बच्चों में निमोनिया के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव – Pneumonia in kids in Hindi

बच्चों में निमोनिया के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव - Pneumonia in kids in Hindi
Written by Anamika

Pneumonia in kids in Hindi निमोनिया एक खतरनाक बीमारी है जो फेफड़े में वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। यह बीमारी आमतौर पर छोटे बच्चों को सबसे अधिक प्रभावित करती है। निमोनिया होने पर फेफड़े में हवा की थैली (air sacs) में मवाद (pus) एवं अन्य तरल पदार्थ भर जाता है जिसकी वजह से बच्चे को श्वास लेने में कठिनाई महसूस होती है। इस लेख में आप जानेंगे बच्चों में निमोनिया के कारण, लक्षण, बच्चों में निमोनिया का इलाज और बचाव के तरीकों के बारे में। (Pneumonia in Hindi)

वायरल एवं बैक्टीरियल दोनों प्रकार का निमोनिया तेजी से फैलता है और यदि समय पर इसका इलाज नहीं कराया जाये तो यह बीमारी अधिक खतरनाक हो सकती है। ज्यादातर मामलों में आमतौर पर बच्चों में सामान्य सी सर्दी एवं खांसी (cold and cough) होने पर ही बच्चों को निमोनिया हो जाता है लेकिन बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होने वाले निमोनिया में शुरूआत में सर्दी-खांसी जैसे लक्षण बच्चों में दिखाई नहीं देते हैं।

1. बच्चों में निमोनिया के लक्षण – Symptoms of Pneumonia in Hindi
2. निमोनिया के कारण – Causes of Pneumonia in Hindi
3. बच्चों में निमोनिया की जाँच – Diagnosis of Pneumonia in Hindi
4. बच्चों में निमोनिया का इलाज – Treatment of Pneumonia in Hindi
5. निमोनिया घरेलू उपचार – Pneumonia home remedies in hindi
6. निमोनिया से बचने के उपाय – Prevention of Pneumonia in Hindi

बच्चों में निमोनिया के लक्षण – Symptoms of Pneumonia in Hindi

बच्चे में निमोनिया के लक्षण दिखायी देने पर उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। अगर आपके बच्चे का होंठ और चेहरा नीला दिखायी दे तो यह इस बात का संकेत है कि बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है और उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाने की जरूरत है।

निमोनिया के लक्षण निम्न हैं-

तेज बुखार होना-बच्चे को 102°F से अधिक बुखार हो जाता है और उसे वह कांपने लगता है, इसके अलावा बच्चे की मांसपेशियों में भी तेज दर्द होता है।

थकान- बच्चे को कमजोरी हो जाती है और वह रात में ठीस से सो नहीं पाता है।

श्वास लेने में तकलीफ- निमोनिया होने का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि बच्चे को सांस लेने में अधिक कठिनाई होती है, उसकी नाक बहती है और घरघराहट की आवाज भी आती है।

कफ- फेफड़े से गीला श्लेष्म (mucus) कफ के रूप में निकलता है जोकि आमतौर पर हरे रंग का होता है। कुछ गंभीर मामलों में कफ के साथ खून भी निकलता है।

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नीला रंग- बच्चे की त्वचा विशेषरूप से चेहरा और होंठ नीला पड़ जाता है।

दर्द- छाती और पेट में दर्द होता है, जो कि फेफड़े (lungs) में संक्रमण की स्थिति पर निर्भर करता है।

पेट में परेशानी- बच्चे को मितली और उल्टी महसूस होती है और यहां तक की उसे डायरिया की भी समस्या हो सकती है।

वायरल निमोनिया धीरे-धीर विकसित होता है जबकि बैक्टीरियल निमोनिया बहुत तेजी से बढ़ता है। निमोनिया होने पर बच्चे के नाखून का रंग भी मटमैला हो सकता है।

निमोनिया के कारण – Causes of Pneumonia in Hindi

निमोनिया फेफड़ों में हवा की थैली में एक प्रकार का इंफेक्शन है जो बैक्टीरिया, वायरस और कभी-कभी कवक (fungi) के कारण होता है। ज्यादातर मामलों में निमोनिया बैक्टीरिया के कारण होता है लेकिन वायरल निमोनिया बच्चे को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

फेफड़े अलग-अलग हिस्सों से बने होते हैं। दाएं फेफड़े में तीन और बाएं फेफड़े में दो भाग (lobes) होते हैं। निमोनिया फेफड़े के सिर्फ एक ही भाग को प्रभावित करता है या यह पूरे फेफड़ों में फैल सकता है।

निमोनिया आमतौर पर नवजात शिशु (infants) या छोटे बच्चों में होता है।

वायरल इंफेक्शन जैसे सर्दी-खांसी, बुखार और इंफ्लूएंजा के कारण निमोनिया पकड़ सकता है।

इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर भी निमोनिया हो सकता है।

हॉस्पिटल में अधिक दिनों तक भर्ती रहने के कारण भी निमोनिया हो सकता है।

मस्तिष्क में चोट लगने या गले में कफ की समस्या होने से निमोनिया हो सकता है।

निमोनिया तब अधिक विकसित होता है जब बच्चा लंबी सांसों की बजाय छोटी और जल्दी-जल्दी सांस लेने लगता है। बच्चे के मुंह, नाक, फेफड़े और गले में बैक्टीरिया मौजूद होने के कारण भी बच्चा निमोनिया के चपेट में आ सकता है।

बच्चों में निमोनिया की जाँच – Diagnosis of Pneumonia in Hindi

बच्चे में निमोनिया का संदेह होने पर उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाकर इस बीमारी का निदान (diagnosis) करवाना चाहिए। डॉक्टर बच्चे का शारीरिक परीक्षण करता है और स्टेथोस्कोप की सहायता से बच्चे की छाती (chest) की भी जांच करता है। जल्दी-जल्दी सांस लेना, सांस लेने में तेज आवाज आना, घरघराहट आदि निमोनिया के लक्षण होते हैं।

बच्चे में निमोनिया के निदान के लिए उसके छाती(chest) का एक्स-रे भी किया जाता है। एक्सरे से यह पता चल जाता है कि निमोनिया से फेफड़े का कितना भाग प्रभावित है। इसके अलावा बच्चे के ब्लड और थूक का भी नमूना जांच के लिए लिया जाता है।

बच्चों में निमोनिया का इलाज – Treatment of Pneumonia in Hindi

ज्यादातर मामलों  में निमोनिया का इलाज घर पर ही किया जा सकता है। हालांकि यदि नवजात शिशु और बच्चों में यदि निमोनिया गंभीर रूप धारण कर ले तो उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ता है।

निमोनिया के इलाज के लिए सामान्यतौर पर बच्चे को एंटीबायोटिक्स दी जाती है। एंटीबायोटिक्स देने से पहले बच्चे में निमोनिया होने के कारण और उसकी गंभीरता (seriousness) का पता लगाया जाता है।

निमोनिया घरेलू उपचार – Pneumonia home remedies in hindi

बच्चों में निमोनिया का इलाज घर पर इस तरह से किया जाता है-

  • बच्चे को एंटीबायोटिक टेबलेट या तरल पदार्थ के रूप में दिया जाता है।
  • दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं।
  • बुखार कम करने के लिए पैरासिटामोल दिया जाता है।

हास्पिटल में बच्चों में निमोनिया का इलाज इस तरह किया जाता है-

  • एंटीबायोटिक की दवाएं ड्रिप के माध्यम से बच्चे की नसों में दी जाती है।
  • ऑक्सीजन थेरेपी के जरिए बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन दिया जाता है।
  • यदि बच्चे को डिहाइड्रेशन की समस्या है तो बच्चे को तरल पदार्थ दिया जाता है।
  • बच्चे के फेफड़े से कफ और थूक को निकालने के लिए फिजियोथेरेपी दी जाती है।

निमोनिया से बचने के उपाय – Prevention of Pneumonia in Hindi

बच्चे के इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए उसे स्तनपान कराते रहें।

निमोनिया से बचने के लिए बच्चे को समय-समय पर टीका लगवाते रहें।

नवजात शिशु को छूने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से साफ (clean) कर लें।

बच्चे के बॉटल और खिलौनों को भी साफ-सुथरा रखें क्योंकि इन्हीं के माध्यम से निमोनिया के जीवाणु अधिक उत्पन्न होते हैं।

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