असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां - Diseases Caused by Having Unsafe Sex in Hindi
सेक्स बीमारी

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां – Diseases Caused by Having Unsafe Sex in Hindi

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां - Diseases Caused by Having Unsafe Sex in Hindi

Unsafe Sex Diseases in Hindi: असुरक्षित यौन संबंधों से घातक बीमारियां हो सकती है, इसलिए इनकी जानकरी होना बहुत ही जरुरी है। आमतौर पर असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से जननांगों में संक्रमण होने सहित विभिन्न प्रकार की बीमारियां होती हैं। ये बीमारियां सिर्फ पुरुषों को ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी होती हैं। चूंकि महिलाओं के जननांग अत्यधिक संवेदनशील होते हैं एवं उन्हें भविष्य में गर्भधारण भी करना पड़ता है, इसकी वजह से उन्हें इन सेक्स बीमारियों से अधिक खतरा रहता है। वास्तव में असुरक्षित सेक्स करने से जो बीमारियां पैदा होती हैं, वे काफी गंभीर होती हैं। इससे पुरुषों की यौन क्षमता पर नकारात्मक असर तो पड़ता ही है, साथ में महिलाओं में बांझपन योनि से असहज रिसाव और गर्भपात की समस्या सहित सेक्स में पीड़ा का भी अनुभव करना पड़ता है। सेक्स के दौरान प्रीकॉन्शंस बरतकर आप अपनी सेक्स लाइफ को सेफ बना सकते हैं।

अगर आप इन बीमारियों के बारे में नहीं जानते हैं तो इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां कौन सी हैं। आप इस सेक्स से जुड़ी हर जानकरी से खुद को जागरूक करने की कोशिश करें और अपने पार्टनर के साथ भी साझा करें। तो चलिए जानते हैं असुरक्षित यौन संबंध बनाने से कौन कौन सी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

1. असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां क्या होती है – What are the diseases caused by unprotected sex in Hindi
2. यौन रोगों के लक्षण – Symptoms of sexual diseases in Hindi
3. असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों के कारण – Unsafe sex se hone wali bimari ke Karan
4. असुरक्षित सेक्स से होने वाले रोग – Unprotected sex se hone wale rog in Hindi

5. असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों से बचने के तरीके – Diseases caused by unsafe sex Prevention tips in Hindi

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां क्या होती है – What are the diseases caused by unprotected sex in Hindi

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियां क्या होती है - What are the diseases caused by unprotected sex in Hindi

  • यौन संचारित रोग (एसटीडी) संक्रमण हैं जो यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में जाते हैं
  • उन्हें यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) या वीनर रोगों venereal diseases (VD) के रूप में भी जाना जाता है।
  • जननांग क्षेत्र आमतौर पर नम और गर्म वातावरण के होते हैं, जो कि यीस्ट, वायरस और बैक्टीरिया के विकास के लिए आदर्श होते हैं।
  • लोग सूक्ष्मजीवों को संचारित कर सकते हैं जो जननांगों की त्वचा या श्लेष्म झिल्ली में निवास करते हैं। सेक्स के दौरान संक्रामक जीव वीर्य, योनि स्राव या रक्त के द्वारा लोगों के बीच फैलाये जा सकते हैं।
  • उन लोगों को यौन संचारित रोग (एसटीडी) आसानी से हो सकता है जब वे सुरक्षित सेक्स के उपकरणों का उपयोग नहीं कर रहे हैं, जैसे कंडोम, डेंटल डेम और सैनिटाइज़िंग सेक्स टॉयज
  • कुछ संक्रमण यौन संपर्क के माध्यम से फैल सकते हैं लेकिन एसटीडी के रूप में वर्गीकृत नहीं किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, मैनिंजाइटिस (meningitis) यौन संपर्क के दौरान पारित किया जा सकता है, लेकिन लोग अन्य कारणों से मेनिन्जाइटिस संक्रमण का अधिग्रहण कर सकते हैं। इसलिए इसे एसटीडी के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर प्रत्येक दिन 1 मिलियन से अधिक लोग एसटीडी के सिकार होए हैं।
  • एसटीडी के आधे से ज्यादा मामले 15 से 24 वर्ष के बीच के लोगों में पाए जाते हैं, और 4 में से 1 यौन सक्रिय महिलाओं में एक एसटीडी है। हालांकि, सीनियर्स लोगों के बीच भी एसटीडी की दरें बढ़ रही हैं।

(और पढ़े – सबसे सामान्य योन संचारित रोग की जानकारी…)

यौन रोगों के लक्षण – Symptoms of sexual diseases in Hindi

यौन रोगों के लक्षण - Symptoms of sexual diseases in Hindi

आमतौर पर असुरक्षित सेक्स करने से यौन संचारित रोग और यौन संचारित संक्रमण जैसी बीमारियों के लक्षण एवं गंभीरता हर व्यक्ति में अलग होती है। कई बार इन बीमारियों के कोई भी लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। लेकिन निदान कराए बिना इनकी जटिलताओं का पता नहीं चल पाता है। आइए जानते हैं इन बीमारियों के मुख्य लक्षण क्या हैं।

यौन संचारित बीमारियों के संपर्क में आने के कुछ दिन बाद ये लक्षण दिखायी देते हैं और कभी कभी कई साल बाद ये बीमारियां उभरती हैं।

(और पढ़े – सबसे कॉमन योन संचारित रोग एसटीडी के लक्षण – पुरुषों और महिलाओं में…)

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों के कारण – Unsafe sex se hone wali bimari ke Karan

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों के कारण - Unsafe sex se hone wali bimari ke Karan

  • सेक्स से होने वाली बीमारियों का मुख्य कारण एक से अधिक साथी फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष के साथ संबंध बनाना है।
  • सेक्स वर्कर या बाहर की महिला या पुरूष से असुरक्षित यौन संपर्क बनाने से भी सेक्स से होने वाली बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
  • सामूहिक रूप से असुरक्षित सेक्स करना यानी एक ग्रुप में आपस में एक-दूसरे के साथ असुरक्षित सेक्स करना भी असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत शामिल है।
  • पुरूष या महिला में से किसी को यौन संबंधी इंफेक्शन होने से भी सेक्स से होने वाली बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • पहली बार सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल न करना असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत आता है
  • महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान सेक्स करने से यौन संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है।
  • ओरल सेक्स से भी यौन संक्रमण होने का खतरा लगातार बना रहता है। इसीलिए ओरल सेक्स करते समय साफ-सफाई का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। सुरक्षित ओरल सेक्स के लिए डेंटल डेम जैसे कंडोम भी उपलब्ध है।

(और पढ़े – एसटीडी रोग लक्षण, प्रकार और बचाव के तरीके, जानकर आप भी हो जाये सावधान!)

असुरक्षित सेक्स से होने वाले रोग – Unprotected sex se hone wale rog in Hindi

असुरक्षित सेक्स से होने वाले रोग - Unprotected sex se hone wale rog in Hindi

आमतौर पर असुरक्षित सेक्स करने से होने वाली बीमारियां बहुत सामान्य होती हैं। लेकिन यदि समय पर इनका इलाज न कराया गया तो ये गंभीर हो जाती हैं। आइये जानते हैं ऐसी कुछ मुख्य बीमारियों के बारे में।

क्लैमिडिया – Chlamydia in Hindi

क्लैमिडिया - Chlamydia in Hindi

असुरक्षित सेक्स करने से होने वाली बीमारियों में क्लैमिडिया मुख्य बीमारी है। क्लैमिडिया एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जिसके लक्षण गोरोरिया की तरह होते हैं। असुरक्षित सेक्स करने से जब पुरुषों को क्लैमिडिया हो जाता है तो उन्हें पेशाब में जलन का अनुभव होता है और लिंग से स्राव होने लगता है। लगभग 50 प्रतिशत पुरुषों में इस बीमारी के लक्षण नहीं दिखायी देते हैं और अगर कुछ लक्षण दिखते भी हैं तो वे बहुत हल्के होते हैं। महिलाओं में क्लैमिडिया होने पर गर्भाशय ग्रीवा में सूजन हो जाती है।

यह समस्या होने पर महिलाओं की योनि में इंफेक्शन हो जाता है और योनि से असामान्य सा स्राव या फिर खूनी स्राव होता है। हालांकि 75 प्रतिशत महिलाओं को क्लैमिडिया के लक्षण नहीं पता चल पाते हैं। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, 2015 में, 15 से 19 वर्ष की लगभग 3 प्रतिशत लड़कियों में क्लैमाइडिया था।

अगर क्लैमिडिया का इलाज समय रहते नहीं कराया गया तो महिलाओं में पीआईडी रोग हो जाता है और उन्हें दर्द, बुखार, गर्भपात और बांझपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। क्लैमिडिया से पीड़ित मां जब बच्चे को जन्म देती है तो शिशु को निमोनिया और आंख में संक्रमण हो सकता है।

(और पढ़े – क्लैमाइडिया के कारण, लक्षण और इलाज …)

जननांग दाद या जननांग हर्पिस  – Genital Herpes in Hindi

जननांग दाद या जननांग हर्पिस  - Genital Herpes in Hindi

असुरक्षित यौन संबंध से हर्पिस जैसी बीमारी भी हो सकती हैं यह यौन रोग असुरक्षित यौन संबंध बनाने के दौरान वायरस के कारण होता है। आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 14 दिन बाद जननांगों पर फफोले और बड़े बड़े दाने निकल आते हैं। इसके अलावा बुखार भी हो  सकता है।

जननांगों पर दाने निकलने पर पेशाब करते समय इनमें सबसे ज्यादा दर्द होता है। हर्पिस के दाने या फफोले ठीक हो जाने के बाद भी वायरस मौजूद रहते हैं और दोबारा से कभी भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। हर्पिस के कारण मुंह और होठों पर भी दाने या फफोले हो जाते हैं। इस दौरान पार्टनर के साथ ओरल सेक्स नहीं करना चाहिए अन्यथा उसके जननांगों पर भी हर्पिस हो जाता है। हर्पिस से ग्रसित गर्भवती महिला को डॉक्टर से उचित इलाज कराना चाहिए अन्यथा गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ को खतरा हो सकता है और यहां तक कि उसकी मौत भी हो सकती है।

(और पढ़े – जननांग हरपीज (जेनिटल हर्पीज) के कारण, लक्षण, निदान और उपचार…)

सिफलिस – Syphilis in Hindi

सिफलिस - Syphilis in Hindi

यह बीमारी बैक्टीरिया से होती है और आमतौर पर असुरक्षित सेक्स करते समय त्वचा, मुंह या गुदा के माध्यम से इसके बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं। संक्रमण के 10 से 90 दिन बाद आपके जननांगों, रेक्टम और मुंह सहित शरीर के किसी भी हिस्से पर घाव हो जाता है। इसमें काफी दर्द होता है और यह बिना इलाज के दो से तीन हफ्तों में ही अपने आप ठीक भी हो जाता है। जब बैक्टीरिया ब्लड स्ट्रीम में चला जाता है तो पूरे शरीर में फैल जाता है जिसकी वजह से बुखार, सिर दर्द, ग्रंथियों में सूजन और हाथ एवं पैरों में बड़े बड़े दाने निकल आते हैं। गंभीर स्थिति में पहुंचने पर सिफलिस के कारण मस्तिष्क, हृदय, आंख और शरीर के अन्य भाग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में सिफलिस के कारण जन्म से पहले ही शिशु की मौत हो सकती है।

(और पढ़े – सिफलिस (उपदंश) के कारण लक्षण और उपचार…)

गोनोरिया – Gonorrhea in Hindi

गोनोरिया - Gonorrhea in Hindi

यह बीमारी बैक्टीरिया के कारण होती है और असुरक्षित यौन संबंध बनाने के दौरान संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति को यह बीमारी हो जाती है। यह बीमारी पुरुषों के लिंग के मूत्राशय वाले हिस्से को संक्रमित करती है जबकि महिलाओं के योनि के गर्भाशय ग्रीवा, रेक्टम और गले को संक्रमित करती है।

गोनोरिया होने पर पुरुषों को पेशाब करते समय लिंग में जलन का अनुभव होता है जबकि महिलाओं में इसके लक्षण नहीं दिखायी देते हैं। यदि इस बीमारी का समय पर इलाज न कराया जाए तो पुरुष एवं महिला दोनों को बांझपन हो सकता है।

(और पढ़े – गोनोरिया (सूजाक) के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव…)

एचआईवी और एड्स – HIV and AIDS in Hindi

एचआईवी और एड्स - HIV and AIDS in Hindi

यह बीमारी वायरस के कारण होती है। असुरक्षित यौन संबंध बनाने से मानव इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) के वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करके इसे कमजोर बनाते हैं जिसके कारण शरीर संक्रमण या कैंसर से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता है। एनल, ओरल या वजाइनल सेक्स के दौरान या फिर एचआईवी वायरस से संक्रमित व्यक्ति को लगे इंजेक्शन को साझा करने से किसी भी व्यक्ति के शरीर में एचआईवी का वायरस पहुंच सकता है। प्रेगनेंसी, डिलीवरी या फिर स्तनपान कराने वाली मां से उसके बच्चे के शरीर में यह वायरस पहुंच सकता है।

यह एक लाइलाज बीमारी है और इससे बचने के लिए असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाना चाहिए।

यदि एचआईवी उपचार के बिना आगे बढ़ता है और स्टेज 3 तक पहुंच जाता है, जिसे एड्स के रूप में जाना जाता है, तो यह घातक हो सकता है।

(और पढ़े – एचआईवी एड्स क्या है, लक्षण, कारण, जांच, इलाज और बचाव…)

हेपेटाइटिस बी – Hepatitis B in Hindi

हेपेटाइटिस बी - Hepatitis B in Hindi

यह लीवर की बीमारी है जो असुरक्षित सेक्स करने के कारण होती है। हेपेटाइटिस बी का वायरस खून, लार, सीमेन या शरीर के अन्य तरल पदार्थ के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाता है। डिलीवरी के समय यह वारयस मां से शिशु में भी पहुंच सकता है। थकान, भूख न लगना, बुखार, उल्टी, जोड़ों में दर्द, पीलिया, त्वचा पीला पड़ना आदि इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं।

हेपेटाइटिस बी से पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर अधिक से अधिक आराम करने की सलाह देते हैं। इस रोग से पीड़ित कुछ लोग जल्दी ठीक हो जाते हैं जबकि कुछ लोगों को ठीक होने में लंबा समय लगता है। हेपेटाइटिस के टीके मौजूद हैं जिन्हें समय पर लगवाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

(और पढ़े – हेपेटाइटिस बी के लक्षण, कारण, जांच, उपचार और रोकथाम…)

जेनाइटल वार्ट्स या जननांगों के आस-पास मस्से – Genital Warts in Hindi

जेनाइटल वार्ट्स या जननांगों के आस-पास मस्से - Genital Warts in Hindi

जननांगों के आस-पास मस्से की यह बीमारी ह्यूमन पैपीलोमा वायरस के कारण होती है। शुरूआत में इस बीमारी का कोई भी लक्षण दिखायी नहीं देता है लेकिन वायरस के संपर्क में आने के तीन से चार महीनों बाद यह बीमारी उभरती है। इस वायरस के कारण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होता है इसलिए समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है। ह्यूमन पैपीलोमा वायरस 70 प्रकार का होता है जिनमें से 35 वायरस जननांगों को बहुत बुरी तरीके से प्रभावित करते हैं।

(और पढ़े – जननांग मस्सों (जेनिटल वार्ट्स) के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलू इलाज…)

ट्राइकोमोनियासिस – Trichomoniasis in Hindi

ट्राइकोमोनियासिस - Trichomoniasis in Hindi

यह बीमारी महिला और पुरुष दोनों को होती है। हालांकि महिलाओं में इसके लक्षण जल्दी दिखायी नहीं देते हैं। यह संक्रमण प्रोटोजोआ परजीवी ट्राइकोमोनास वजानेलिस के कारण होता है। महिलाओं की योनि जबकि पुरुषों के मूत्रमार्ग में यह बीमारी होती है। इसके अलावा बिना कंडोम के सेक्स करने से जननांगों के संपर्क में आने से यह रोग होता है। ट्राइकोमोनियासिस होने पर महिलाओं की योनि से गंध आती है, तरल पदार्थ स्रावित होता है और संभोग के दौरान दर्द होता है जबकि पुरुषों को पेशाब के दौरान दर्द होता है।

(और पढ़े – ट्राइकोमोनिएसिस के कारण, लक्षण, इलाज एवं बचाव…)

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) – Human papillomavirus (HPV)

ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) - Human papillomavirus (HPV)

  • ह्यूमन पेपिलोमावायरस, वायरस के एक समूह का एक नाम है जो त्वचा और श्लेष्म झिल्ली को प्रभावित करता है, जैसे कि गले, गर्भाशय ग्रीवा, गुदा और मुंह। एक बेहद खतरनाक है, आम और सबसे तेजी से फैलने वाला वायरस है।
  • 100 से अधिक प्रकार के एचपीवी हैं, जिनमें से लगभग 40 जननांग क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। ये प्रकार व्यक्ति के मुंह और गले तक भी पहुंच सकते हैं।
  • इतना ही नहीं इसके अधिकतर मामलों में इस ह्यूमन पेपिलोमावायरस से होने वाली बीमारी के लक्षण मालूम भी नहीं चलते। जिसके कारण प्रभावित व्यक्ति को इस बीमारी का पता नहीं चलता है।
  • गर्भाशय ग्रीवा के भीतर असामान्य कोशिका वृद्धि और परिवर्तन, एचपीवी संक्रमण का कारण हो सकता है जो सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी बढ़ाता है।
  • एचपीवी वाले अधिकांश व्यक्तियों में कोई लक्षण नहीं होते हैं और वे अनजान होते हैं।
  • एचपीवी आमतौर पर योनि या गुदा मैथुन, ओरल सेक्स और जननांग से जननांग संपर्क के माध्यम से प्रेषित होता है। एचपीवी वायरस वाले लोग जिनमे इसके कोई भी लक्षण नहीं होते हैं वह भी दूसरों को संक्रमित कर सकता है।
  • एक महिला जो गर्भवती है और उसे एचपीवी है तो वह बच्चे के जन्म के दौरान अपने बच्चे को वायरस पहुंचा सकती है, हालांकि यह बहुत दुर्लभ है।
  • एचपीवी को रोकने के लिए टीकाकरण सबसे अच्छा तरीका है।
  • यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि योनि सेक्स, गुदा सेक्स और ओरल सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल किया जाए तो इस संक्रमण से पूरी तरह बचा जा सकता है।

(और पढ़े – जानिए एनल सेक्स यानि गुदा मैथुन करने से होने वाले नुकसान…)

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों से बचने के तरीके – Diseases caused by unsafe sex Prevention tips in Hindi

असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों से बचने के तरीके - Diseases caused by unsafe sex Prevention tips in Hindi

  • कंडोम असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों (एसटीडी) के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है।
  • असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए कंडोम का उपयोग करना सबसे सुरक्षित तरीका है।
  • हर बार मौखिक सेक्स, योनि या गुदा सेक्स के लिए, एक नए लेटेक्स कंडोम का उपयोग करें। कंडोम ऑफ़लाइन या ऑनलाइन खरीदने के लिए उपलब्ध हैं।
  • लेटेक्स कंडोम का उपयोग करते समय, तेल आधारित स्नेहक, जैसे पेट्रोलियम जेली का उपयोग करने से बचें।
  • गर्भनिरोधक के गैर-अवरोधक रूप, जैसे कि मौखिक गर्भ निरोधक या अंतर्गर्भाशयी डिवाइस, लोगों को यौन संचारित संक्रमणों से बचाने के लिए कुछ भी नहीं करते हैं।

(और पढ़े – यौन संचारित रोग एसटीडी को रोकने के तरीके…)

एसटीडी या यौन संचारित संक्रमणों के जोखिम को कम करने के लिए आप निम्न कदम उठा सकते हैं:

संयम (Abstinence)

किसी भी प्रकार की यौन क्रिया से परहेज एसटीडी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

एक ही साथी के साथ सेक्स करना (Monogamy to one uninfected partner)

एक दीर्घकालिक, व्यक्ति जो संक्रमित नहीं है के साथ एकरस यौन संबंध एसटीडी को अनुबंधित करने के जोखिम को कम कर सकता है।

टीकाकरण (Vaccinations)

ऐसे टीकाकरण हैं जो किसी व्यक्ति को अंततः एचपीवी और हेपेटाइटिस बी के कारण होने वाले कुछ प्रकार के कैंसर से बचा सकते हैं।

संक्रमण की जाँच करें (Check for infections)

नए साथी के साथ संभोग करने से पहले, जाँच लें कि साथी या आपको कोई यौन रोग तो नहीं है।

मॉडरेशन में शराब पीना (Drink alcohol in moderation)

जिन लोगों ने बहुत अधिक शराब का सेवन किया है, उनके जोखिम भरे व्यवहार जिसमे बिना कंडोम के सेक्स करना शामिल है में शामिल होने की संभावना अधिक होती है।

समझाएं कि आप सुरक्षित यौन संबंध चाहते हैं (Explain you want safe sex)

नए साथी के साथ किसी भी यौन क्रिया में संलग्न होने से पहले, संवाद करें कि आप केवल सुरक्षित यौन संबंध बनाना चाहते हैं।

सेक्स शिक्षा (Sex Education)

माता-पिता, स्कूल, और समाज को सुरक्षित सेक्स के महत्व के बारे में बच्चों को पढ़ाने की ज़रूरत है, और यह बताएं कि एसटीडी से संक्रमित होने से कैसे बचा जाए, जिसमें एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) समुदाय से संबंधित जानकारी शामिल है।

किसी अन्य व्यक्ति के साथ सेक्स करने से पहले सेक्स करने के सुरक्षित तरीकों पर बिचार कर ललें, यह आपको असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की एक लम्भी श्रृंखला से बचा सकता है।

अगर आप सेक्स करने के लिए इसके सुरक्षित तरीके नहीं अपनाते हैं तो आप कई तरह की गंभीर सेक्स बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। असुरक्षित सेक्स करने के खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जो STDs या यौन संक्रमित रोग के लिए जानें जाते है। हर दिन 1 मिलियन से ज्यादा लोग दुनिया भर में सिफिलिस,  हर्पिस, गोनेरिया, क्लामिडिया और ट्राइकोमोनियासिस जैसी गंभीर सेक्स बीमारियों से संक्रमित होते हैं, जोकि सेक्स से फैलने वाले सबसे आम यौन रोग हैं।

(और पढ़े – यौन संचारित रोगों की रोकथाम और एसटीडी बचने के तरीके…)

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