कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव – Colorectal cancer (colon cancer) in hindi

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव - Colorectal cancer (colon cancer) in hindi
Written by Anamika

Colorectal cancer in hindi कोलन कैंसर और रेक्टल कैंसर दोनों एक साथ होता है इसलिए इसे कोलोरेक्टल कैंसर (colorectal cancer) कहते हैं। कोलन कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो बड़ी आंत (colon) में होता है। बड़ी आंत हमारे पाचन तंत्र का अंतिम भाग है। ज्यादातर बड़ी आंत का कैंसर कोशिकाओं के छोटे-छोटे गुच्छे से उत्पन्न होता है जिसे एडीनोमैटस पॉलिप्स (adenomatous polyps) के नाम से जाना जाता है। समय के साथ ये पॉलिप्स बढ़कर कोलन कैंसर (colon cancer) के रूप में विकसित हो जाते हैं।

पॉलिप्स छोटे होते हैं और कम संख्या में उत्पन्न होते हैं। कोलन कैंसर के लक्षण दिखने के बाद डॉक्टर इससे बचाव के लिए नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट कराने की सलाह देते हैं और टेस्ट में कोलन कैंसर का पता लगने पर पॉलिप्स को कैंसर का रूप लेने से पहले की निकाल देते हैं।

1. कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होने के कारण – colorectal cancer (colon cancer) causes in hindi
2. कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) के लक्षण – Colorectal cancer (colon cancer) Symptoms in hindi
3. कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) का इलाज – Colorectal cancer (colon cancer)Treatment in hindi
4. कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) से बचाव  Colorectal cancer (colon cancer) Prevention in hindi

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होने के कारण – colorectal cancer (colon cancer) causes in hindi

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होने के कारण - colorectal cancer (colon cancer) causes in hindi

ज्यादातर मामलों में यह स्पष्ट नहीं हो पाता है कि कोलन कैंसर (colorectal cancer) होने का कारण क्या है। डॉक्टर बताते हैं कि कोलन कैंसर तब होता है जब कोलन में स्वस्थ कोशिकाएं उनके आनुवांशिक डीएनए (DNA) में गड़बड़ी पैदा करने लगती हैं। शरीर की क्रियाओं को सामान्य बनाए रखने के लिए स्वस्थ कोशिकाएं व्यवस्थित ढंग से विकसित एवं विभाजित होती हैं। लेकिन जब कोशिका का डीएनए टूट जाता है तो यह कैंसर का रूप ले लेता है और नई कोशिका की आवश्यकता न होने पर भी ये कोशिकाएं लगातार विभाजित होने लगती हैं। जैसे-जैसे कोशिकाएं जमा होती जाती हैं, वे ट्यूमर बनाती जाती हैं।

समय के साथ कैंसर कोशिकाएं बढ़ती जाती हैं और अपने आसपास की सामान्य कोशिकाओं को नष्ट करने लगती हैं। कैंसर की कोशिकाएं (cancer cells) शरीर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में घूमती रहती हैं और जमा होती रहती हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) के लक्षण – Colorectal cancer (colon cancer) Symptoms in hindi

कोलन कैंसर बड़ी आंत (large intestine)को प्रभावित करता है और आमतौर पर यह छोटे-छोटे पॉलिप्स (polyps)से विकसित होता है। कोलन कैंसर के शुरूआती चरण में प्रायः इसके लक्षण दिखायी नहीं देते हैं। लेकिन जब कैंसर बढ़ जाता है तब इसके लक्षण दिखायी देने लगते हैं।

कोलन कैंसर के मुख्य लक्षण निम्न हैं

  • डारयरिया और कब्ज
  • मल की स्थिति में परिवर्तन
  • पतला और सिकुड़ा हुआ मल
  • पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन और गैस (और पढ़े – गैस दूर करने के घरेलू उपाय)
  • मल त्यागने में दर्द या आंत के अंदर दर्द
  • मल त्यागने के लिए अधिक जोर लगाना
  • कमजोरी एवं थकान
  • बिना वजह वजन घटना
  • आयरन की कमी और एनीमिया होना

अगर कोलन कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैल जाते हैं तो उस नए स्थान पर भी कोलन कैंसर के लक्षण दिखायी देना शुरू हो जाते हैं। विशेषरूप से लिवर पर कोलन कैंसर का असर ज्यादा पड़ता है।

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) का इलाज – Colorectal cancer (colon cancer) Treatment in hindi

कोलन कैंसर का इलाज मरीज में कैंसर के स्टेज, प्रकार उसके स्वास्थ्य एवं उम्र पर निर्भर करता है। किसी भी कैंसर का सिर्फ एकमात्र ही इलाज नहीं है लेकिन ज्यादातर कोलन कैंसर के इलाज में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का सहारा लिया जाता है।

रेक्टल कैंसर मलाशय में होता है जोकि बड़ी आंत के सबसे नीचे और गुदा के पास होता है। कैंसर से होने वाली मौतों में यह तीसरा सबसे बड़ा कारण है। समय पर कोलन कैंसर का निदान हो जाने पर स्क्रीनिंग और इलाज के जरिए मरीज के जीवन को बचाया जा सकता है।

सर्जरी

सर्जरी में कोलन के ज्यादातर हिस्सों को निकाल दिया जाता है जिसे कोलेक्टोमी (colectomy) कहा जाता है। सर्जन कैंसर से ग्रसित कोलन के आसपास के क्षेत्रों को भी हटा देते हैं। कोलोरेक्टर कैंसर की सर्जरी का अर्थ यह है कि मरीज को कोलोस्टोमी की जरूरत होती है। यह एक बैग होता है जो स्टोमा से कचरे को एकत्र करता है।

कीमोथेरेपी

कीमोथेरेपी में कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया को रोकने और प्रोटीन एवं डीएनए को टूटने से बचाने के लिए और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए  रसायन का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी तेजी से विभाजित हो रही कोशिकाओं के साथ ही स्वस्थ कोशिकाओं को भी लक्षित करता है। स्वस्थ कोशिकाएं आमतौर पर केमिकल के प्रभाव से क्षतिग्रस्त होने से बच जाती हैं लेकिन कैंसर कोशिकाएं नहीं बच पाती हैं। कीमोथेरेपी में दवा शरीर के संपूर्ण हिस्से में प्रवेश कर जाती है इसलिए कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। कीमोथेरेपी के दौरान मरीज के बाल झड़ सकते हैं, उसे थकान या उल्टी महसूस हो सकती है।

रेडिएशन

रेडिएशन के माध्यम से कोलन कैंसर के इलाज में उच्च ऊर्जा वाली गामा-किरणों (gamma-rays) का प्रयोग किया जाता है। रेडियोएक्टिव गामा-किरणें रेडियम, या उच्च ऊर्जा वाली एक्स-रे जैसे मेटल से उत्सर्जित होती हैं। रेडियोथेरेपी ट्यूमर को सिकोड़ने और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए इलाज के रूप में उपयोग किया जाता है। रेडिएशन ट्रीटमेंट कोलन कैंसर के बहुत बाद के स्टेज में उपयोग में लाया जाता है।  रेडिएशन ट्रीटमेंट में मरीज को थकान, डायरिया, उल्टी के साथ उसकी त्वचा झुलस सकती है।

कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) से बचाव – Colorectal cancer (colon cancer) Prevention in hindi

कोलन कैंसर से बचने के लिए 50 वर्ष की उम्र के बाद स्क्रीनिंग करवाना शुरू कर देना चाहिए। लेकिन जिन लोगों परिवार में किसी व्यक्ति को कोलन कैंसर रहा हो, उसे पहले से ही अपनी स्क्रीनिंग करवा लेनी चाहिए।

  • कोलन कैंसर से बचने के लिए अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखें।
  • नियमित एक्सरसाइज करने की आदत डालें।
  • ज्यादा से ज्यादा फल, सब्जियां और होल ग्रेन का सेवन करें।
  • संतृप्त वसा और रेड मीट का सेवन कम से कम करें।
  • कोलन कैंसर से बचने के लिए एल्कोहल और धूम्रपान भी न करें।

Leave a Comment

Subscribe for daily wellness inspiration