टाइफाइड बुखार कारण लक्षण और इलाज – Typhoid Fever in hindi

टाइफाइड बुखार कारण लक्षण और इलाज - Typhoid Fever in hindi
Written by Ganesh

Typhoid Fever in Hindi टाइफाइड बुखार क्या है?, लोगों को टाइफाइड बुखार कैसे होता है?, टाइफाइड फीवर की जाँच?, टाइफाइड बुखार के कारण लक्षण, इलाज की जानकारी टाइफाइड बुखार एक गंभीर बीमारी है जो सालमोनेला टाइफी (Salmonella typhi) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी दूषित भोजन एवं पानी के कारण होती है।

इलाज के अभाव में हर साल 10 से 30 प्रतिशत लोग इस बीमारी से मर जाते हैं। इस बीमारी से पीड़ित रोगी को आमतौर पर भूख नहीं लगती है, सिर दर्द बना रहता है और उसे सुस्ती महसूस होती है। इसके अलावा शरीर में लगातार दर्द और बुखार बना रहता  है। मरीज के मल, पेशाब और खून की जांच के बाद शरीर में सालमोनेला बैक्टीरिया का निदान (diagnose) किया जाता है और इस बीमारी के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दी जाती है।

1. टाइफाइड बुखार के कारण – Causes of Typhoid Fever in Hindi
2. टाइफाइड बुखार के लक्षण – Symptoms of Typhoid Fever in Hindi
3. टाइफाइड बुखार का निदान – Typhoid Fever Diagnosis in Hindi
4. टाइफाइड बुखार का इलाज – Treatment for Typhoid Fever in Hindi
5. टाइफाइड बुखार से बचाव – Typhoid Fever prevention in Hindi

टाइफाइड बुखार के कारण – Causes of Typhoid Fever in Hindi

Typhoid bukhar ka karan in Hindi दूषित पानी या भोजन का सेवन करने के बाद सालमोनेला बैक्टीरिया छोटी आंत पर धावा बोल देता है और अस्थायी रूप से खून (bloodstream) में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद सफेद रक्त कोशिकाओं द्वारा यह बैक्टीरिया लिवर, प्लीहा और अस्थि मज्जा ( bone marrow) में चला जाता है। यह बैक्टीरिया इन  अंगों की कोशिकाओं में अपनी संक्या बढ़ाता है और दोबारा से खून में प्रवेश करता है। इसके बाद मरीज में बुखार के लक्षण दिखायी देने लगते हैं। बैक्टीरिया पित्ताशय की थैली, पित्त प्रणाली (biliary system) और आंत की लसीका ऊतक पर आक्रमण करता है, यहां बैक्टीरिया तेजी से पनपता है। यह बैक्टीरिया आंत के रास्ते मल में चला जाता है। शुरुआत में मल सामान्य रहता है लेकिन कुछ दिनों बाद मल में खून आने लगता है और टाइफाइड गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है।

टाइफाइड बुखार के लक्षण – Symptoms of Typhoid Fever in Hindi

Typhoid Fever टाइफाइड होने का मुख्य लक्षण यह है कि व्यक्ति को 103 F-104 F से अधिक बुखार हो सकता है। बुखार कुछ दिनों तक बहुत हल्का रहता है लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

टाइफाइड के लक्षण (sign) इस प्रकार हैं-

  • कम भूख लगना
  • सिर दर्द होना
  • शरीर में सामान्य दर्द, ऐंठन और पीड़ा
  • सुस्ती
  • 104 डिग्री फॉरेनहाइट से अधिक बुखार होना
  • डायरिया
  • पेट में दर्द होना
  • हृदय गति धीमी होना
  • कब्ज

Typhoid Fever होने पर कुछ लोगों को छाती में भी पीड़ा होती है और पेट में दर्द एवं परेशानी होना भी सामान्य होता है। टाइफाइड होने पर कुछ रोगियों के सीने और पेट पर दाने(rash) भी निकल आते हैं जो सपाट और गुलाबी रंग के दिखायी देते हैं।बुखार लगातार बना रहता है और मरीज की स्थिति में सुधार होने में 3 से 4 हफ्तों का समय लगता है। इसके अलावा कुछ मरीज एक से दो हफ्ते में ही बेहतर महसूस करने लगते हैं लेकिन उनमें टाइफाइड के ये लक्षण फिर से दिखायी देने लगते हैं।

टाइफाइड बुखार का निदान – Typhoid Fever Diagnosis in Hindi

Typhoid Fever टाइफाइड के निदान के लिए मरीज के मल और ब्लड का सैंपल लेकर परीक्षण किया जाता है। इसके अलावा कभी-कभी अस्थि मज्जा बायोस्पी(bone marrow biopsy) की भी आवश्यकता पड़ती है। टाइफाइड बुखार के शुरूआती चरण में मल जांच (stool test) की रिपोर्ट निगेटिव भी हो सकती है इसलिए टाइफाइड बुखार की जटिलताओं जैसे आंत में विकृति, हड्डियों और लिवर जैसे अंगों में फोड़े  का पता लगाने के लिए  रेडियोग्राफ्स, सीटी और एमआर जैसे एंसिलियरी टेस्ट किये जाते हैं।

टाइफाइड बुखार का इलाज – Treatment for Typhoid Fever in Hindi

Typhoid Fever टाइफाइड बुखार के इलाज के लिए मरीज को एंटीबायोटिक्स दी जाती है जो सालमोनेला बैक्टीरिया को मारने में बहुत प्रभावी होती है। एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल से पहले टाइफाइड बुखार से लगभग 20 प्रतिशत लोग मर जाते थे। संक्रमण, निमोनिया, आंत में ब्लीडिंग और आंत में छिद्र हो जाने के कारण लोगों की मृत्यु हो जाती थी। लेकिन टाइफाइड बुखार के मरीज को एंटीबायोटिक्स देने और उसके उचित देखभाल के बाद इस बीमारी से मरने वालों की संख्या अब 1 से 2 प्रतिशत ही रह गई है।

रोगी को सही तरीके से एंटीबायोटिक थेरेपी देने से उसकी हालत में एक से दो दिन के भीतर ही सुधार दिखने लगता है और वह 7 से 10 दिनों के भीतर ठीक हो जाता है। टाइफाइड बुखार के इलाज के लिए कई  एंटीबायोटिक्स बहुत प्रभावी होती हैं। टाइफाइड बुखार ठीक करने के लिए क्लोराम्फेनिकोल (Chloramphenicol)  दवा का इस्तेमाल बहुत सालों से किया जा रहा है क्योंकि इसका साइड इफेक्ट नहीं होता है। टाइफाइड के इलाज के लिए अलग-अलग तरह के एंटीबायोटिक्स मरीज को दिये जाते हैं। ज्यादातर जगहों पर टाइफाइड के मरीज को सिप्रोफ्लोजैसिन(Ciprofloxacin) या ओफ्लोजैसिन(Ofloxacin) आदि दवाएं दी जाती हैं।

टाइफाइड बुखार से बचाव – Typhoid Fever prevention in Hindi

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि टाइफाइड बुखार सालमोनेला नामक बैक्टीरिया के कारण होता है जो दूषित भोजन एवं पानी में जमा होता है। इसलिए यदि आप इन चीजों को खाने से सावधानी बरते तो टाइफाइड बुखार से भी बच सकते हैं। आइये जानें क्या है टाइफाइड का बचाव-

इस बीमारी से बचने के लिए अधिक जोखिम भरे जगहों पर यात्रा करने वाले लोगों को टाइफाइड का वैक्सीन लगवाना चाहिए।

टाइफाइड से बचने के लिए बोतल बंद पानी पीना चाहिए या फिर पानी को उबाल कर पीना चाहिए।

अच्छी तरह से पका भोजन और गर्म भोजन करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। ठंडे भोजन में सोलमोनेला बैक्टीरिया हो सकते हैं इसलिए इन्हें खाने से परहेज करें।

अधिक देर से कटे या छिले हुए फल खाने से परहेज करें। फलों को खाने से तुरंत पहले ही छिलका उतारें, इससे आप इस बीमारी की चपेट में आने से बच सकते हैं।

ठेले से कोई भी खाद्य पदार्थ (foods) खरीदकर न खाएं और यदि बाजार से पका हुआ भोज्य पदार्थ खरीद रहे हों तो यह ध्यान रखें की वह ढक कर रखी गई हो और गर्म हो। 

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