प्रेगनेंसी में महिलाओं को ब्लीडिंग होने के कारण – Causes Of Bleeding During Pregnancy In Hindi

प्रेगनेंसी में महिलाओं को ब्लीडिंग होने के कारण - Causes Of Bleeding During Pregnancy In Hindi
Written by Anamika

pregnancy me bleeding hone ke reason in hindi प्रेगनेंसी के दौरान, विशेषरुप से पहली तिमाही में महिलाओं को ब्लीडिंग होना सामान्य बात है और आमतौर पर यह ज्यादा घबराने वाली बात नहीं होती है। लेकिन गर्भावस्था में ब्लीडिंग होना कभी-कभी किसी गंभीर बात का संकेत होता है, इसलिए यह बेहद जरूरी होता है कि गर्भावस्था के दौरान अगर ब्लीडिंग (bleeding during pregnancy in hindi) हो तो ब्लीडिंग होने का कारण का पता किया जाये। डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच कराकर आपको यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपके बच्चे पर ब्लीडिंग होने का कई असर तो नहीं पड़ रहा है।

प्रेगनेंसी में महिलाओं को ब्लीडिंग होने का कारण – Bleeding in the First Trimester during pregnancy in hindi

पहले 12 हफ्ते की प्रेगनेंसी के दौरान करीब 20 प्रतिशत महिलाओं को थोड़ी ब्लीडिंग होती है। आइये जानें कि ब्लीडिंग के पीछे संभवतः क्या कारण होता है।

प्रेगनेंसी में प्रत्यारोपण के बाद होने वाली ब्लीडिंग – Implantation bleeding during pregnancy in hindi

गर्भधारण करने के पहले 6 से 12 दिनों के बाद निषेचित अंडा गर्भाशय की लाइनिंग में अपने आप प्रवेश करता है जिसकी वजह से आपको कुछ सामान्य से स्पॉट का अनुभव हो सकता है। कुछ महिलाओं को इस बात का पता ही नहीं चलता है कि वे प्रेगनेंट हैं,क्योंकि वे इस ब्लीडिंग को गलती से हल्का पीरियड समझ बैठती हैं। सामान्यतौर पर यह ब्लीडिंग बहुत हल्की होती है (reason of light bleeding during pregnancy in hindi) और कुछ घंटों से कुछ दिनों तक रहने के बाद खत्म हो जाती है।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने का कारण गर्भपात भी – Bleeding during pregnancy causes Miscarriage in hindi

प्रेगनेंसी के पहले 12 हफ्तों में गर्भपात होने की भी संभावना ज्यादा पायी जाती है। इसलिए पहली तिमाही में ब्लीडिंग होने पर चिंता होना स्वाभाविक है। हालांकि इस दौरान ब्लीडिंग होने पर यह जरूरी नहीं है कि आप अपना बच्चा खो ही दें। वास्तव में अगर बच्चे की हृदय की गति अल्ट्रासाउंड में दिखाई देती है। 90 प्रतिशत ऐसी महिलाएं जिन्हें पहली तिमाही में ब्लीडिंग हुई थी उन्हें गर्भपात नहीं हुआ। गर्भपात होने का एक विशेष लक्षण यह है कि पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन और दर्द होता है ।

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एक्टोपिक प्रेगनेंसी ब्लीडिंग होने का कारण – Ectopic pregnancy causes bleeding during pregnancy in hindi

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में निषेचित अंडा गर्भाशय के बाहर फैलोपियन ट्यूब में प्रत्यारोपित हो जाता है। यदि भ्रूण बढ़ने लगता है तो फैलोपियन ट्यूब फट सकता है जिससे मां के जीवन को खतरा रहता है(ectopic pregnancy dangerous for women)। हालांकि एक्टोपिक प्रेगनेंसी खतरनाक होती है और यह गर्भधारण करने वाली सिर्फ 2 प्रतिशत महिलाओं में ही होती है। इस दौरान ब्लीडिंग की समस्या होती है।

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ब्लीडिंग होने का कारण मोलर प्रेगनेंसी – Molar pregnancy causes bleeding during pregnancy in hindi

गर्भावस्था की यह बहुत दुर्लभ स्थिति होती है। इस स्थिति में असामान्य ऊतक भ्रूण की बजाय गर्भाशय के अंदर बढ़ने लगते हैं। ये  ऊतक कैंसर भी पैदा कर सकते हैं और शरीर में भी फैल सकते हैं। मोलर प्रेगनेंसी में महिला को जी मिचलाता है और उसे उल्टी होती है और गर्भाशय का आकार तेजी से बड़ा होता है। प्रेगनेंसी के दौरान कार्विक्स में रक्त का अधिक तेजी से प्रवाह होता है। पैप टेस्ट के जरिए इसके कारणों का पता लगाया जा सकता है। इस तरह की ब्लीडिंग होने पर चिंता की कोई बात नहीं होती है। इसके अलावा कार्विक्स, योनि और सेक्स के दौरान संक्रमण होने से भी ब्लीडिंग होने लगती है। इसमें भी चिंता की कोई बात नहीं होती है।

प्रेगनेंसी के दूसरे और तीसरे तिमाही में ब्लीडिंग होने का कारण – Bleeding in the Second and Third Trimesters during pregnancy in hindi

दूसरी तिमाही में महिला को ब्लीडिंग होने पर इसे गंभीर माना जाता है क्योंकि यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरे का संकेत होता है। दूसरी तिमाही में ब्लीडिंग होने के निम्न कारण होते हैं।

प्लेसेंटा प्रेविया ब्लीडिंग होने का कारण – Placenta previa causes bleeding during pregnancy in hindi

यह स्थिति तब पैदा होती है जब प्लेसेंटा गर्भाशय में कम जगह बना पाता है और यह बर्थ कैनाल के द्वार को अधिक या पूरी तरह से घेर लेता है। प्लेसेंटा प्रेविया तीसरी तिमाही के अंत में बहुत ही दुर्लभ स्थिति में होता है, और सिर्फ 200 प्रेगनेंसी के मामलों में से सिर्फ एक मामले में ऐसा होता है। प्लेसेंटा प्रेविया में ब्लींडिंग होने पर दर्द नहीं होता है लेकिन तत्काल डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

प्लेसेंटा अचानक विखंडित हो जाता ब्लीडिंग का कारण – Placental abruption causes bleeding during pregnancy in hindi

प्रेगनेंसी के 1 प्रतिशत मामले में प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से प्लेसेंटा और गर्भाशय के बीच ब्लड पुल के दौरान अलग हो जाता है। प्लेसेंटा का टूटना मां और बच्चे के लिए खतरनाक होता है। पेट में दर्द, योनि में जमाव, गर्भशय का नरम पड़ता और पीठ एवं कमर में दर्द प्लेसेंटा के टूटने का संकेत है। इसकी वजह से ब्लीडिंग होने लगती है।

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गर्भाशय का टूट जाना ब्लीडिंग का कारण – Uterine rupture causes bleeding during pregnancy in hindi

प्रेगनेंसी के दौरान पहले का किया गया C-सेक्शन क्षतिग्रस्त हो जाता है और इसकी वजह से गर्भाशय की दीवारें टूट जाती हैं। गर्भाशय के टूटने पर जीवन को खतरा रहता है और इसके लिए तत्काल सी-सेक्शन करने की जरूरत पड़ती है। गर्भाशय के टूटने का सबसे बड़ा संकेत यह है कि इस दौरान दर्द होता है और पेट मुलायम हो जाता है।

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समय से पहले प्रसव पीड़ा के कारण ब्लीडिंग – Premature labor causes bleeding during pregnancy in hindi

गर्भावस्था के अंतिम दिनों में योनि से खून निकलने का अर्थ इस बात का संकेत होता है कि आपका शरीर अब डिलिवरी के लिए तैयार है। डिलीवरी के कुछ हफ्ते पहले ही पीड़ा शुरू हो जाती है। म्यूकस प्लग, जोकि गर्भाशय के द्वार को घेर रहता है वह योनि से बाहर निकलने लगता है और उसकी वजह से हल्का खून निकलता है। लेकिन यदि ब्लीडिंग और प्रसव पीड़ा के लक्षण प्रेगनेंसी के 37 हफ्ते पहले ही दिखाई देने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में असामान्य ब्लीडिंग होने पर क्या करें – What to Do If You Have Abnormal Bleeding During Pregnancy in hindi

  • चूंकि प्रेगनेंसी के दौरान असामान्य रूप से ब्लीडिंग (abnormal bleeding during pregnancy) होना किसी गंभीर बात का संकेत होता है इसलिए अगर ऐसी कोई भी स्थिति आए तो
  • ब्लीडिंग होने पर इंतजार न करें बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
  • प्रेगनेंसी में योनि से खून निकलने पर पैड का इस्तेमाल करें ताकि खून आपको कपड़े में ना लगे।
  • पैड का इस्तेमाल करना इसलिए भी जरूरी है (use pad during bleeding in pregnancy) ताकि यह पता चल सके कि किस तरह का खून निकल रहा है। खून का रंग क्या है और यह ज्यादा पतला है या अधिक गाढ़ा।
  • आपको अल्ट्रासाउंड कराकर ब्लीडिंग होने के कारणों के बारे में भी जानना चाहिए।

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