जानें सर्वाइकल कैंसर कैसे होता है – Cervical Cancer in Hindi

जानें सर्वाइकल कैंसर कैसे होता है - Cervical Cancer symptoms causes treatment and Prevention in Hindi
Written by Anamika

Cervical Cancer in Hindi गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर या सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो सर्विक्स को प्रभावित करता है। सर्विक्स महिलाओं के शरीर में उनके गर्भाशय और योनि के बीच का एक क्षेत्र होता है। जब सर्विक्स की कोशिकाएं बिल्कुल असामान्य हो जाती है और आसपास की कोशिकाओं को भी असामान्य बनाने लगती हैं तो सर्वाइकल कैंसर विकसित होने लगता है। अगर समय पर सर्वाइकल कैंसर का पता नहीं चल पाता है तो इस बीमारी से महिलाओं की जान भी चली जाती है। इस आर्टिकल में हम आपको सर्वाइकल कैंसर के लक्षण (cervical cancer symptoms in hindi), सर्वाइकल कैंसर के कारण (causes of cervical cancer in hindi), सर्वाइकल कैंसर का पता कैसे लगाएं, सर्वाइकल कैंसर का इलाज (cervical cancer treatment in hindi ) और सर्वाइकल कैंसर से बचाव (cervical cancer Prevention in hindi) के बारे में बताएंगे।

एक विशेष प्रकार के वायरस से सर्वाइकल कैंसर फैलता है और इस वायरस का नाम ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है। यह वायरस विशेषरूप से सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। डॉक्टर इन वायरस से प्रभावित कोशिकाओं की जांच करके सर्वाइकल कैंसर का पता लगाते हैं। सर्वाइकल कैंसर एक ऐसा कैंसर है जिसका वायरस तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे में भी फैलता है। सर्वाइकल कैंसर से प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में महिलाएं प्रभावित होती हैं और इनमें के कई महिलाओं की इस बीमारी से मौत भी हो जाती है।

1. Symptoms of cervical cancer in Hindi – सर्वाइकल कैंसर होने के लक्षण
2. Causes of cervical cancer in Hindi – सर्वाइकल कैंसर होने के कारण
3. How is cervical cancer diagnosed in Hindi- सर्वाइकल कैंसर की जाँच
4. Treatment for cervical cancer in Hindi – सर्वाइकल कैंसर का इलाज
5. Cervical Cancer Prevention in Hindi – सर्वाइकल कैंसर से बचाव

सर्वाइकल कैंसर क्या होता है – What is cervical cancer in Hindi

गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर या सर्वाइकल कैंसर तब होता है जब गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ती हैं और शरीर के अन्य ऊतकों और अंगों को प्रभावित करती हैं। जब यह आक्रामक होता है, तो यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा के गहरे ऊतकों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है और शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। यह धीरे-धीरे विकसित होता है, इसलिए यह प्रारंभिक पहचान और उपचार के माध्यम से रोकथाम के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करता है। ज्यादातर महिलाओं को उनके गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर होने का पता उनके 20 और 30 साल की उम्र में होता है

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण – Symptoms of cervical cancer in Hindi

गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर या सर्वाइकल कैंसर जब अपने शुरूआती अवस्था में रहता है तो इसके व्यक्ति में इसके लक्षणों का सही तरीके से पता नहीं चल पाता है लेकिन समय बीतने के साथ जब कैंसर बढ़ने लगता है तो सर्वाइकल कैंसर के लक्षण आसानी से दिखने लगते हैं। कभी-कभी महिलायें सर्वाइकल कैंसर के लक्षण को अपने पीरिएड चक्र, यीस्ट इंफेक्शन और यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से जोड़कर देखती हैं। सर्वाइकल कैंसर के लक्षण ये होते हैं-

  • असामान्य रूप से खून आना जैसे कि मेनोपॉज होने के बाद महिला को ब्लीडिंग होना।
  • सेक्स के बाद ब्लीडिंग होना, या मासिक धर्म खत्म होने के बाद उस महीने में फिर से ब्लीडिंग होना शुरू हो जाना।
  • योनि से लगातार बदबूदार गाढ़ा एवं चिपचिपा तरल पदार्थ का निकलना सर्वाइकल कैंसर के लक्षण हो सकता है।
  • यदि आपको बार-बार पेशाब जाना जाना पड़ता है, पेशाब करने में दर्द और जलन महसूस होना।
  • पेडू में दर्द होना सर्वाइकल कैंसर के लक्षण हो सकता है।

जब सर्वाइकल कैंसर पूरे शरीर में फैल जाता है तो मरीज को थकान होने के साथ ही उसका वजन भी कम होने लगता है। इसलिए यदि किसी भी महिला को इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव होता है तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करानी चाहिए। (और पढ़े – योनि से जुड़े रोग और उपचार)

सर्वाइकल कैंसर के कारण – Causes of cervical cancer in Hindi

ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण होता है, इस वायरस को एचपीवी के नाम से भी जानते हैं। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में यह वायरस पहले से ही उपस्थित हो तो उसके साथ शारीरिक संबंध रखने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में भी यह वायरस चला जाता है। इसके अलावा जब दो शरीर एक दूसरे के संपर्क में आते हैं तो भी यह वायरस फैल जाता है। सर्वाइकल कैंसर के कारण में मुख्य एचपीवी वायरस आमतौर पर कई प्रकार के होते हैं लेकिन सभी तरह के एचपीवी वायरस से सर्वाइकल कैंसर नहीं होता है। इनमें से कुछ वायरसों के कारण जननांगों में मस्सा हो जाता है जबकि कुछ वायरस किसी तरह का कोई लक्षण उत्पन्न नहीं करते हैं।

आमतौर पर देखा जाता है कि ज्यादातर वयस्क कभी न कभी एचपीवी वायरस से संक्रमित जरूर होते हैं। यह एक ऐसा इंफेक्शन है जो कभी-कभी बिना किसी कारण के ही हो जाता है लेकिन सर्वाइकल कैंसर के कारण में ज्यादातर जननांगों में मस्सा होने के कारण भी सर्वाइकल कैंसर से इंसान ग्रसित हो जाता है। इसलिए महिलाओं को नियमित तौर पर पैप टेस्ट करवाना चाहिए। कैंसर का रूप धारण करने से पहले सर्वाइकल कोशिकाओं में परिवर्तन होता है, उसी का पता लगाने के लिए पैप टेस्ट किया जाता है। सर्वाइकल कैंसर के कारण को जानकर इसको रोका जा सकता है।

आइए हम सर्वाइकल कैंसर के पीछे के संभावित कारणों को देखें। उनमे शामिल है:

आमतौर पर, इस प्रकार का कैंसर तब शुरू होता है जब स्वस्थ कोशिकाएं समय के साथ आनुवंशिक परिवर्तन करती हैं, जिसके कारण वे असामान्य कोशिकाओं में बदल जाते हैं।
सर्वाइकल कैंसर अन्य कारकों के कारण भी हो सकता है जैसे पर्यावरण जिसमें महिलाएं रहती हैं और उनकी जीवनशैली विकल्प।
कम उम्र में सेक्स करने से ह्यूमन पैपिलोमावायरस विकसित होने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके कारण कैंसर हो सकता है।
कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी महिलाओं को एचपीवी होने में मदद दे सकती है।

(और पढ़े – सबसे कॉमन योन संचारित रोग एसटीडी के लक्षण – पुरुषों और महिलाओं में)

सर्वाइकल कैंसर का पता कैसे लगाएं – How is cervical cancer diagnosed in Hindi

जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि पेल्विक की जांच के अलावा सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए पैप टेस्ट भी किया जाता है। पैप टेस्ट करने के लिए आमतौर पर डॉक्टर सर्विक्स के आसपास की कोशिकाओं को खुरचकर एक छोटा सा सैंपल लेते हैं और इन कोशिकाओं में किस तरह का परिवर्तन हुआ है, उसका परीक्षण करते हैं। अगर पैप टेस्ट में यह पता चलता है कि सर्विक्स की असामान्य कोशिकाओं में कोई परिवर्तन हुआ है तो डॉक्टर कैंसर से प्रभावित हो रही कोशिकाओं को सर्विक्स से लेकर एक दूसरा परीक्षण करते हैं।

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अगर किसी मरीज को सेक्स के बाद ब्लीडिंग होती है तो भी आमतौर पर डॉक्टर इसके कारणों का पता लगाने के लिए उतकों का एक सैंपल लेते हैं और पैप टेस्ट करके सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों का पता लगाते हैं।

सर्वाइकल कैंसर का इलाज – Treatment for cervical cancer in Hindi

सर्वाइकल कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आपका कैंसर किस चरण में पहुंच चुका है और जब सर्वाइकल कैंसर का पता चला था तब यह किस स्टेज में था। सर्जरी के अलावा रेडिएशन थेरेपी एवं कीमोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी आदि सामान्य रूप से सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए किया जाता है।

सर्जरी: में पेल्विक लिम्फ नोड को शरीर से निकाल दिया जाता है जिसके की अंडाशय और फेलोपियन ट्यूब भी बाहर निकल जाता है। लेकिन कभी-कभी इन दोनों को हटाए बिना भी पेल्विक लिम्फ नोड को बाहर निकाल दिया जाता है।

लेकिन यदि सर्वाइकल कैंसर से किसी महिला को बचाने के लिए उसका गर्भाशय निकालना पड़े तो वह फिर कभी मां नहीं बन पाती है। हालांकि गर्भाशय को निकालने की जरूरत हमेशा नहीं पड़ती है, यदि सर्वाइकल कैंसर अपने शुरूआती अवस्था में हो तो फिर बिल्कुल भी नहीं।

विकिरण चिकित्सा: विकिरण चिकित्सा कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए एक्स-रे या प्रोटॉन जैसे उच्च शक्ति वाले ऊर्जा बीम का उपयोग करती है। इसे ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए या सर्जरी के बाद किसी भी कैंसर सेल को मारने के लिए या सर्जरी से पहले कीमोथेरेपी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। विकिरण चिकित्सा निम्नलिखित तरीकों से दी जा सकती है:

१. बाहरी रूप से शरीर के प्रभावित क्षेत्र पर विकिरण किरण को निर्देशित करने के माध्यम से।
२. आंतरिक रूप से कुछ मिनटों के लिए एक महिला की योनि के अंदर रेडियोधर्मी सामग्री से भरा एक उपकरण रखकर।

(और पढ़े – कैंसर क्या है कारण लक्षण और बचाव के उपाय)

सर्वाइकल कैंसर से बचाव – Cervical Cancer Prevention in Hindi

26 वर्ष के बाद महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए एचपीवी वैक्सीन लेना चाहिए जिससे आपके शरीर में एचपीवी नहीं फैलता है और आप सर्वाकल कैंसर से जीवनभर सुरक्षित रहेंगी।

जैसा कि आप जानते हैं कि सर्वाइकल कैंसर असुरक्षित यौन संबंध बनाने से फैलता है इसलिए सेक्स करते समय कंडोम का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए और अलग-अलग व्यक्तियों के साथ सेक्स करने से बचना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर से बचने का एक आसान उपाय पैप टेस्ट भी है। अगर आप नियमित रूप से अपना पैप टेस्ट करवाती हैं तो आप पूरी तरह से इस बीमारी से बच सकती हैं।

यदि आपके पास कोई चिंता या प्रश्न है, तो आप एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ से परामर्श कर सकतीं हैं और अपने सवालों के जवाब पा सकतीं हैं।

(और पढ़े – पैप स्मीयर टेस्ट क्या होता है, प्रक्रिया, कीमत)

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