फैटी लिवर के लक्षण, कारण, उपचार और बचाव के बारे में – Fatty Liver Symptoms, Causes, Treatment And Prevention In Hindi

फैटी लिवर के लक्षण, कारण, उपचार और बचाव के बारे में - Fatty Liver Symptoms, Causes, Treatment And Prevention In Hindi
Written by Sourabh

Fatty Liver In Hindi फैटी लिवर रोग, लिवर में बहुत अधिक वसा के निर्माण को संबोधित करता है। अधिकांश स्थितियों में फैटी लिवर किसी भी प्रकार के लक्षणों को प्रगट नहीं करता है, लेकिन यह स्वास्थ्य सम्बंधित जटिलताओं का कारण बन सकता है। फैटी लिवर की बीमारी विश्व स्तर पर लगभग 25% लोगों को प्रभावित करती है। यकृत, मानव शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह विषाक्त पदार्थों को दूर करने और खाद्य पदार्थों से पोषक तत्वों को अवशोषित करने का कार्य करता है। यकृत में वसा की कुछ मात्रा का पाया जाना सामान्य है, जो वसा लिवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

लेकिन कुछ स्थितियों में अतिरिक्त वसा लीवर की सूजन का कारण बन सकता है। जिसे स्टीटोहेपेटाइटिस (steatohepatitis) कहा जाता है, जो लिवर की क्षति का कारण बनती है। अतः फैटी लिवर की स्थिति स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है, जिसका इलाज किया जाना आवश्यक होता है।

आज के इस लेख में आप जानेगें कि फैटी लिवर क्या है, इसके लक्षण, कारण, उपचार क्या हैं और इसका परीक्षण कैसे किया जा सकता है तथा फैटी लिवर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं आदि के बारे में।

1. फैटी लिवर क्या है – What Is Fatty Liver in hindi
2. फैटी लिवर के प्रकार – Fatty Liver Types in hindi
3. फैटी लिवर के लक्षण – Symptoms of Fatty Liver in hindi
4. फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk factors of fatty liver in hindi
5. फैटी लिवर की जटिलताएं – fatty liver Complications in hindi
6. फैटी लिवर रोग का निदान – Fatty Liver Diagnosis in hindi
7. फैटी लिवर का उपचार – Fatty Liver Treatment in hindi
8. फैटी लिवर सप्लीमेंट्स – Supplements for Fatty Liver in hindi
9. फैटी लिवर की रोकथाम और बचाव – Fatty Liver Prevention in hindi
10. फैटी लिवर के लिए एक्सरसाइज – Fatty Liver Exercise in hindi
11. फैटी लिवर का घरेलू इलाज – Fatty Liver Home Remedies in hindi
12. फैटी लिवर डाइट – Fatty Liver diet in hindi
13. फैटी लिवर में क्या नहीं खाना चाहिए – fatty liver foods to avoid in hindi

फैटी लिवर क्या है – What Is Fatty Liver in hindi

फैटी लिवर क्या है - What Is Fatty Liver in hindi

फैटी लिवर की बीमारी को डॉक्टर द्वारा हिपेटिक स्टीटोसिस (hepatic steatosis) के नाम से भी जाना जाता है। फैटी लिवर की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब यकृत कोशिकाओं में बहुत अधिक वसा का निर्माण होता है। हालाँकि लिवर कोशिकाओं में वसा की कुछ मात्रा का पाया जाना एक सामान्य बात है। लेकिन यदि यकृत में 5% से अधिक वसा पाया जाता है, तो इस स्थिति को वसायुक्त यकृत (फैटी लिवर) माना जाता है। इसके अतिरिक्त यकृत के वजन का लगभग 10 प्रतिशत से अधिक वसा का पाया जाना, फैटी लिवर की अधिक गंभीर जटिलताओं के विकास की ओर संकेत हो सकता है।

कुछ स्थितियों में बहुत अधिक शराब का सेवन फैटी लिवर का कारण बन सकता है, जिसे अल्कोहलिक फैटी लिवर (alcoholic Fatty Liver) कहते है। फैटी लिवर से सम्बंधित अधिकांश स्थितियां नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर से सम्बंधित होती हैं। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFL), यकृत रोग की प्रारंभिक, प्रतिवर्ती (reversible) स्थिति है।

(और पढ़े – लिवर (यकृत या जिगर) क्या है, कार्य, रोग और स्वास्थ्य रखने के तरीके…)

फैटी लिवर के प्रकार – Fatty Liver Types in hindi

फैटी लिवर के प्रकार - Fatty Liver Types in hindi

मुख्य रूप से फैटी लिवर रोग दो प्रकार का होता है: अल्कोहलिक फैटी लिवर और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर।

अल्कोहलिक फैटी लिवर – Alcoholic Fatty Liver in hindi

अल्कोहलिक फैटी लिवर (alcoholic Fatty Liver), बहुत अधिक शराब का सेवन भी लिवर की कोशिकाओं के अंदर अतिरिक्त वसा के निर्माण की स्थिति को संबोधित करता है। अल्कोहलिक फैटी लिवर की स्थिति से पीड़ित कुछ व्यक्तियों में कोई लक्षण प्रगट नहीं हो सकते हैं। लेकिन अगर लिवर के आकार में वृद्धि होती है, तो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या असुविधा का कारण बन सकती है। यद्धपि अल्कोहलिक फैटी लिवर (ALD) की रोकथाम संभव है। लेकिन यदि मरीज के द्वारा शराब का सेवन लगातर किया जाये, तो अल्कोहलिक फैटी लिवर (ALD) अधिक गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है, जिनमें शामिल हैं:

अल्कोहलिक हेपेटाइटिस (Alcoholic hepatitis) यह यकृत में सूजन से सम्बंधित समस्या है, जो बुखार, जी मिचलाना, उल्टी, पेट दर्द और पीलिया आदि लक्षणों के उत्पन्न होने का कारण बन सकती है।

अल्कोहलिक सिरोसिस (Alcoholic cirrhosis) – यह समस्या लिवर में स्कार ऊतक (scar tissue) के उत्पन्न होने से सम्बंधित समस्या है। अल्कोहलिक सिरोसिस (Alcoholic cirrhosis) से सम्बंधित लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

  • जलोदर की समस्या
  • उच्च रक्तचाप
  • रक्तस्राव
  • भ्रम उत्पन्न होना और व्यवहार में परिवर्तन
  • प्लीहा वृद्धि (Enlarged spleen)
  • जिगर की विफलता (Liver failure), इत्यादि।

(और पढ़े – पीलिया के कारण, लक्षण और उपचार…)

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर – Non-alcoholic fatty liver in hindi

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (Non-alcoholic fatty liver disease), मुख्य रूप से चयापचय सिंड्रोम (metabolic syndrome) के कारण उत्पन्न होता है, शराब का सेवन इस स्थिति का कारण नहीं बनता है। यह स्थिति आम तौर पर किसी भी प्रकार के लक्षणों का कारण नहीं बनती है, हालाँकि उच्च रक्तचाप, खराब कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर, इंसुलिन प्रतिरोध (insulin resistance) और पेट का मोटापा आदि लक्षण प्रगट हो सकते हैं। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर की स्थिति का निदान इमेजिंग परीक्षण (जैसे- अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई) के द्वारा किया जा सकता है। असामान्य यकृत की जांच के ब्लड परीक्षण (Liver function tests) भी आवश्यक हो सकता है।

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर मुख्य रूप से निम्न प्रकार के होते हैं, जैसे:

  • सिंपल फैटी लिवर (Simple fatty liver) – सिंपल फैटी लिवर की स्थिति में लीवर में अतिरिक्त वसा का संचय तो होता है, लेकिन लीवर में सूजन या लीवर की कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। यह स्थिति आमतौर पर गंभीर नहीं होती है या लिवर की समस्याओं का कारण नहीं बनती है।
  • नॉन अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (Non-alcoholic steatohepatitis (NASH)) – समय के साथ, नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की बीमारी एक अधिक गंभीर यकृत समस्या को जन्म दे सकती है, जिसे नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (non-alcoholic steatohepatitis) के रूप में जाना जाता है। लिवर में अधिक वसा का संचय और लिवर में सूजन से सम्बंधित यह समस्या हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है। यह स्थिति यकृत कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है, जिससे फाइब्रोसिस (fibrosis) या स्कार ऊतक उत्पन्न हो सकते हैं।

(और पढ़े – मोटापे से होने वाले रोग और उनसे बचाव…)

फैटी लिवर के लक्षण – Symptoms of Fatty Liver in hindi

फैटी लिवर के लक्षण - Symptoms of Fatty Liver in hindi

फैटी लिवर से सम्बंधित प्रारंभिक संकेत और लक्षण काफी सामान्य हो सकते हैं, हालांकि कुछ स्थितियों में इसके कोई लक्षण प्रगट नहीं होते हैं। फैटी लिवर के सामान्य लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

  • थकान और कमजोरी महसूस होना
  • पेट के दाएं ओर या केंद्र में दर्द
  • भूख में कमी आना
  • लिवर एंजाइमों के स्तर में वृद्धि
  • उच्च इंसुलिन का स्तर
  • उच्च ट्राइग्लिसराइड का स्तर
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • आँखों और त्वचा का पीला होना

फैटी लिवर की गंभीर स्थिति में निम्न लक्षणों को महसूस किया जा सकता है, जैसे:

  • पेट में सूजन (Swollen belly)
  • त्वचा के नीचे रक्त वाहिकाओं में वृद्धि
  • पुरुषों में सामान्य से बड़े स्तन
  • लाल हथेलियाँ
  • पीलिया, इत्यादि।

(और पढ़े – पेट दर्द के घरेलू उपाय और नुस्खे…)

फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk factors of fatty liver in hindi

फैटी लिवर के कारण और जोखिम कारक - Causes and Risk factors of fatty liver in hindi

अतिरिक्त कैलोरी के सेवन से लिवर में वसा का निर्माण होता है। अतः जब यकृत वसा को तोड़ने के लिए सामान्य तरीके से कार्य नहीं करता है, तब बहुत अधिक मात्रा में वसा का जमाव होता है। जिससे फैटी लिवर की समस्या उत्पन्न होती है। फैटी लिवर के उत्पन्न होने वाले कारणों और जोखिम कारकों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

  • मोटापा (Obesity) अर्थात 30 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स का होना।
  • अधिक वजन अर्थात 25 से 30 बॉडी मास इंडेक्स।
  • आंतों की बाईपास सर्जरी (bypass surgery)
  • उच्च ट्राइग्लिसराइड्स से सम्बंधित स्थितियों।
  • चयापचय सिंड्रोम (metabolic syndrome)
  • जेनेटिक कारक (genetic factors)
  • समय के साथ, बहुत अधिक शराब का सेवन।
  • तेजी से वजन घटना और कुपोषण की स्थिति।
  • रिफाइंड कार्ब्स (refined carbs) का अधिक सेवन।
  • सोडा (soda) और ऊर्जा पेय जैसे- फ्रुक्टोज में उच्च मीठे पेय।
  • आंत स्वास्थ्य में खराबी (Impaired gut health), जैसे- आंत बैक्टीरिया (gut bacteria) में असंतुलन, आंत कार्यों में अवरोध या अन्य आंत स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएँ।
  • क्रोनिक वायरल हेपेटाइटिस (chronic viral hepatitis) की समस्या।
  • कुछ दवाएं जैसे ग्लूकोकार्टोइकोड्स (glucocorticoids), मेथोट्रेक्सेट (methotrexate), सिंथेटिक एस्ट्रोजन, टेमोक्सीफेन (tamoxifen) और अन्य दवाओं का सेवन।
  • इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin resistance) और इंसुलिन के उच्च स्तर टाइप 2 मधुमेह वाले व्यक्तियों में फैटी लिवर का कारण बन सकते हैं।

(और पढ़े – लीवर की कमजोरी कारण लक्षण और दूर करने के उपाय…)

फैटी लिवर की जटिलताएं – fatty liver Complications in hindi

फैटी लिवर की जटिलताएं – fatty liver Complications in hindi

फैटी लिवर से सम्बंधित व्यक्ति को निम्न जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, जो कि निम्न हैं:

(और पढ़े – लीवर सिरोसिस के लक्षण, कारण, जांच, इलाज और बचाव…)

फैटी लिवर रोग का निदान – Fatty Liver Diagnosis in hindi

फैटी लिवर रोग का निदान - Fatty Liver Diagnosis in hindi

फैटी लिवर की समस्या की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी ले सकता है, साथ ही साथ दवाओं और शराब के सेवन से सम्बंधित कुछ प्रश्न पूंछ सकता है। यदि मरीज के लक्षणों को देखकर डॉक्टर को लगता है कि उसे फैटी लिवर की बीमारी हो सकती है, तो वह निम्नलिखित परीक्षणों का आदेश दे सकता है:

शारीरिक परीक्षण (Physical examination) 

फैटी लिवर के समस्या के निदान के लिए डॉक्टर सर्वप्रथम शारीरिक परीक्षण कर सकता है। इस परीक्षण के तहत वजन, पेट में सूजन और पीलिया के लक्षणों की जाँच की जा सकती है।

रक्त परीक्षण (Blood tests)

यकृत असामान्यताएं जैसे- लिवर में सूजन, का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण आवश्यक हो जाता है, क्योंकि लिवर में सूजन, सिरोसिस का कारण बन सकती है। इसके अतिरिक्त रक्त परीक्षण वायरल हेपेटाइटिस और कुछ लिवर एंजाइमों (liver enzymes) जैसे- एलेनिन एमिनोट्रांस्फरेज (alanine aminotransferase (ALT)) और एस्पार्टेट एमिनोट्रांस्फरेज (aspartate aminotransferase (AST)), के उच्च स्तर की जांच के लिए भी आवश्यक होता है।

इमेजिंग परीक्षण (Imaging test)

फैटी लीवर की बीमारी का निदान करने तथा असामान्यताओं जैसे- यकृत में अतिरिक्त वसा, सूजन या फाइब्रोसिस आदि, की जांच करने के लिए डॉक्टर द्वारा निम्न इमेजिंग परीक्षण की सलाह दी जा सकती है, जैसे:

लिवर बायोप्सी (liver biopsy)

डॉक्टर को गंभीर लिवर की बीमारी का संदेह होने पर, मरीज को लिवर बायोप्सी कराने की सलाह दे सकता है। इस प्रक्रिया में लिवर का छोटा सा ऊतक नमूना प्राप्त करने के लिए एक सुई का उपयोग किया जाता है और माइक्रोस्कोप की मदद से नमूने की जाँच की जाती है।

इलास्टोग्राफी (Elastography)

इलास्टोग्राफी एक ऐसी तकनीक है, जिसमें लिवर के स्टीटोसिस (steatosis) और फाइब्रोसिस (fibrosis) का अनुमान लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड, चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) या फाइब्रोस्कैन (Fibroscan) द्वारा प्रेषित तरंगों का उपयोग किया जाता है।

(और पढ़े – लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है, कब और क्यों किया जाता है परिणाम और कीमत…)

फैटी लिवर का उपचार – Fatty Liver Treatment in hindi

फैटी लिवर का उपचार - Fatty Liver Treatment in hindi

नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFL) के इलाज के लिए डॉक्टर वजन घटाने से सम्बंधित उपचार प्रक्रिया अपना सकता है। चूँकि वजन में कमी लिवर में फैट और सूजन को कम कर, फाइब्रोसिस को ठीक करने में मदद कर सकती है। यदि एक निश्चित दवा फैटी लिवर का कारण बनती है, तो डॉक्टर द्वारा उस दवा के सेवन पर रोक लगाने की सिफारिश की जा सकती है या उस दवा को किसी अन्य दवा से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।

यद्यपि ऐसी कोई दवा नहीं है जो नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFL) का इलाज करने के लिए उपयुक्त हो। अध्ययनों के अनुसार कुछ मधुमेह की दवाएं या विटामिन ई, फैटी लिवर को कम करने में मदद कर सकती हैं।

अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (AFLD) के इलाज के लिए, शराब को प्रतिबंधित करने की आवश्यकता होती है। अतः शराब से सम्बंधित फैटी लिवर की स्थिति में डॉक्टर, मरीज की शराब छुड़ाने में मदद कर सकता है।

इसके अतिरिक्त यदि फैटी लिवर की स्थिति सिरोसिस का कारण बनती है, तो डॉक्टर इससे सम्बंधित स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए दवाओं, ऑपरेशनों और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की सिफारिश कर सकता है। इसके अतिरिक्त गंभीर स्थिति में यकृत प्रत्यारोपण (liver transplantation) की भी सिफारिश की जा सकती है।

(और पढ़े – शराब पीना कैंसर का कारण बन सकता है…)

फैटी लिवर सप्लीमेंट्स – Supplements for Fatty Liver in hindi

फैटी लिवर सप्लीमेंट्स – Supplements for Fatty Liver in hindi

कई अध्ययन बताते हैं कि कुछ विटामिन, जड़ी-बूटियाँ और अन्य सप्लीमेंट लिवर फैट को कम करने और लिवर की बीमारी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। अतः डॉक्टर द्वारा फैटी लिवर की स्थिति में निम्न सप्लीमेंट की सिफारिश की जा सकती है:

  • मिल्क थिस्टल (Milk Thistle) या सिलीमरिन (silymarin)
  • बर्बेरिन (Berberine)
  • ओमेगा -3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids)
  • विटामिन ई, इत्यादि।

(और पढ़े – ओमेगा 3 फैटी एसिड के फायदे और स्वास्थ्य लाभ…)

फैटी लिवर की रोकथाम और बचाव – Fatty Liver Prevention in hindi

फैटी लिवर की रोकथाम और बचाव - Fatty Liver Prevention in hindi

फैटी लिवर के लिए कोई चिकित्सा या सर्जिकल उपचार नहीं हैं, लेकिन कुछ उपाय फैटी लिवर और इससे होने वाले नुकसान को रोकने में व्यक्ति की मदद कर सकते हैं। अतः कोई भी व्यक्ति फैटी लिवर से बचाव के लिए निम्न उपाय अपना सकता है, जैसे:

  • सुरक्षित रूप से वजन में कमी करें।
  • आहार तथा दवा दोनों के माध्यम से ट्राइग्लिसराइड्स का सेवन कम मात्रा में करें।
  • शराब का सेवन न करें।
  • यदि मरीज मधुमेह से पीड़ित है, तो इसे नियंत्रित करने के लिए उचित प्रयास करें।
  • संतुलित और स्वस्थ आहार (पौधे-आधारित आहार) का सेवन करें ।
  • शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा दें तथा नियमित व्यायाम करें।
  • यदि कोई व्यक्ति अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो कम कैलोरी युक्त आहार का सेवन करें।
  • लिवर वायरस हेपेटाइटिस ए (hepatitis A) और हेपेटाइटिस बी से बचाने के लिए टीका लगवाएं।
  • लिवर की देखभाल के लिए डॉक्टर से नियमित जांच करवाएं।

(और पढ़े – संतुलित आहार के लिए जरूरी तत्व , जिसे अपनाकर आप रोंगों से बच पाएंगे…)

फैटी लिवर के लिए एक्सरसाइज – Fatty Liver Exercise in hindi

फैटी लिवर के लिए एक्सरसाइज – Fatty Liver Exercise in hindi

लिवर में फैट (वसा) की मात्रा को कम करने के लिए, शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करना एक प्रभावी तरीका हो सकता है। अध्ययनों से पता चला है, कि सप्ताह में कई बार धीरज व्यायाम (endurance exercise) या प्रतिरोध प्रशिक्षण (resistance training) को करने पर यकृत कोशिकाओं में संग्रहीत वसा की मात्रा को काफी कम किया जा सकता है।

एक अन्य अध्ययन में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के साथ-साथ मोटापे से ग्रस्त वयस्कों द्वारा 30-60 मिनट तक व्यायाम करने पर यकृत वसा में 10% की कमी का अनुभव किया गया है।

हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग’ (High-intensity interval training) को लिवर की वसा को कम करने के लिए फायदेमंद माना गया है। इसके साथ ही यह एक्सरसाइज टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए फैटी लिवर में 39% की कमी कर सकती है।

(और पढ़े – स्वस्थ लिवर के लिए योग…)

फैटी लिवर का घरेलू इलाज – Fatty Liver Home Remedies in hindi

फैटी लिवर का घरेलू इलाज - Fatty Liver Home Remedies in hindi

फैटी लिवर रोग से छुटकारा पाने के लिए घरेलू उपचार के तहत् व्यक्ति एक उपयुक्त आहार का सेवन कर सकता है। फैटी लिवर रोग के लिए आहार (fatty liver disease diet) का मुख्य उद्देश्य वजन कम करना और कार्ब्स में कटौती करना शामिल है। अतः कुछ खाद्य पदार्थ फैटी लिवर रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए लिवर में वसा की मात्रा को कम करने में मदद कर सकता है, इनमें शामिल हैं:

मोनोअनसैचुरेटेड वसा (Monounsaturated fats) – अनुसंधान से पता चलता है, कि मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- जैतून के तेल, एवोकैडो और नट्स आदि आहार का सेवन करने से फैटी लिवर की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।

व्हे प्रोटीन (Whey protein) व्हे प्रोटीन का सेवन मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में 20% तक फैटी लिवर की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही यह लिवर एंजाइम (liver enzyme) के स्तर को भी कम करने में मदद कर सकता है और अन्य लाभ प्रदान कर सकता है।

ग्रीन टी (Green tea) – एक अध्ययन में पाया गया है, कि हरी चाय में कैटेचिन (catechins) नामक एंटीऑक्सिडेंट, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से सम्बंधित व्यक्तियों में लिवर में सूजन और वसा की मात्रा को कम करने में मदद करते हैं।

घुलनशील फाइबर (Soluble fiber) – कुछ शोध के माध्यम से पता लगाया गया है, कि रोजाना 10 से 14 ग्राम घुलनशील फाइबर (Soluble fiber) का सेवन लिवर में फैट और लिवर एंजाइम के स्तर को कम करने तथा इंसुलिन संवेदनशीलता (insulin sensitivity) को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

(और पढ़े – लीवर को मजबूत करने के लिए क्या खाना चाहिए…)

फैटी लिवर डाइट – Fatty Liver diet in hindi

फैटी लिवर डाइट - Fatty Liver diet in hindi

फैटी लिवर की स्थिति में कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन, इसके जोखिमों को कम करने और लिवर में वसा की मात्रा में कमी लाने के लिए आवश्यक होते हैं। अतः फैटी लिवर की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को निम्न पदार्थों के सेवन सलाह दी जा सकती है, जैसे:

(और पढ़े – लीवर को साफ करने के लिए खाएं ये चीजें…)

फैटी लिवर में क्या नहीं खाना चाहिए – fatty liver foods to avoid in hindi

फैटी लिवर में क्या नहीं खाना चाहिए - fatty liver foods to avoid in hindi

फैटी लिवर की बीमारी की स्थिति में कुछ खाद्य पदार्थ अनेक प्रकार के जोखिमों को बढ़ने में मदद कर सकते हैं। अतः इस स्थिति में ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह खाद्य पदार्थ आम तौर पर वजन बढ़ाने और रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि का कारण बन सकते हैं। फैटी लिवर की स्थिति में निम्न खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी जाती हैं, जैसे कि:

  • शराब
  • शर्करा युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- कैंडी, कुकीज़, सोडा और फलों
  • तले हुए खाद्य पदार्थ
  • नमक
  • सफेद ब्रेड (White bread), चावल और पास्ता
  • लाल मांस, इत्यादि।

(और पढ़े – लीवर सिरोसिस में क्या खाना चाहिए और परहेज…)

इसी तरह की अन्य जानकरी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

Leave a Comment

Subscribe for daily wellness inspiration