Category - आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद के मूल सिद्धांत के अनुसार शरीर में मूल तीन-तत्त्व वात, पित्त, कफ (त्रिधातु) हैं। अगर इन तीनो में संतुलन बना रहे, तो कोई बीमारी आप तक नहीं आ सकती। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तभी कोई बीमारी शरीर पर हावी होती है। इसी सिद्धांत को लेकर हमारे ऋषि मुनियों, आयुर्वेदज्ञों ने कई नुस्खों का आविष्कार किया है।
भारत में अनेकों ऐसे आयुर्वेदज्ञ पैदा हुए, जिन्होंने इस पद्धति के द्वारा सैकड़ों रोगियों आयुर्वेदिक उपचार के द्वारा सेवा करते हुए धन, यश, कीर्ति प्राप्त की। आयुर्वेदिक उपचार ही एक ऐसी चिकित्सा है, जिसके माध्यम से कम खर्चे में किसी भी रोग को समूल नष्ट किया जा सकता है।
एलोपैथिक या होमियोपैथिक चिकित्सा में तुरन्त तो आराम मिलता है, परन्तु यह निश्चित नहीं कि रोग जड़ से खत्म हो जायेगा। साथ ही एक परेशानी और है कि वह रोग सही हो न हो, परन्तु लगातार दवा लेते रहने पर दूसरा कोई रोग शरीर में पनप सकता है। परन्तु, आयुर्वेद में ऐसा नहीं के बराबर है। आयुर्वेद उपचार में थोड़ी देर अवश्य लगती है, परन्तु कोई नुकसान या साइड इफेक्ट नहीं होता, वरन वह रोग जिसके लिये दवा का सेवन करते हैं (बशर्ते दवा उसी मर्ज की बनी हो व पूर्ण प्रभावक हो), तो वह रोग निश्चय ही समूल नष्ट होता ही है। हम पूर्ण प्रमाणिक, अनुभवगम्य आयुर्वेदिक लेख व ऐसे सरल नुस्खे देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बनाने में लागत व मेहनत कम लगे। और औषधि का निर्माण कोई भी आराम से कर सके व पूर्ण लाभ ले सके|

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