ब्रॉन्काइटिस कारण लक्षण और बचने के उपाय – Bronchitis Causes Symptoms And Treatment In Hindi

ब्रॉन्काइटिस कारण लक्षण और बचने के उपाय – Bronchitis Causes Symptoms And Treatment In Hindi
Written by Ganesh

Bronchitis in Hindi ब्रॉन्काइटिस फेफड़ों में बड़ी श्वासनलियो के भीतरी भाग, जिसे ब्रॉन्काइ कहा जाता है, की सूजन है। सूजन के कारण सामान्य से अधिक बलगम बनता है। इससे फेफड़ों में वायु प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है और फेफड़े क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।आइये जानते है ब्रॉन्काइटिस कारण लक्षण और बचने के उपाय (Bronchitis causes symptoms and treatment in Hindi ) के बारें में।

ब्रोंकाइटिस क्या है – What is bronchitis in hindi

ब्रोंकाइटिस साँस की बीमारी है जो ब्रोन्कियल नलिकाओं (ब्रांकाई), जो कि नाक और फेफड़ों के बीच की हवा के लिए स्थान है, की परतों की सूजन के रूप में प्रकट होता है।

तीव्र ब्रॉनकाइटिस 2 से 4 सप्ताह तक रहता है और इसका उपचार हो सकता है। लंबे समय तक रहने वाला ब्रॉनकाइटिस फेफड़ों की लंबी अवधि तक रहने वाली बीमारी है। यह फेफड़ों में होने वाले रोगों जिन्हें सीओपीडी (COPD) या लंबे समय तक रहने वाले अवरोधक फुफ्फुस रोग (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़) कहते हैं, में से एक है। इससे हुई क्षति कई बार समय के साथ बदतर होती जाती है और उसका इलाज नहीं हो सकता है।

ब्रॉन्काइिटस तीन तरह का होता है – Bronchitis is three types

एक्यूट ब्रॉन्काइटिस: चंद दिनों के फ्लू के कारण होने वाली खांसी जैसी ब्रॉन्काइटिस को एक्यूट ब्रॉन्काइटिस (Acute bronchitis) कहते हैं।  यह एक से तीन सप्ताह की अवधि की होती है

क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस: क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस ( Chronic bronchitis) जो सिगरेट आदि के पीने की वजह से सांस की नली में सिकुड़न के कारण होती है। लगातार दो वर्षों तक, प्रति वर्ष कम-से-कम तीन माह तक रहने वाली

एलर्जिक ब्रॉन्काइटिस: Allergic bronchitis यही अस्थमा के नाम से जाना जाता है। जिन लोगों को दमे के नाम से ही डर लगता है, उनके लिए इसका दूसरा नाम ही सच मान बैठना, दिल की तसल्ली के लिए तो ठीक है, लेकिन रोग को काबू में रखने के लिए उपाय दमे वाले ही अपनाने होंगे।

ब्रॉन्काइटिस के लक्षण  – Bronchitis symptoms in hindi

मुख्य लक्षणों में खांसी के साथ लार का बाहर आना है। एक्यूट और क्रोनिक दोनों तरह के ब्रोंकाइटिस में निम्न लक्षणों प्रकट हो सकते है।

  • ब्रांकाई की सूजन
  • बार-बार खाँसी होना
  • थकान महसूस होना
  • साँस लेने में कठिनाई
  • व्हीज़िंग (सांस के साथ सीटी की आवाज होना)
  • खाँसते या गहरी साँस लेते हुए सीने में दर्द
  • बुखार और कंपकंपी
  • छाती में जकड़न या बेचैनी
  • नाक का भरना या बहना
  • सिरदर्द
  • थकान
  • मांसपेशियों में दर्द
  • गले में खराश व गले में तकलीफ

डॉक्टर के पास तुरंत जाएँ , यदि आपकोः 

  • ठंड लग रही है या 101 डिग्री फ़ारेनहाइट से ज्यादा बुखार है
  • इनहेलर या साँस उपचार की ज्यादा जरूरत पड़ रही है
  • बलगम अधिक है, रगं बदलता है या निकलने में अधिक मुश्किल हो रही है
  • आपके नाखूनों या उंगलियों की त्वचा या मुँह में नए या बढ़ते नीले या भूरे धब्बे पड़ रहे हैं
  • बोलने अथवा सामान्य गतिविधियों में तकलीफ हो रही है
  • सोते हुए अधिक तकियों की जरूरत पड़ रही है या रात में साँस लेने के लिए आप ने कुर्सी में सोना शुरू कर दिया है

ब्रॉन्काइटिस के कारण – Bronchitis causes in Hindi

  • बैक्टीरिया ब्रोंकाइटिस का कारण हो सकता हैं।
  • वायरस संक्रमण भी ब्रोंकाइटिस का कारण हो सकता हैं।
  • धूम्रपान जैसे की सिगरेट या बीड़ी के धुएं का सिकार होना
  • वायु प्रदूषण जिसमे औद्योगिक धुआं भी सामिल है
  • वायु में किसी चीज से एलर्जी जैसे पराग कण भी ब्रोंकाइटिस के कारण हो सकते हैं।
  • फेफड़ों का रोग जैसे दमा अथवा वातस्फीति
  • रसायन और विषैली गैस भी ब्रोंकाइटिस के कारण हो सकते हैं।

ब्रॉन्काइटिस की जाँच – Bronchitis diagnosis in Hindi

  • छाती का X-रे किया जाता है
  • लंग फंक्शन टेस्ट करना
  • बलगम की जाँच की जाती है
  • रक्त परीक्षण
  • ऑक्सीजन के संतृप्त होने का माप (पल्स ओक्सिमेट्री)

ब्रॉन्काइटिस का इलाज – Bronchitis treatment in Hindi

आपकी देखभाल में आसानी से सांस लेने में आपकी मदद करने वाली दवाएं और साँस के व्यायाम शामिल है। यदि आपको लम्बे समय तक रहने वाला ब्रॉनकाइटिस है तो आपको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है। आपकी देखभाल में निम्नलिखित चीजे शामिल हो सकती हैं

  • सर्दी और फ्लू से बचना।
  • बलगम पतला रखने के लिए अधिक मात्रा में पेय पीना।
  • ह्यूमिडिफायर (नमी रक्षक) या वेपराइज़र का प्रयोग करना।
  • आपके फेफड़ों से बलगम निकालने के लिए उचित स्थिति में बैठना और थपकी देना। आपको ऐसा करना सिखाया जाएगा।

ब्रॉन्काइटिस में क्या खाएं और ब्रोंकाइटिस का घरेलू इलाज – What to eat in bronchitis and Home remedies for Bronchitis in hindi

  • बलगम की मात्रा घटाने के लिए जौ का गर्म सूप पी सकते है
  • तरल पदार्थ, हर्बल चाय (herbal tea), और सूप अधिक मात्रा में पीना चाहिए।
  • काली मिर्च, तुलसी व लौंग से बनी चाय पीने से गले में खराश से निजात मिलती है।
  • गर्म नीबू पानी ब्रोंकाइटिस के इलाज के लिए लाभकारी होता है।
  • फैटी एसिड्सवाले खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट मछली का सेवन कर सकते है यह यह ब्रोंकाइटिस से उत्पन्न हुई सूजन को कम करने में मदद करते है
  • बेरीज, ब्रोकोली, पालक, और गाजर का सेवन करने क्योकि ये एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं।
  • पानी का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में इकट्ठा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।
  • प्याज, लहसुन और अदरक का उपयोग सुजन को कम करने के साथ प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए सदियों से किया जाता आ रहा है इनका सेवन जरी रखे
  • थोड़ी सी हल्दी दूध में डालकर उबाल लें। दूध तब तक उबालें जब तक हल्दी पक ना जाएं. फिर इसे कप में लेकर चाय की चुस्कियां लेते हुए पिएं। इससे गले के दर्द मेंऔर खराश में काफी राहत मिलेगी।
  • और पढ़े – हल्दी और दूध के फायदे और नुकसान

ब्रॉन्काइटिस में इनका सेवन करने से बचे – do not eat in bronchitis in hindi

  • कार्बोहायड्रेट से समृद्ध आहार अपच और पेट फूलने का कारण हो सकते हैं और इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • केले बलगम को बढ़ाते हैं, इसलिए उनके सेवन से बचना चाहिए।
  • मांस, चीनी, चाय, कॉफ़ी, मसाले, अचार, रिफाइंड और प्रोसेस्ड आहार, ठंडा पेय, आइसक्रीम और व मैदे से बने पदार्थ के सेवन से बचना चाहिए।

ब्रॉन्काइटिस से बचने के उपाय – Bronchitis prevention in Hindi

धूम्रपान छोड़ें: लंबे समय तक रहने वाले ब्रॉन्काइटिस से होनेवाली क्षति को धीमा करने का एकमात्र तरीका धूम्रपान छोड़ना है।

शराब न पियें: यह आपके वायु मार्ग को साफ करने के लिए खांसने और छींकने की इच्छा कम करता है। यह आपके शरीर में द्रवों की कमी करता है जिससे आपके फेफड़ों में बलगम सख्त हो जाता है तथा उसके निकलने में मुश्किल होती है।

ऐसी चीजों से बचें जो आपके फेफड़ों के लिए हानिकारक है जैसे वायु प्रदूषण, धूल और गैस।

अपने शरीर का ऊपरी हिस्सा उठाकर सोएँ। अपना सिर बिस्तर से ऊँचा रखने के लिए फोम के बड़े टुकडों का प्रयोग करें।

वायरस और अन्य संक्रमण फैलने से रोकने के लिए अपने हाथों को नियमित धोएं।

तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें।

ब्रॉन्काइटिस से बचने के लिए योग और व्यायाम – Yoga and Exercise to Avoid Bronchitis in hindi

व्यायाम जिनसे आपकी मांसपेशियों पर अधिक जोर नहीं पड़ता जैसे कि पैदल चलना, तैरना आदि करना चाहिए। साथ ही साथ योग जैसे आधे मेरुदंड को मोड़ना और सुखासन ब्रोंकाइटिस की  आरंभिक स्थिति को नियंत्रित करने में सहायक होते है।

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