किडनी फेल्योर, कारण, लक्षण, निदान और उपचार - Kidney failure in hindi
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किडनी फेल्योर, कारण, लक्षण, निदान और उपचार – Kidney failure, Symptoms, Causes, Diagnosed and Treatment in hindi

किडनी फ़ैल, कारण, लक्षण, निदान और उपचार - Kidney failure, Symptoms, Causes, Diagnosed and Treatment in hindi

किडनी एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है जो रक्त में पानी, सोडियम, पोटैशियम तथा अन्य पदार्थों का संतुलन बनाये रखता है। तथा विषाक्त पदार्थों को मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर करने का कार्य करता है। शरीर में किडनी का मुख्य कार्य खून का शुद्धीकरण करना है। जब किसी कारणवश किडनी अपना सामान्य कार्य करना बंद कर देती है और किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो इस स्थिति को किडनी फेल्योर कहा जाता है। किडनी फेल्योर को रेनल फेल्योर (renal failure) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक गंभीर समस्या है तथा पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु का कारण भी बन सकती है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को किडनी फेल्योर की सम्पूर्ण जानकारी होना आवश्यक होता है, जिससे इस समस्या से जल्द ही निजाद पाया जा सके।

आज का यह लेख किडनी फेल्योर की समस्या के बारे में है, जहाँ पर आप किडनी फेल्योर क्या है, इसके कारण लक्षण जांच इलाज तथा परहेज के बारे में जानेगें।

किडनी के कार्य – kidney work in Hindi

  • शरीर में रक्त बनाने की सारी प्रक्रियाओं में किडनी की अहम भूमिका होती है। गुर्दे में बनने वाला एरिथ्रोपोइटिन, जिसे हेमोपोइटिन के नाम से भी जाना जाता है, यह एक ग्लाइकोप्रोटीन साइटोकिन नामक पदार्थ है। जो बोनमैरो (अस्थि मज्जा) में खून के उत्पादन को उत्तेजित करता है।
  • हमारी किडनी शरीर में संतुलन बनाए रखने के कई कार्यों का निष्पादन करती हैं। यह अपशिष्ट उत्पादों को फिल्टर करके पेशाब के माध्यम से बहार निकालने का कार्य करती हैं। शरीर में पानी की मात्रा, सोडियम, पोटेशियम और कैल्शियम की मात्रा (इलेक्ट्रोलाइट्स) में संतुलन बनाए रखती है। इसके अलावा किडनी शीर से अतिरिक्त अम्ल एवं क्षार को बाहर कर संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं ।
  • शरीर में किडनी का मुख्य कार्य खून का शुद्धीकरण करना है।
  • किडनी का बहुत बड़ा रोल प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड (शक्कर आदि) तथा फैट (चर्बी) के पाचन में भी है।

किडनी फेल्योर क्या है – What is kidney failure in Hindi

खून को फिल्टर करने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने का कार्य किडनी का होता है। किडनी मूत्राशय में विषाक्त पदार्थों को भेजती हैं, जिसे आपका शरीर पेशाब के दौरान बाहर निकालता है। किडनी फेल्योर (गुर्दे की विफलता) उस स्थिति को कहा जाता है, जब व्यक्ति की दोनों किडनी ठीक से काम नहीं करती हैं। किडनी खराब होने के कारण रक्त से अपशिष्ट पदार्थ सही तरीके से फ़िल्टर नहीं हो पाते हैं। कभी-कभी, किडनी फेल्योर के कारण अस्थायी और बहुत तीव्र होते हैं। दूसरी ओर यह समस्या लंबे समय तक पुरानी स्थिति के परिणामस्वरुप उत्पन्न हो सकती है, जो धीरे-धीरे किडनी के खराब होने का कारण बनती है।

गुर्दे की विफलता काफी गंभीर स्थिति है। लेकिन डायलिसिस और किडनी प्रत्यारोपण जैसे उपचार के कारण किडनी फेल्योर वाले कई लोग अपना पूरा जीवन आसानी से जी लेते हैं।

किडनी फेल्योर के प्रकार – Types of kidney failure in Hindi

किडनी फेल होने के पांच अलग-अलग प्रकार हैं:

एक्यूट प्रीरेनल किडनी फेल्योर – Acute prerenal kidney failure in Hindi

इस प्रकार के किडनी फेल्योर में, किडनी अधिक तेजी से कार्य करना बंद कर देता है। किडनी में अपर्याप्त रक्त प्रवाह होने की स्थिति एक्यूट प्रीरेनल किडनी फेल्योर का कारण बन सकती है। पर्याप्त रक्त प्रवाह न होने की स्थिति में किडनी रक्त से विषाक्त पदार्थों को फ़िल्टर नहीं कर पाती हैं। डॉक्टर द्वारा रक्त के प्रवाह में कमी के कारण का निदान कर, इस प्रकार की किडनी विफलता को आमतौर पर ठीक किया जा सकता है।

एक्यूट इंट्रिन्सिक किडनी फेल्योर – Acute intrinsic kidney failure in Hindi

किडनी को सीधे आघात पहुंचने या चोट लगने के कारण तीव्र एक्यूट इंट्रिन्सिक किडनी फेल्योर की समस्या उत्पन्न हो सकती है। किडनी को सीधे आघात पहुंचने के कारणों में शारीरिक मुठभेड़ या दुर्घटना के अलावा टॉक्सिन ओवरलोड और इस्किमिया भी शामिल है।

क्रोनिक प्रीरेनल किडनी फेल्योर – Chronic prerenal kidney failure in Hindi

जब अधिक लंबे समय तक किडनी में पर्याप्त रक्त नहीं पहुंचता है, तो किडनी धीरे धीरे सिकुड़ने लगती हैं, और काम करने की क्षमता खो देती है। इस स्थिति को क्रोनिक प्रीरेनल किडनी फेल्योर कहा जाता है।

क्रोनिक इंट्रिन्सिक किडनी फेल्योर Chronic intrinsic kidney failure in Hindi

व्यक्तियों में क्रोनिक इंट्रिन्सिक किडनी फेल्योर तब होता है, जब आंतरिक किडनी रोग के कारण गुर्दे (किडनी) को लंबे समय तक नुकसान पहुँचता है। आंतरिक किडनी रोग मुख्य रूप से आघात, गंभीर रक्तस्राव या ऑक्सीजन की कमी के कारण उत्पन्न होता है।

क्रोनिक पोस्ट-रीनल किडनी फेल्योर – Chronic post-renal kidney failure in Hindi

लंबे समय तक यूरिनरी ट्रैक्ट में ब्लॉकेज की स्थिति पेशाब को रोकने का कारण बनती है। जिससे  किडनी पर दबाव पड़ता है और अंततः किडनी फेल्योर की समस्या उत्पन्न होती है।

किडनी खराब होने के लक्षण – Symptoms of kidney failure in Hindi

आमतौर पर किडनी फेल्योर वाले किसी व्यक्ति में कुछ विशिष्ट लक्षण प्रगट होते है। लेकिन कभी-कभी कोई लक्षण मौजूद नहीं होते। किडनी फेल्योर के संभावित लक्षणों में निम्न शामिल हैं:

  • पेशाब कम लगना या मूत्र की मात्रा में कमी
  • पैरों और एड़ियों में सूजन आना
  • सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना
  • नींद न आना या थकान महसूस होना
  • सीने में दर्द
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • भ्रम पैदा होना
  • दौरे पड़ना (seizures)
  • कोमा (coma) में चले जाना

जब किसी व्यक्ति की किडनी अचानक काम करना बंद कर देती हैं तो इसे एक्यूट किडनी फेल्योर (acute kidney failure) कहा जाता है। इस स्थिति में निम्न लक्षण प्रगट हो सकते हैं:

उपरोक्त में से किसी एक या अधिक लक्षणों का प्रगट होना गुर्दे की गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति हो इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देता है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

किडनी फेल्योर के कारण – Kidney Failure Causes in Hindi

अनेक स्थितियों या कारणों के परिणामस्वरुप किडनी फेल्योर हो सकता है। यही कारण आमतौर पर किडनी फेल्योर के प्रकार को भी निर्धारित करते हैं। किडनी विफलता के कारणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

किडनी में रक्त के प्रवाह में कमी (Loss of blood flow to the kidneys)

किसी भी व्यक्ति की किडनी में रक्त के प्रवाह में अचानक कमी आना, किडनी फेल्योर का संकेत हो सकता है। किडनी में रक्त के प्रवाह में कमी का कारण बनने वाली कुछ स्थितियों में निम्न शामिल हैं:

मूत्र त्याग की समस्या (Urine elimination problems)

जब शरीर पेशाब (urine) को बाहर नहीं निकाल पाता है, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं और किडनी ओवरलोड हो जाती है। यह स्थिति किडनी फेल्योर का कारण बनती है। मूत्र मार्ग को अवरुद्ध करने वाले कारणों में निम्न शामिल हो सकते हैं, जैसे:

अन्य कारण (other causes)

कुछ अन्य स्थितियां भी व्यक्तियों में किडनी फेल का कारण बन सकती हैं जिनमें शामिल हैं:

  • किडनी के आसपास खून का थक्का जमना
  • संक्रमण (infection)
  • भारी धातुओं (heavy metals) की अधिकता और विषाक्तता
  • नशीली दवाओं और शराब का सेवन
  • वैस्कुलाइटिस या वाहिकाशोथ (vasculitis), (यह एक प्रकार की रक्त वाहिकाओं की सूजन है)
  • ल्यूपस (lupus)
  • हीमोलिटिक यूरीमिक सिंड्रोम (hemolytic uremic syndrome), यह आमतौर पर आंतों में जीवाणु संक्रमण के बाद लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने की स्थिति है।
  • मल्टीपल मायलोमा (multiple myeloma), यह अस्थि मज्जा में प्लाज्मा कोशिकाओं का कैंसर है।
  • स्क्लेरोडर्मा (scleroderma), यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जो त्वचा को प्रभावित करती है।
  • कीमोथेरेपी दवाएं
  • कुछ एंटीबायोटिक्स
  • अनियंत्रित मधुमेह
  • नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम,इत्यादि।

(और पढ़ें: किडनी को बहुत नुकसान पहुंचाती है आपकी ये 12 गलत आदते)

किडनी फेल्योर टेस्ट – Kidney failure tests in Hindi

डॉक्टर किडनी फेल होने की समस्या का निदान करने के लिए अनेक परीक्षणों को उपयोग में ला सकते हैं, जैसे:

  • मूत्र परीक्षण (Urinalysis) – डॉक्टर लक्षणों का निदान करने के लिए मरीज के यूरिन का विश्लेषण कर सकता है तथा यूरिन टेस्ट की सिफारिश कर सकता है। जिसके अंतर्गत मूत्र में प्रोटीन या शर्करा की जाँच की जा सकती है। इसके अलावा डॉक्टर यूरिनरी सेडीमेंट एग्जामिनेशन (urinary sediment examination) की भी सिफारिश कर सकता है। यह परीक्षण मूत्र के नमूने में लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा को मापता है तथा बैक्टीरियल इन्फेक्शन का पता लगाने में सहायक होता है।
  • ब्लड टेस्ट (blood test) – डॉक्टर किडनी की फ़िल्टर क्षमता का पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण का आदेश दे सकता है, रक्त परीक्षण के तहत रक्त यूरिया नाइट्रोजन (BUN) टेस्ट और क्रिएटिनिन (सीआर) टेस्ट शामिल हैं। BUN और क्रिएटिनिन के स्तरों में तेजी से वृद्धि एक्यूट किडनी फेल्योर का संकेत हो सकता है।
  • इमेजिंग परीक्षण (Imaging test) – अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसे परीक्षण किडनी और मूत्र मार्ग की छवि प्रदान करते हैं। इन परीक्षणों की मदद से डॉक्टर किडनी ब्लॉकेज या असामान्यताओं का पता लगा सकता है।
  • किडनी बायोप्सी (Kidney biopsy) – किडनी में असामान्य जमाव या संक्रामक की स्थिति का पता लगाने के लिए डॉक्टर किडनी बायोप्सी का उपयोग कर सकता है। इसके तहत किडनी ऊतक के नमूनों की जांच की जाती है।

(और पढ़ें: किडनी फंक्शन टेस्ट क्या है, कीमत और कैसे होता है)

किडनी फेल्योर का इलाज – Kidney failure treatment in Hindi

किसी भी प्रकार की किडनी की विफलता का इलाज संभव है। बीमारी की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर किडनी फेल्योर का उपचार कर सकता है। उपचार प्रक्रियाओं में निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

  • डायलिसिस (Dialysis) – डायलिसिस की प्रक्रिया में एक मशीन का उपयोग करके रक्त को फिल्टर और शुद्ध किया जाता है। डायलिसिस के प्रकार के आधार पर, एक बड़ी मशीन या पोर्टेबल कैथेटर बैग उपयोग में लायी जा सकती है। डायलिसिस प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कम पोटेशियम और कम नमक वाले आहार का सेवन करने की आवश्यकता होती है।
  • किडनी प्रत्यारोपण (Kidney transplant) – किडनी खराब होने की स्थिति में किसी अन्य व्यक्ति की किडनी को प्रत्यारोपित करने की आवश्यकता पड़ती है। यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है।  प्रत्यारोपित किडनी उपचार को सफल बनाने के लिए मरीज को सर्जरी के बाद इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं (immunosuppressive drugs) लेनी होती हैं। हालांकि ये दवाओं कुछ व्यक्तियों में साइड इफ़ेक्ट का कारण बन सकती हैं।  
  •  अन्य दिशानिर्देश – सोडियम और पोटेशियम आहार को सीमित करें। तथा प्रति दिन 2,000 मिलीग्राम से कम सोडियम और पोटेशियम लेने का लक्ष्य रखें। फास्फोरस की सीमित मात्रा पर ध्यान दें और प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम से नीचे रहने की कोशिश करें। प्रोटीन का कम से कम सेवन करें।

(और पढ़ें: किडनी को स्वस्थ रखने के लिए योग)

किडनी फेल्योर की रोकथाम – Kidney failure prevention in Hindi

गुर्दे (किडनी) की विफलता के जोखिम को कम करने के लिए निम्न उपाय अपनाए जाने चाहिए, जैसे:

  • ओवर-द-काउंटर दवाएं लेते समय शतर्क रहें। इन दवाओं की बहुत अधिक मात्रा में लेना शरीर में विषाक्तता उत्पन्न कर सकती है।
  • एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें।
  • किडनी की विफलता के सामान्य कारणों जैसे- उच्च रक्तचाप और मधुमेह का जल्द से जल्द इलाज कराएं ।
  • धूम्रपान करने से बचें।

किडनी फेल्योर डाइट diet for kidney failure in Hindi

गुर्दे की विफलता वाले लोगों के लिए कोई विशिष्ट आहार नहीं है। चूँकि किडनी कार्यों में गड़बड़ी से पीड़ित व्यक्ति की किडनी रक्त से अतिरिक्त पानी, साल्ट या पोटेशियम को आसानी से फ़िल्टर नहीं कर पाती हैं। अतः पीड़ित व्यक्तियों को पोटेशियम, साल्ट युक्त उच्च खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। परहेज किये जाने वाले उच्च पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों में निम्न शामिल हैं:

किडनी फेल्योर की स्थिति में फास्फोरस की मात्रा शरीर में बढ़ सकती है। फास्फोरस की अधिक मात्रा हड्डियों से कैल्शियम का ह्रास कर सकती है तथा ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का कारण बन सकती है। किडनी विफलता की स्थिति में उच्च फॉस्फोरस युक्त खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से परहेज करना जरुरी होता है, जिनमें शामिल हैं:

क्या एक किडनी खराब होने से किडनी फेल्योर हो सकता है,,,, नहीं, यदि किसी व्यक्ति की दोनों स्वस्थ किडनी में से एक किडनी खराब हो गई हो या उसे शरीर से किसी कारणवश निकाल दिया गया हो, तो भी दूसरी किडनी अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाते हुए शरीर का कार्य पूर्ण रूप से कर सकती है।

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