शुगर ,मधुमेह लक्षण, कारण, निदान और बचाव के उपाय – Sugar, Diabetes Causes, Symptoms, Treatment in Hindi

शुगर ,मधुमेह लक्षण, कारण, निदान और बचाव के उपाय - Sugar, Diabetes Causes, Symptoms, Treatment in Hindi
Written by Deepak

Diabetes in hindi जानिए मधुमेह के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव के बारे में (diabetes causes, symptoms, treatment and prevention in hindi) डायबिटीज एक ऐसी समस्या है जिसमें व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। इंसुलिन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह ब्लड से शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज को पहुंचाता है। इसके अलावा यह मेटाबोलिज्म पर भी कई अन्य प्रभाव डालता है।

व्यक्ति जो भोजन करता है वह शरीर को ग्लूकोज प्रदान करता है जिसे कोशिकाएं शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में उपयोग करती हैं। यदि शरीर में इंसुलिन मौजूद नहीं होता है तो वे अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाती हैं और  ब्लड से कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं पहुंचा पाती हैं। जिसके कारण ग्लूकोज ब्लड में ही इकट्ठा हो जाता है और ब्लड में अत्यधिक ग्लूकोज विषाक्त हो सकता है। आमतौर पर मधुमेह तीन प्रकार का होती है, टाइप-1 डायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज एवं जेस्टेशनल डायबिटीज।

1. मधुमेह के कारण – Madhumeh ke karan in Hindi, Causes of Diabetes in Hindi
2. मधुमेह के लक्षण – Diabetes ke lakshan in Hindi, Symptoms of Diabetes in Hindi
3. डायबिटीज का निदान – Diagnosis of diabetes in Hindi
4. शुगर का इलाज -Diabetes ka ilaj in Hindi, Treatment of diabetes in Hindi
5. डायबिटीज से बचाव – Diabetes Prevention in Hindi

मधुमेह के कारण – Madhumeh ke karan in Hindi, Causes of Diabetes in Hindi

जब शरीर सही तरीके से रक्त शर्करा (glucose) का उपयोग करने में सक्षम नहीं हो पाता है तो व्यक्ति को मधुमेह की समस्या हो जाती है। डायबिटीज के मुख्य कारण (Madhumeh ke karan in Hindi) निम्न हैं।

टाइप-1डायबिटीज के कारण – Causes of type 1 diabetes in Hindi

टाइप-1 डायबिटीज के सटीक कारण ज्ञात नहीं है। आमतौर पर मनुष्य के शरीर का इम्यून सिस्टम, जोकि सामान्यतः हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है, अग्न्याशय(pancreas) में इंसुलिन उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर देता है, जिसके कारण व्यक्ति के शरीर में इंसुलिन का स्तर घट जाता है और समाप्त हो जाता है। इसके बाद शुगर कोशिकाओं में पहुंचने के बजाय ब्लड स्ट्रीम में बनने लगता है।

टाइप-2 डायबिटीज के कारण – Causes of type 2 diabetes in Hindi

प्रीडायबिटीज ही टाइप-2 डायबिटीज का कारण होता है।  टाइप-2 डायबिटीज में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन की क्रिया की प्रतिरोधी(resistant) बन जाती हैं, और अग्न्याशय इस प्रतिरोध को दूर करने के लिए पर्याप्त इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता है। इसके बाद कोशिकाओं  में शुगर जाने के बजाय यह ब्लड स्ट्रीम में बनने लगता है। वजन का अत्यधिक बढ़ना टाइप-2 डायबिटीज का कारण होता है। (और पढ़े – वजन कम कर मधुमेह को ठीक किया जा सकता है अध्ययन से हुआ खुलासा)

जेस्टेशनल डायबिटीज के कारण – Causes of gestational diabetes in Hindi

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भनाल(placenta) गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए हार्मोन का उत्पादन करता है। ये हार्मोन कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बना देते हैं। आमतौर पर अग्न्याशय इस प्रतिरोध को दूर करने के लिए पर्याप्त और अतिरिक्त इंसुलिन का उत्पादन करता है लेकिन कभी-कभी यह पर्याप्त इंसुलिन उत्पन्न नहीं कर पाता है जिसके कारण कोशिकाओं में बहुत कम ग्लूकोज पहुंचता है और ब्लड में यह अत्यधिक मात्रा में जमा हो जाता है जिसके कारण जेस्टेशनल मधुमेह हो जाता है।

मधुमेह के लक्षण – Diabetes ke lakshan in Hindi, Symptoms of Diabetes in Hindi

व्यक्ति के शरीर में बढ़े हुए ब्लड शुगर के अनुसार उसमें मधुमेह के लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादातर लोगों में प्री डायबिटीज(prediabetes) या टाइप-2 डायबिटीज होने पर शुरूआत में किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन टाइप-1 डायबिटीज होने पर इसके लक्षण बहुत तेजी से उत्पन्न होते हैं और अधिक गंभीर होते हैं। टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मिले-जुले लक्षण इस प्रकार हैं। (Diabetes ke lakshan in Hindi)

  • प्यास अधिक लगना
  • लगातार पेशाब आना
  • अत्यधिक भूख लगना
  • बिना वजह शरीर का वजन घटना
  • पेशाब में किटोन (ketones) की उपस्थिति
  • थकान
  • चिड़चिड़ापन
  • अचानक वजन बढ़ना
  • आंखों से धुंधला दिखायी देना
  • घाव धीरे-धीरे भरना
  • लगातार त्वचा, योनि (vaginal infections) और मसूढ़ों में संक्रमण बने रहना

टाइप-1 डायबिटीज व्यक्ति को किसी भी उम्र में हो सकता है। यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था के दौरान दिखायी देता है। टाइप-2 डायबिटीज इस रोग का सबसे सामान्य प्रकार है और 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में डायबिटीज होना सामान्य बात है।

डायबिटीज का निदान – Diagnosis of diabetes in Hindi

शुगर के इलाज से पहले व्यक्ति को डायबिटीज का निदान जरूर करा लेना चाहिए। डायबिटीज के निदान के लिए निम्न टेस्ट किए जाते हैं।

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज (FPG) टेस्ट

यह टेस्ट कराने से पहले व्यक्ति को कुछ खाने के लिए मना किया जाता है अर्थात् खाली पेट रहने के करीब 8 घंटे बाद फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का पता लगाने के लिए किया जाता है।

ओरल ग्लूकोज टॉलिरेंस टेस्ट (OGTT)

यह टेस्ट भी खाली पेट किया जाता है। यह टेस्ट करने से दो घंटे पहले मरीज को ग्लूकोज युक्त पेय पदार्थ पिलाया जाता है।

रैंडम ग्लूकोज टॉलिरेंस टेस्ट

इस टेस्ट में डॉक्टर मरीज के रक्त शर्करा (blood sugar ) की 4 बार जांच करते हैं। यदि आपका ब्लड शुगर लेबल दो बार सामान्य से अधिक पाया जाता है तो आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है।

शुगर का इलाज -Diabetes ka ilaj in Hindi, Treatment of diabetes in Hindi

टाइप-1 डायबिटीज का कोई इलाज नहीं है और व्यक्ति जीवनभर टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित रहता है। लेकिन टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों से बिना किसी दवा के प्रतिदिन एक्सरसाइज, संतुलित भोजन, समय पर नाश्ता और वजन को नियंत्रित करके छुटकारा पाया जा सकता है। विशेष आहार टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा कुछ ओरल एंटीबायोटिक्स दवाएं टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं।

टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के इलाज के लिए नियमित इंसुलिन का इंजेक्शन दिया जाता है और विशेष आहार लेने एवं एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। जबकि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित रोगियों के इलाज के लिए टेबलेट और कभी-कभी इंजेक्शन भी दिया जाता है। इसके बावजूद यदि शुगर नियंत्रित नहीं हो पा रहा है तो मरीज में इसकी गंभीरता बढ़ने की अत्यधिक संभावना होती है।

डायबिटीज से बचाव – Diabetes Prevention in Hindi

  • शुगर एक गंभीर बीमारी है। इससे पीड़ित व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर डायबिटीज से बचाव किया जा सकता है।
  • मीठे खाद्य पदार्थ और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजें खाने से परहेज करें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें, सुबह-शाम टहलें और खूब शारीरिक परीश्रम करें। शरीर को अधिक से अधिक एक्टिव रखें। इससे आप शुगर से बच सकते हैं।
  • अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीएं और मीठे एवं सोडा युक्त पेय पदार्थ का सेवन करने से बचें। संभव हो तो आइसक्रीम भी न खाएं।
  • अगर आपके शरीर का वजन बढ़ गया हो तो उसे शीघ्र नियंत्रित करें अन्यथा शुगर होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • धूम्रपान एवं एल्कोहल का सेवन न करें, अन्यथा शुगर होने की संभावना बढ़ सकती है।
  • अधिक फाइबर एवं प्रोटीन युक्त भोजन शुगर से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है।
  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी है इसलिए विटामिन डी की शरीर में कमी न होने दें।

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