचाव – Cholera prevention in Hindi

हैजा मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के सेवन से होता है। अतः किसी भी व्यक्ति को इसकी रोकथाम के लिए निम्न बचाव से सम्बंधित उपाय को ध्यान में रखते हुए पालन करना चाहिए, जैसे:

  • केवल साफ और सुरक्षित पानी का सेवन करें, जिसमें बोतलबंद पानी या उबाला हुआ पानी शामिल है ।
  • दाँत ब्रश करने के लिए भी बोतलबंद या रासायनिक रूप से कीटाणुरहित किये गए पानी का उपयोग करें।
  • पेय पदार्थों में बर्फ को शामिल करने से बचें ।
  • फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर उपयोग में लायें ।
  • बाहर का खुला खाना खाने से बचें ।
  • पूरी तरह से पकाया हुआ खाना खाएं ।
  • दूध, आइसक्रीम सहित अन्य डेयरी खाद्य पदार्थों से सेवन से परहेज करें सावधान रहें।
  • कच्चा या अधपका मांस खाने से बचें।
  • साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं, इत्यादि।

(और पढ़े – गर्म पानी पीने के फायदे जानकर हैरान हो जायेंगे आप…)

टाइफाइड (आंत्र ज्वर) – Typhoid in Hindi

टाइफाइड (आंत्र ज्वर) – Typhoid in Hindi

टाइफाइड बुखार मानसून में होने वाली बहुत सामान्य बीमारी है, क्योंकि यह जल-जनित रोग है, तथा सालमोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी दूषित भोजन एवं पानी के कारण फैलती है। इलाज के अभाव में हर साल 10 से 30 प्रतिशत लोग इस बीमारी से मर जाते हैं। सालमोनेला बैक्टीरिया छोटी आंत के माध्यम से रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है। इसके बाद सफेद रक्त कोशिकाओं द्वारा यह बैक्टीरिया लिवर, प्लीहा और अस्थि मज्जा (bone marrow) में चला जाता है, तथा गंभीर लक्षणों का कारण बनता है।

(और पढ़े – टाइफाइड बुखार कारण लक्षण और इलाज…)

टाइफाइड के लक्षण – Typhoid symptoms in Hindi

टाइफाइड से पीड़ित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षणों और संकेतों को देखा जा सकता है:

  • भूख कम लगना
  • सिर दर्द होना
  • शरीर में सामान्य दर्द, ऐंठन
  • तेज़ बुखार (104 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक)
  • डायरिया
  • पेट में दर्द होना
  • कब्ज
  • ठंडी लगना
  • उल्टी होना
  • कमजोरी, आदि।

(और पढ़े – कमजोरी और थकान के कारण, लक्षण और इलाज…)

टाइफाइड से बचाव – Typhoid prevention during rainy season in Hindi

चूँकि टाइफाइड बुखार सालमोनेला (Salmonella) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है, जो दूषित भोजन एवं पानी में पाया जाता है। अतः इन दूषित भोजन और पानी के सेवन में सावधानी रखते हुए टाइफाइड बुखार से बचा जा सकता है। टाइफाइड से बचाने के उपाय में निम्न को शामिल किया जाता है:

  • टाइफाइड का का टीका लगवाएं
  • स्वच्छता बनाए रखना
  • टाइफाइड से बचने के लिए बोतल बंद पानी पीना या उबले पानी का सेवन करें
  • अच्छी तरह से पका हुआ और गर्म भोजन का सेवन करें
  • ठंडे भोजन या खुले रखे भोजन का सेवन न करें
  • अधिक समय से कटे या छिले हुए फलों का सेवन न करें, तथा फलों को खाने से पहले अच्छी तरह साफ करें और फिर काटें
  • शारीरिक स्वच्क्षता पर विशेष ध्यान दें तथा वातावरण को स्वच्क्ष रखें
  • बाजार से केवल ढका हुआ और गर्म भोज्य पदार्थ ही खरीदें, इत्यादि।

(और पढ़े – टाइफाइड फीवर डाइट प्लान और चार्ट…)

हेपेटाइटिस ए – Hepatitis A in Hindi

हेपेटाइटिस ए - Hepatitis A in Hindi

हेपेटाइटिस ए एक तरह वायरल रोग है, जो लीवर को प्रभावित करता है। यह एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है, जो पानी के माध्यम से तेजी से फैलती है। अशुद्ध पानी और भोजन के माध्यम से हेपेटाइटिस ए वायरस व्यक्तियों तक पहुँचता है। यह संक्रमण मक्खियों द्वारा भी प्रेषित किया जाता है। मानसून के मौसम में इस प्रकार के संक्रमण के होने की अधिक संभावना होती है।

(और पढ़े – लीवर की कमजोरी कारण लक्षण और दूर करने के उपाय…)

हेपेटाइटिस ए के लक्षण – Hepatitis A symptoms in Hindi

हेपेटाइटिस ए के संभावित लक्षण निम्न हो सकते है-

  • थकान महसूस होना
  • भूख में कमी आना
  • बुखार आना
  • जी मिचलाना और घबराहट होना
  • उल्टी आना
  • पीलिया, या त्वचा में पीलापन आना
  • ऊपरी पेट में दर्द होना विशेष रूप से लीवर में
  • मिट्टी के रंग का मल निकलना, इत्यादि।

(और पढ़े – बच्चों में पेट दर्द के लिए घरेलू उपचार…)

हेपेटाइटिस ए से बचाव – Hepatitis A prevention in Hindi

हेपेटाइटिस ए संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिओं को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे:

  • हेपेटाइटिस ए वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा के निर्माण में सहायता के लिए टीकाकरण करना आवश्यक होता है
  • हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए एक अच्छी स्वच्छता को अपनाना चाहिए
  • पानी को उबालकर पीना चाहिए
  • खुला रखा भोजन और बाहर के भोजन से परहेज करना चाहिए।

(और पढ़े – लीवर को साफ करने के लिए खाएं ये चीजें…)

पेट में इन्फेक्शन (गेस्ट्रोइंटेराइटिस) – Stomach infections (Gastroenteritis)

पेट में इन्फेक्शन (गेस्ट्रोइंटेराइटिस) - Stomach infections (Gastroenteritis)

पेट में इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) मुख्य रूप से वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी (parasites) के कारण होने वाला रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति में दस्त, उल्टी, बुखार और आंतों के अस्तर की सूजन आदि लक्षणों का कारण बनता है। इसे आंत्रशोथ या जठरांत्र शोध के नाम से भी जाना जाता है। बच्चों में पेट का इन्फेक्शन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस) का कारण रोटावायरस (rotavirus) बनता है, जबकि वयस्कों में अधिकतर मामले नोरोवायरस (norovirus) या बैक्टीरियल फूड पॉइजनिंग के कारण उत्पन्न होते हैं। गैस्ट्रोएन्टराइटिस मुख्य रूप से दूषित भोजन या पानी के सेवन से फैलता है।

(और पढ़े – फूड पॉइजनिंग के कारण, लक्षण, निदान, दवा और इलाज…)

पेट में इन्फेक्शन के लक्षण – stomach infection (gastroenteritis) symptoms in hindi

पेट में इन्फेक्शन (gastroenteritis) से सम्बंधित लक्षण आमतौर पर व्यक्ति के संक्रमित होने के एक दिन बाद प्रगट हो सकते हैं। जठरांत्र शोध (gastroenteritis) के लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

  • दस्त लगना
  • सिरदर्द होना
  • मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
  • हल्का बुखार
  • पेट में दर्द महसूस होना
  • उल्टी की समस्या उत्पन्न होना
  • भूख में कमी आना
  • पेट में खराबी तथा पेट में ऐंठन महसूस होना
  • ठंड लगना, इत्यादि।

(और पढ़े – खराब पेट को ठीक करने के घरेलू उपाय…)

गैस्ट्रोएन्टराइटिस की रोकथाम – Stomach infection Prevention in Hindi

मानसून के मौसम में पेट में इन्फेक्शन की स्थिति से बचना बहुत ही कठिन है, लेकिन कुछ उपाय इस संक्रमण की रोकथाम में मदद कर सकते हैं, जो कि निम्न हैं:

  • वायरल या बैक्टीरियल गैस्ट्रोएन्टेराइटिस की रोकथाम का सबसे अच्छा उपाय बार-बार हाथ धोना है।
  • बीमारी की स्थिति में पर्याप्त आराम करना चाहिए।
  • डॉक्टर की सिफारिश के बिना कोई भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कपड़े, बिस्तर या अन्य दूषित वस्तुओं को गर्म पानी से धोना चाहिए।
  • सभी फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धोना चाहिए।
  • समुद्री भोजन को अच्छी तरह से पकाकर खाना चाहिए।
  • संक्रमित होने की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को परिवार के सदस्यों से अलग रहना चाहिए तथा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं का साझा नहीं करना चाहिए।
  • अच्छी स्वच्छता को अपनाना और उचित भोजन का सेवन करना चाहिए।

इन्फ्लुएंजा (कोल्ड और फ्लू) – Influenza (Cold and Flu) in Hindi

इन्फ्लुएंजा (कोल्ड और फ्लू) - Influenza (Cold and Flu) in Hindi

मानसून के मौसम में व्यक्ति सर्दी और फ्लू से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इंफ्लुएंजा को सामान्यतः फ्लू के रूप में भी जाना जाता है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस (influenza virus) के कारण होने वाला एक संक्रामक रोग है। है। यह बेहद संक्रामक है और हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। यह रोग श्वसन तंत्र जैसे- नाक, गले और फेफड़े आदि, को प्रभावित करता है।

(और पढ़े – सर्दी जुकाम और खांसी के घरेलू उपाय…)

इन्फ्लूएंजा के लक्षण – Influenza (Flu) symptoms in Hindi

इंफ्लुएंजा या फ्लू के शुरुआती लक्षणों में निम्न को शामिल किया जाता है:

  • बंद नाक
  • गले में खरास
  • लगातार नाक बहना
  • बदन दर्द
  • सरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • बुखार, इत्यादि।

(और पढ़े – गले की खराश को ठीक करने के घरेलू उपाय…)

इन्फ्लूएंजा से बचाव – Influenza prevention in Hindi

इन्फ्लूएंजा की रोकथाम के लिए 6 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए वार्षिक फ्लू टीकाकरण की सिफारिश की जाती है। लेकिन इन्फ्लूएंजा का टीका पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं होता है, इसलिए संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए निम्न उपाय अपनाए जाने चाहिए:

  • हांथों की स्वच्क्षता पर विशेष ध्यान दें, खाने से पहले साबुन या हैंड वॉश से अच्छी तरह हाथों को धोएं।
  • हाथ साफ किए बिना अपने आंख, मुंह और नाक को न छूएं
  • शराब और कार्बोनेटेड पेय के सेवन से परहेज
  • जितना संभव हो सके, भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहें
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाले पौष्टिक और संतुलित आहार का चयन करें
  • यदि आप बीमार हैं तो घर से बाहर न निकलें
  • हाइड्रेटेड रहें
  • खांसते और छींकते समय मुंह को ढकें, इत्यादि।

(और पढ़े – संतुलित आहार के लिए जरूरी तत्व , जिसे अपनाकर आप रोंगों से बच पाएंगे…)

लेप्टोस्पाइरोसिस – Leptospirosis in Hindi

लेप्टोस्पायरोसिस, लेप्टोस्पाइरा (Leptospira) बैक्टीरिया के कारण होने वाला एक रोग है, जो मनुष्यों और जानवरों को प्रभावित करता है। इसे वेइल सिंड्रोम (Weil’s syndrome) के रूप में भी जाना जाता है, यह बैक्टीरिया मनुष्यों में, संक्रमित जानवरों के मूत्र के सीधे संपर्क में आने या संक्रमित पानी, मिट्टी या भोजन के माध्यम से फैलता है। लेप्टोस्पाइरा (Leptospira) बैक्टीरिया नाक, आंखों या एक छोटे खुले घाव के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। लेप्टोस्पायरोसि की बीमारी उन लोगों में अधिक देखने को मिलती है, जो मानसून के समय नियमित रूप से प्रदूषित पानी के संपर्क में आते हैं।

लेप्टोस्पाइरोसिस के लक्षण – Leptospirosis symptoms in Hindi

लेप्टोस्पायरोसिस के अधिकतर लक्षण इन्फ्लूएंजा के सामान होते हैं, इन लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  • सिरदर्द
  • बदन दर्द
  • बुखार
  • कंपकंपी
  • गर्दन में अकड़न
  • मस्तिष्क और पेट की सूजन, इत्यादि।

(और पढ़े – एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) क्या है लक्षण कारण जांच इलाज और बचाव…)

लेप्टोस्पाइरोसिस से बचाव – Leptospirosis prevention in Hindi

मानसून के मौसम में लेप्टोस्पाइरोसिस की रोकथाम के लिए व्यक्ति निम्न उपाय को अपना सकते हैं, जैसे:

  • पैरों को गीला होने से बचाने के लिए उचित जूते या चप्पल पहनें
  • दूषित पानी से बचें या पानी वाले क्षेत्रों में न जाएँ
  • पालतू जानवरों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें तथा उनकी नियमित जांच कराएँ
  • खुले घाव को हर समय ढक कर रखें
  • संक्रमित जानवरों, विशेष रूप से जंगली चूहों से दूर रहें
  • यदि पालतू जानवर बीमार है, तो उसके काटने और शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से खुदको बचाएं, इत्यादि।

खाज – Scabies in Hindi

खाज – Scabies in Hindi

मानसून के मौसम में खाज या स्कैबीज त्वचा से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है। यह शिशुओं को अधिक परेशान करती है। परजीवी माइट (Parasitic mites) जो आकार में छोटे होते हैं, खाज या स्केबीज का प्रमुख कारण बनते हैं यह त्वचा के गर्म और नम क्षेत्रों जैसे- कांख, मुड़ी हुई त्वचा, कोहनी, जननांगों और सिर पर भी पैदा हो सकते हैं। यह संक्रामक आपस में त्वचाओं के संपर्क से भी फैल सकता है।

(और पढ़े – स्केबीज (खाज) होने के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव…)

खाज (स्कैबीज) के लक्षण – Scabies Symptoms in Hindi

खाज या स्केबीज की पहचान निम्न लक्षणों के आधार पर की जा सकती है, जैसे:

  • पानी से भरे फफोले या लाल चकत्ते उत्पन्न होना
  • रात में अधिक गंभीर खुजली होना
  • गर्दन के आसपास और सिर की त्वचा, चेहरे, हथेली और पैर के तलवों में खुजली उत्पन्न होना
  • पूरे शरीर में जलन पैदा होना, इत्यादि।

(और पढ़े – खुजली दूर करने के लिए 10 घरेलू उपाय…)

खाज (स्कैबीज) की रोकथाम – Scabies prevention in hind

मानसून के मौसम में स्कैबीज से बचने के लिए निम्न तरीकों को अपनाया जा सकता है, जैसे:

  • ऐसे लोगों से दूर रहें जिन्हें त्वचा का संक्रमण है
  • बेडशीट, कंबल और अन्य घरेलू सामानों को नियमित रूप से धोएं
  • पूरे कपड़े पहनें तथा त्वचा को कीटाणुरहित रखने के लिए उचित तरीकों को अपनायें
  • कपड़ों को साफ-सुथरा रखें, तथा कपड़ों को धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें
  • कपड़ों को उच्च तापमान पर सुखाएं

(और पढ़े – खाज (स्कैबीज़) दूर करने के घरेलू उपाय…)

पीलिया – Jaundice in Hindi

पीलिया – Jaundice in Hindi

पीलिया, लीवर से सम्बंधित एक प्रकार का रोग होता है। शरीर में अतिरिक्त बिलीरुबिन की मात्रा, पीलिया का कारण बनती है। बिलीरुबिन एक अशिष्ट उत्पाद है जो आपके लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के परिणामस्वरूप उत्पादित होता है। बिलीरुबिन के उत्सर्जित में लिवर की अहिम भूमिका होती है। अर्थात पीलिया तब उत्पन्न होता है जब व्यक्ति का यकृत (लिवर), रक्त से उच्च बिलीरुबिन (bilirubin) के स्तर को पृथक करने में असमर्थ होता है। लीवर में खराबी और संक्रमण की स्थिति पीलिया रोग का प्रमुख कारण बनती है।

(और पढ़े – पीलिया के कारण, लक्षण और उपचार…)

पीलिया के लक्षण – Jaundice symptoms in Hindi

पीलिया के सामान्य लक्षणों में निम्न को शामिल किया जाता है, जैसे:

  • त्वचा का रंग पीला हो जाना
  • आंखों का सफेद भाग का पीला दिखाई देना
  • मूत्र का रंग गहरा पीला होना
  • शरीर में खुजली होना
  • थकान महसूस होना
  • पेट में दर्द होना
  • वजन घटना
  • उल्टी होना
  • पेट फूलना और भूख में कमी
  • कब्ज या खट्टी डकार आना
  • बुखार
  • जोड़ों में दर्द
  • दस्त लगना, इत्यादि।

(और पढ़े – डकार क्यों आती है डकार आने से रोकने के घरेलू उपाय…)

पीलिया से बचाव – Jaundice prevention in Hindi

पीलिया यकृत के उचित तरीके से कार्य न करने से संबंधित बीमारी है। अतः व्यक्तियों को पीलिया की रोकथाम के लिए यकृत (लिवर) स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पीलिया रोग से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाये जा सकते हैं, जैसे:

  • संतुलित आहार का सेवन करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • शराब का अत्यधिक सेवन न करें।
  • विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से बचें।
  • हेपेटाइटिस ए और मलेरिया के जोखिमों को कम करें।
  • दूषित भोजन और पानी के सेवन से बचें और अच्छी स्वच्छता बनाए रखें, इत्यादि।

(और पढ़े – पीलिया का घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज…)

मानसूनी बीमारियों को रोकने के उपाय – monsoon diseases prevention in Hindi

मानसून के मौसम के कुछ सामान्य सम्पूर्ण स्वास्थ्य संबंधी उपाय, जो आपको मानसून बीमारियों से बचने में मदद कर सकते हैं, निम्न हैं

  • स्वच्छ पानी का सेवन करें – मानसून के मौसम में दूषित पानी पीने से ही टाइफाइड, पीलिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डायरिया जैसे प्रमुख जल जनित रोग उत्पन्न हो सकते हैं अतः बारिस के मौसम में पेयजल स्रोत को दूषित होने से बचाएं तथा साफ-स्वच्क्ष और उबला हुआ पानी का सेवन करें।
  • बारिश के मौसम में खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रूमाल से अच्छी तरह से ढकें।
  • मच्छर को भागने के लिए मच्छर प्रतिरोधी रसायनों का प्रयोग करें तथा सोते समय मच्छरदानी लगायें।
  • मानसून के मौसम में त्वचा को फंगल संक्रमण से बचाने के लिए कपड़ों को पूरी तरह से सूखा रखें।
  • बारिश के मौसम में कीटाणुरहित तथा पूरे कपड़े पहनें।
  • मानसून के मौसम में ताजा और अच्छी तरह पकाया हुआ भोजन का सेवन करें और जहाँ तक हो सके बाहर का खाना न खाएं।
  • सिनेमाघरों या प्रदर्शनियों और अन्य भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाएँ।
  • बारिश के मौसम में नियमित रूप से हैंड सैनिटाइजर (hand sanitisers) का प्रयोग करें।
  • मानसून के मौसम में प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्वस्थ आहार का सेवन करें।
  • मानसून के दौरान बीमारी को रोकने के लिए नियमित रूप से टीकाकरण करवाएं, इत्यादि।

(और पढ़े – स्वस्थ रहने के उपाय और तरीके…)

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