पीलिया के कारण, लक्षण और उपचार – Jaundice Causes, Symptoms and Treatment in Hindi

पीलिया के कारण, लक्षण और उपचार - Jaundice Causes, Symptoms and Treatment in Hindi
Written by Ganesh

पीलिया रोग जिसे ज्वाइंडिस (Jaundice) भी कहा जाता है लीवर से संबंधित बीमारी है जिससे हर वर्ष हजारों लोगों की मृत्यु हो जाती है पीलिया का मतलब पीले रंग की त्वचा से है जो कि पीलिया होने का मुख्य प्रमाण होता है आज हम आप को पीलिया क्या है पीलिया के कारण, पीलिया के लक्षण और पीलिया के उपचार के साथ साथ पीलिया से बचने के उपाय को भी बताएंगे|

पीलिया होने पर त्वचा का रंग पीला और आंखे सफेद रंग की हो जाती हैं और शरीर के अंदर का तरल भी पीले रंग का हो जाता है|

इसका मुख्य कारण हमारे शरीर में बनने वाला एक पदार्थ होता है जिससे बिलीरुबिन (Bilirubin) कहा जाता है बिलीरुबिन अपशिष्ट पदार्थ है जो कि हमारे रक्त में पाया जाता है इसका रंग पीला होता है

जब हमारा लीवर बिलीरुबिन को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता तो पीलिया रोग हो जाता है

समय से पहले पैदा होने वाले शिशुओं में पीलिया रोग होने की संभावना अधिक होती है हालांकि पीलिया सभी उम्र के लोगों को हो सकता है जिसका मुख्य कारण यकृत में समस्या होती है

  1. पीलिया से संबंधित मुख्य बातें – facts on jaundice in Hindi
  2. पीलिया का कारण – Causes of jaundice in Hindi
  3. पीलिया के लक्षण – Symptoms of jaundice in Hindi
  4. पीलिया का निदान – Diagnosis of Jaundice in Hindi
  5. नवजात शिशुओं में पीलिया होना – Jaundice of newborns in Hindi
  6. पीलिया रोग होने पर बिलीरुबिन का स्तर – Bilirubin levels when having jaundice in Hindi
  7. पीलिया रोग का इलाज – Jaundice Treatment in Hindi
  8. पीलिया के जोखिम और जटिलताएं – Jaundice Risks & Complications in Hindi
  9. पीलिया से बचाव के उपाय – Prevention of Jaundice in Hindi
  10. पीलिया होने पर भोजन – Diet For Jaundice Patient In Hindi
  11. पीलिया मे परहेज – piliya me kya na khaye, Jaundice In Hindi

पीलिया से संबंधित मुख्य बातें – facts on jaundice in Hindi

  • ज्वाइंडिस रक्त में बिलीरुबिन (Bilirubin)  जो कि एक अपशिष्ट पदार्थ है कि अधिक निर्माण के कारण होता है
  • पीलिया होने का मुख्य कारण लिवर (liver) की कमजोरी है लिवर में सूजन और पित्त के निर्माण में कमी होना माना जाता है
  • इसके लक्षणों में त्वचा का पीला होना आंखों का सफेद होना मूत्र का लाल होना और खुजली होना मुख्य रूप से शामिल होते हैं
  • पीलिया के निदान के लिए यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और कई तरह के परीक्षण शामिल हो सकते हैं
  • ज्वाइंडिस (पीलिया) के कारणों को जानकर इसका इलाज किया जा सकता है और पूरी तरह पीलिया से मुक्ति पाई जा सकती है

(और पढ़ें – बिलीरुबिन ब्लड टेस्ट क्या है, कीमत, परिणाम और सामान्य स्तर)

पीलिया का कारण – Causes of jaundice in Hindi

त्वचा का पीला पड़ जाना और आंखों का सफेद होना पीलिया के रूप में जाना जाता है पीलिया का मुख्य कारण शरीर में बिलीरुबिन (Bilirubin)  को ठीक से बाहर ना निकाल पाना होता है जो की यकृत से संबंधित बीमारी होती है

बिलीरुबिन एक पीले रंग का अपशिष्ट पदार्थ है जो कि हमारे खून में पाया जाता है

हमारा जिगर खून को फ़िल्टर कर खून से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालता है जिसमें बिलीरुबिन भी शामिल होता है लेकिन जब हमारा लीवर बिलीरुबिन को फ़िल्टर नहीं कर पाता तो यह अन्य रसायनों के साथ संलग्न हो जाता है और जिससे हमें घातक परिणाम प्राप्त होते हैं और अंत में पीलिया रोग हो जाता है

लीवर का कार्य पित्त को उत्पन्न करना भी होता है जो कि हमें पाचन में सहायता प्रदान करता है Bilirubin पित्त को भी कमजोर बनाता है जिससे हमें पाचन संबंधी समस्याएं होने लगती हैं और अंत में त्वचा का रंग पीला होने लगता है जिससे पीलिया रोग हो जाता है Jaundice in Hindi

(और पढ़े – लीवर की कमजोरी कारण लक्षण और दूर करने के उपाय)

पीलिया के लक्षण – Symptoms of jaundice in Hindi

पीलिया के लक्षण - Symptoms of jaundice in hindi

ज्वाइंडिस जिसे पीलिया के नाम से जानते हैं सबसे आम लक्षणों में त्वचा का पीला होना पाया जाता है इसके अतिरिक्त पीलिया के निम्नलिखित लक्षण होते हैं

(और पढ़े – ऐसे दूर रहें वायरल फीवर से)

पीलिया का निदान – Diagnosis of Jaundice in Hindi

डॉक्टरों को पीलिया का निदान और बिलीरुबिन के स्तर की पुष्टि करने के लिए रोगी के इतिहास और भौतिक परीक्षण में सबसे पहला काम पेट की सूजन और लीवर की सूजन को जानना होता है

  • एक नरम लीवर, यकृत सिरोसिस का कारण होता है।
  • जबकि यह सख्त लीवर, लीवर कैंसर को दर्शाता है।

पीलिया की जांच के लिए कई परीक्षण किए जा सकते हैं जिसमें सबसे पहले यकृत का परीक्षण होता है और उसमें यह पता लगाया जाता है कि आपका यकृत ठीक से काम कर रहा है या नहीं

इसके अलावा यदि चिकित्सक कारण का पता नहीं लगा सकते तो वह है आपको अन्य परीक्षण जिसमें रक्त परीक्षण शामिल होता है किया जा सकता है जो कि बिलीरुबिन के स्तर और खून की जांच के लिए किया जाता है

इसमें मुख्य 3 परीक्षण शामिल होते हैं

  • बिलीरूबिन परीक्षण – यह संयुग्मित बिलीरुबिन के स्तर की जांच के लिए किया जाता है जो की ब्लू रिबन के उच्च स्तर जिसे हेमोलीटिक पीलिया के नाम से जाने जाते हैं के लिए ऐसे किया जाता है
  • सम्पूर्ण रक्त परीक्षण – इस प्रकार के रक्त परीक्षण में लाल रक्त कोशिकाओं से रक्त श्वेत रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स के गिनती के आधार पर पीलिया रोग की पहचान की जाती है
  • हेपेटाइटिस ए बी और सी परीक्षण – यकृत संक्रमण की एक श्रृंखला को पहचानने के लिए इस प्रकार के परीक्षण किए जाते हैं

इसके अतिरिक्त चिकित्सक आपके जिगर की संरचना की जांच करेंगे यदि उन्हें इसमें कोई संदेह उत्पन्न होता है तो वह आपको एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड स्कैन सहित इमेजिंग टेस्ट का उपयोग करने को कहेंगे|

अंत में वह एक यकृत  बायोप्सी के द्वारा यकृत की सूजन सिरोसिस कैंसर और फैटी लिवर की जांच कर सकते हैं इस परीक्षण में लीवर के एक छोटे से उत्तर को शरीर से बाहर निकाल कर उस की जांच की जाती है।

(और पढ़ें – फैटी लिवर के लक्षण, कारण, उपचार और बचाव के बारे में )

नवजात शिशुओं में पीलिया होना – Jaundice of newborns in Hindi

नवजात शिशुओं में पीलिया होना एक सामान्य स्वास्थ समस्या है लगभग 60% नवजात शिशुओं में पीलिया रोग देखा जाता है। यह गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले पैदा हुए समय पूर्व शिशुओं में 80% तक पाया जाता है।

पीलिया के लक्षण शिशुओं में जन्म के 72 घंटों के भीतर दिखाई देते हैं।

शिशु में पीलिया रोग होने पर शिशु के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं टूट जाती हैं या तो प्रतिस्थापित हो जाती हैं। जिससे अधिक बिलीरुबिन का उत्पादन होता है जिसके कारण शिशुओं में पीलिया रोग हो जाता है। इस से शिशुओं की छाती कम विकसित होती है और लीवर ठीक से काम न कर पाने के कारण बिलीरुबिन को छानने में कठिनाई आती है जिससे पीलिया रोग उत्पन्न होता है।

शिशुओं में पीलिया रोग के लक्षण बगैर किसी ट्रीटमेंट के 2 हफ्ते के अंदर ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि शिशु में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक है तो उसे इलाज की आवश्यकता होती है जिसमें ब्लड ट्रांसफ्यूजन और फोटोथेरेपी का सहारा लिया जाता है।

शिशुओं में पीलिया रोग होने पर उपचार आवश्यक है क्योंकि नवजात शिशुओं में पीलिया कार्निकेटरस (kernicterus) को पैदा कर सकता है। यह बहुत ही दुर्लभ प्रकार है जिसमें मस्तिष्क की क्षति होने की संभावना बनी रहती है।

(और पढ़ें – नवजात शिशु में पीलिया (जॉन्डिस) के लक्षण, कारण और इलाज)

पीलिया रोग होने पर बिलीरुबिन का स्तर – Bilirubin levels when having jaundice in Hindi

बिलीरुबिन का स्तर रक्त परीक्षण के द्वारा पता लगाया लगाया जाता है जो कि पीलिया की शुरुआत के लिए जिम्मेदार होता है

बिलीरुबिन स्तर को मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (मिलीग्राम / डीएल) मे मापा जाता है  वयस्क और बड़े बच्चों के बीच 0.3 और 0.6 एमजी / डीएल का स्तर होना चाहिए| 9 महीने की गर्भावस्था के बाद पैदा हुए 97 प्रतिशत शिशुओं में 13 मिलीग्राम / डीएल का स्तर होता है यदि वे इस से उच्च स्तर दिखाते हैं तो उन्हें आमतौर पर आगे की जांच के लिए भेज दिया जाता है

यह सारी श्रेणियां प्रयोगशाला के बीच भिन्न भिन्न हो सकती हैं सामान्य श्रेणी से कितना अधिक स्तर है इस बात पर व्यक्ति का उपचार निर्भर करता है

पीलिया रोग का इलाज – Jaundice Treatment in Hindi

जॉन्डिस का उपचार अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करता है

पीलिया का उपचार मुख्यतः पीलिया के लक्षणों के बजाए पीलिया होने की वजह को ढूंढ कर उसे खत्म किया जाता है।

  • एनीमिया के द्वारा पीलिया रोग होने पर आयरन की खुराक दी जाती है साथ में अधिक आयरन युक्त खाद्य पदार्थ खाने से रक्त में आयरन की मात्रा को बढ़ाकर पीलिया का इलाज किया जाता है।
  • हेपेटाइटिस से प्रेरित पीलिया को एंटीवायरल या स्टेरॉयड दवाओं की आवश्यकता होती है।
  • रुकावट से संबंधित पीलिया को हटाने के लिए चिकित्सक सर्जरी के द्वारा पीलिया का इलाज कर सकते हैं।
  • यदि पीलिया किसी दवा के सेवन के कारण हो हुआ है तो उपचार के लिए वैकल्पिक रूप से उस दवा को बदलना शामिल होता है।

(और पढ़ें – हेपेटाइटिस बी के लक्षण, कारण, जांच, उपचार और रोकथाम)

पीलिया के जोखिम और जटिलताएं – Jaundice Risks & Complications in Hindi

जटिलताओं का प्रकार और जटिलताओं की गंभीरता पीलिया होने के कारण पर निर्भर करती है पीलिया रोग होने पर निम्नलिखित जटिलताओं का सामना एक वयस्क को करना पड़ सकता है

इसके अतिरिक्त जैसा कि बताया गया है कि पीलिया यकृत से संबंधित बीमारी है तो पीलिया के जोखिम में यकृत में तीव्र सूजन उत्पन्न हो सकती  है

पीलिया से बचाव के उपाय – Prevention of Jaundice in Hindi

सामान्‍य रूप से पीलिया एक यकृत से संबंधित बीमारी है। इसलिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने यकृत को स्वस्थ रखें अपने खाने की आदतों को सुधारें और नियमित रूप से कसरत करते रहें। यकृत से संबंधित बीमारियों में शराब के सेवन को त्याग देना चाहिए क्योंकि शराब सर्वाधिक यकृत को प्रभावित करती है।

(और पढ़े – शराब पीना कैंसर का कारण बन सकता है)

पीलिया होने पर भोजन – Diet For Jaundice Patient In Hindi

हर किसी बीमारी को ठीक करने में भोजन को आवश्यक माना जाता है पीलिया का इलाज करा लेने पर उसके साथ अगर संतुलित आहार लिया जाए तो आप पीलिया को जल्दी से जल्दी ठीक कर सकते हैं इसके लिए आपको थोड़े-थोड़े भोजन की मात्रा का सेवन दिन में चार पांच बार करना है

खाने से पहले साफ सफाई का ध्यान अवश्य रखें जिसमें हाथों का धोना और साफ पानी को पीना शामिल है

पीलिया से ग्रस्त रोगी को हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए इसके साथ ही साथ वह सब्जी और फलों के जूस को भी ले सकते हैं जैसे कि करेला का जूस इस में लाभदायक होता है करेले के जूस के साथ नींबू का रस, टमाटर, मूली, जों, गन्ना और गाजर भी पीलिया को ठीक करने के लिए उपयोगी मानी जाती है

Jaundice पीलिया रोग से बचने के लिए और उससे जल्दी ठीक होने के लिए आप छाछ और नारियल पानी का सेवन भी कर सकते हैं और ड्राई फ्रूट का भी सेवन इसमें किया जा सकता है।

(और पढ़ें – पीलिया में क्या खाएं और क्या न खाए)

पीलिया मे परहेज – Piliya me kya na khaye, Jaundice In Hindi

गंभीर बीमारी के रूप में पीलिया को जाना जाता है। पीलिया लीवर से संबंधित बीमारी है इसलिए आपको मसालेदार नमकीन और तेल युक्त भोजन करने से बचना चाहिए। पीलिया होने पर शराब का सेवन बिल्कुल ही नहीं करना चाहिए। तेल युक्त भोजन करने पर यह भोजन हमारे शरीर के अंदर पच नहीं पाता क्योंकि हमारा लीवर सही से काम नहीं करता इसलिए पीलिया होने पर तेली पदार्थों से बने भोजन को लेने से बचें। इसके साथ ही दाल और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर भोजन से भी बचना  चाहिए।

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