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इरेक्टाइल डिसफंक्शन दूर करने के लिए एक्सरसाइज और व्यायाम – How to Treat Erectile Dysfunction With Exercises in Hindi

इरेक्टाइल डिसफंक्शन दूर करने के लिए एक्सरसाइज और व्यायाम - How to Treat Erectile Dysfunction With Exercises in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करने के लिए केवल यौन उत्‍तेजक दवाओं का ही उपयोग नहीं किया जाता है। बल्कि इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करने के लिए एक्‍सरसाइज और व्‍यायाम भी प्रभावी होते हैं। इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन तब होता है जब कोई पुरुष पेनिस में इरेक्‍शन प्राप्‍त नहीं कर सकता या उसे लंबे समय तक नहीं बनाए रखता है। इस प्रकार की समस्‍या पुरुषों को किसी भी उम्र में हो सकती है।

शारीरिक कमजोरी आने पर मांसपेशियां विशेष रूप से लिंग को टाइट बनाए रखने की ताकत खो देती हैं। इस प्रकार की समस्‍या का उपाय व्‍यायाम और एक्‍सरसाइज से किया जा सकता है। इस लेख में आप स्‍तंभन दोष या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करने के लिए व्‍यायाम और एक्सरसाइज की जानकारी प्राप्‍त करेगें।

विषय सूची

  1. इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के प्रमुख कारण – causes of erectile dysfunction in Hindi
  2. इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के उपाय – Remedies for erectile dysfunction in Hindi
  3. इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए एक्‍सरसाइज – Exercise for erectile dysfunction in Hindi
  4. इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करे कीगल एक्‍सरसाइज – Kegel exercises for erectile dysfunction in Hindi
  5. कीगल एक्‍सरसाइज पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सक्रिय करे – Activating pelvic floor muscles in Hindi
  6. इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए पिलेट्स व्‍यायाम – Pilates exercises for erectile dysfunction in Hindi
  7. व्‍यायाम करते समय याद रखने वाली बातें – Things to remember when exercising in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के प्रमुख कारण – causes of erectile dysfunction in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के प्रमुख कारण - causes of erectile dysfunction in Hindi

यौन उत्‍तेजना में कमी, लिंग की पर्याप्‍त कठोरता में कमी या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन एक गंभीर समस्‍या है। हालांकि यह कोई स्‍थाई बीमारी नहीं है यह केवल शारीरिक कमजोरी के कारण होती है। इस प्रकार की समस्‍या को उचित पौष्टिक आहार की कमी और कुछ विशेष प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं होती हैं। स्‍तंभन दोष होने के कुछ प्रमुख कारणों में शामिल हैं :

इस प्रकार की समस्‍या को दूर करने के लिए डॉक्‍टर फॉस्‍फोडाइस्‍टरेज टाइप 5 अवरोधकों (phosphodiesterase type 5 inhibitors) जैसे कि वियाग्रा जैसी दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। लेकिन इसके अलावा इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन को दूर करने के लिए व्‍यायाम और एक्‍सरसाइज भी कर सकते हैं जो वजन घटाने में भी सहायक होते हैं।

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इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के उपाय – Remedies for erectile dysfunction in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के उपाय - Remedies for erectile dysfunction in Hindi

अधिकांश लोग यौन क्षमता या यौन क्रिया में थोड़ी भी समस्‍या या मुश्किल आने पर सीधे यौन वर्धक दवाओं का सेवन करने लगते हैं। जबकि स्तंभन दोष या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन का इलाज केवल यौन क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं ही नहीं हैं। इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन जैसी यौन कमजोरी को दूर करने के लिए व्‍यायाम करने के फायदे भी होते हैं। एक अध्‍ययन के अनुसार नियमित रूप से जननांग संबंधी व्‍यायाम करने से लगभग 40 प्रतिशत लोगों को लाभ प्राप्‍त हुआ। जिनमें से 33 प्रतिशत लोग पूरी तरह से इस समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं।

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इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए एक्‍सरसाइज – Exercise for erectile dysfunction in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए एक्‍सरसाइज - Exercise for erectile dysfunction in Hindi

स्‍तंभन दोष को दूर करने के लिए पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करना एक अच्‍छा विकल्‍प है। पैल्विक फ्लोर एक्‍सरसाइज इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन को दूर करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। पैल्विक फ्लोर मांसपेशियां लिंग में रक्‍त के प्रवाह को बनाए रखने और इरेक्‍शन को बनाए रखने में महत्‍वपूर्ण हैं। पैल्विक फ्लोर एक्‍सरसाइज के दौरान लिंग की मांसपेशियों में दबाव डाला जाता है। दबाव पड़ने से लिंग में रक्‍त का प्रवाह तेजी से होता है जो लिंग में उत्‍तेजना लाने में मदद करता है। इस तरह से आप इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करने के लिए कई प्रकार की एक्‍सरसाइज कर सकते हैं। जो निश्चित रूप से यौन उत्‍तेजना बढ़ाने वाली दवाओं से अधिक प्रभावी होती हैं। आइए जाने पैल्विक फ्लोर एक्‍सरसाइज और पुरुषों में इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करने के तरीके क्‍या हैं।

किस प्रकार का व्यायाम मदद कर सकता है?

  • पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम स्तंभन दोष वाले लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं।
  • पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां लिंग में रक्त के प्रवाह को बनाए रखने और इरेक्शन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।
  • पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां लिंग की शिराओं पर दबाव डालकर ऐसा करती हैं। यह दबाव रक्त को लिंग क्षेत्र को छोड़ने से रोकता है, जिससे एक टाइट लिंग का इरेक्शन संभव हो पाता है।

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इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करे कीगल एक्‍सरसाइज – Kegel exercises for erectile dysfunction in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन दूर करे कीगल एक्‍सरसाइज - Kegel exercises for erectile dysfunction in Hindi

कीगल एक्‍सरसाइज पैल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने और इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन को दूर करने का सबसे अच्‍छा उपाय है। नियमित रूप से इस व्‍यायाम को करने से रोगी को कुछ ही दिनों में स्‍तंभन दोष से छुटकारा मिल सकता है। ये व्‍यायाम श्रोणि (pelvis) के नीचे की मांसपेशियों पर केंद्रित होता है और विशेष रूप से उन मांसपेशियों में जिन्‍हें पबोकॉसीज (pubococcygeus) कहा जाता है। यह प्‍यूविक बोन से टेलबोन तक लूप करता है और श्रोणि अंगों का समर्थन करता है। जब ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं तब यह लिंग में रक्‍त के प्रवाह को बाधित करती हैं। जिससे लिंग में पर्याप्‍त तनाव नहीं आता है। पैल्विक फ्लोर एक्‍सरसाइज करने के फायदे प्‍यूबोकोकीज मांसपेशियों को बेहतर और मजबूत बनाने में होता है। स्‍तंभन दोष को दूर करने के लिए किसी व्‍यक्ति को कीगल एक्‍सरसाइज करने के दौरान फर्क दिखने में 4 से 6 सप्‍ताह का समय लग सकता है।

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कीगल एक्‍सरसाइज पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सक्रिय करे – Activating pelvic floor muscles in Hindi

कीगल एक्‍सरसाइज पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियां सक्रिय करे – Activating pelvic floor muscles in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन को दूर करने के लिए कीगल एक्‍सरसाइज बहुत ही महत्‍वपूर्ण व्‍यायाम है। कीगल एक्‍सरसाइज मूत्र संयम और यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है। यह एक्‍सरसाइज पुरुषों के लिए बेहद फायदेमंद होती है। नियमित रूप से इस व्‍यायाम को करना पुरुषों को अपनी पैल्विक फ्लोर मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायक है। कीगल एक्‍सरसाइज विशेष रूप से, बुलबोकावरनोसस की मांसपेशियों (Bulbocavernosus muscle) को मजबूत करने में मदद करती हैं। यह महत्‍वपूर्ण मांसपेशी के तीन काम होते हैं, स्खलन के दौरान वीर्य को पंप करना, इरेक्शन के दौरान लिंग को रक्त से भर देना, और पेशाब के बाद मूत्रमार्ग को खाली करने में मदद करना।

अपने पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों (पेल्विक मसल) का पता लगाने के लिए अपने मूत्र के प्रवाह को बीच में रोकना:

कीगल एक्‍सरसाइज करने से पहले, अपनी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों (पेल्विक मसल) का पता लगाना बहुत जरूरी होता है। यह मांसपेशियां आपके पेल्विक क्षेत्र को आधार देने वाली मांसपेशी होती है। पेशाब करते समय मूत्र के प्रवाह को बीच में रोकना इन्हें पहचानने के लिए सबसे सरल तरीका है। ऐसा करने के लिए आपको जिन मांसपेशियों पर दवाब देना पढ़ रहा है। वह ही पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां हैं। यह संकुचन कीगल एक्‍सरसाइज की मूलभूत गतिविधि है। अब उन मांसपेशियों को ढीला कीजिये तथा पेशाब के प्रवाह को पुनः आरंभ कीजिये ऐसा करने पर आपको यह ठीक ठीक पता लग जायेगा की किगल कहाँ है।

लेटकर कीगल एक्‍सरसाइज करने की विधि:

आप अपने घुटनों के बल झुकें, इस दौरान आपके पैर पूरी तरह से सपाट हों और आपकी भुजाएं बाजू में हों।

साँस छोड़ें और अपनी पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को दबाएँ और 3 तक गिनें, इसके बाद साँस छोड़े और पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को रिलेक्स करें और फिर तीन तक गिने। इस दौरान गिनती के अनुसार सांस लेते और छोड़ते रहें। ऐसा करने से लिंग की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद मिलती है। आप इस एक्‍सरसाइज को बैठकर, खड़े होकर या घुटनों के बल लेटकर कर सकते हैं।

बैठकर कीगल एक्‍सरसाइज करने की विधि:

यदि आपको यौन उत्‍तेजना में कमी महसूस हो रही है तो कीगल एक्‍सरसाइज को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें। आप अपनी श्रोणि तल को सक्रिय करने के लिए भी व्‍यायाम कर सकते हैं।

इसके लिए आप अपने पैरों को फैलाकर बैठें और अपनी भुजाओं को साइड में रखें। इस दौरान आप हिप की चौडाई बनाए रखें। इस तकनीक का उपयोग करते हुए अपनी श्रोणि तल की मांसपेशियों को अंदर की ओर खीचें और तीन तक गिनती गिने। इसके बाद अपनी पूर्वत स्थिति में आ जाएं। लेकिन इस दौरान ध्‍यान रखें की आपके पेट और नितंब की मांसपेशियां न सिकुडें।

खड़े होकर कीगल एक्‍सरसाइज करने की विधि:

बाजुओं के साथ सीधे खड़े हों, और पैर कूल्हे-चौड़ाई में अलग-अलग हो।

उपरोक्त तकनीक का उपयोग करके, तीन की गिनती के लिए पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को सक्रिय करें, और तीन की गिनती के लिए जारी करें।

सुनिश्चित करें कि पेट, नितंब और पैर की मांसपेशियां सिकुड़ नहीं रही हैं।

एक बार जब कोई व्यक्ति केगेल व्यायाम दिन में तीन बार करने में सहज होता है, तो यह उन अभ्यासों को जोड़ने में मदद कर सकता है जिसमें अधिक मूवमेंट शामिल होते हैं।

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इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए पिलेट्स व्‍यायाम – Pilates exercises for erectile dysfunction in Hindi

इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन के लिए पिलेट्स व्‍यायाम - Pilates exercises for erectile dysfunction in Hindi

जो लोग स्‍तंभन दोष से परेशान हैं उन्हें पिलेट्स व्‍यायाम करने की कोशिश करना चाहिए। यह व्‍यायाम पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के समूह को सक्रिय करता है। साथ ही यह पैल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की ताकत को भी बढ़ाता है।

घुटनों को मोड़ना – Knee fallouts

यह एक शुरुआती अभ्‍यास है जिसमें छोटे मूवमेंट शामिल हैं। अपनी पीठ के बल लेट जाएं और अपने घुटनों को मोड़ते हुए कुछ ऊपर उठाएं। इस दौरान आपकी भुजाएं बाजू में होनी चाहिए। रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। इस दौरान पहले सांस छोड़ें और फिर श्रोणि मांसपेशियों को अंदर की ओर खीचें इस दौरान धीरे-धीरे एक घुटने को श्रोणि क्षेत्र के ऊपर लाएं। फिर सांस छोड़ दें। इसके बाद फिर से सांस लें और मांसपेशियों को बाहर छोड़ते हुए अपने घुटने को पूर्वत स्‍थान पर ले आएं।

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पैरों को ऊपर उठाना – Supine foot raises

यह व्‍यायाम घुटने के फॉलआउट पर बनता है और इसमें भी छोटे-छोटे मूवमेंट होते हैं।

आप समतल क्षेत्र में पीठ के बल लेट जाएं और पैरों को सीधा रखें इस दौरान आपकी भुजाएं बाजू में होनी चाहिए। अब आप सांस छोडें और श्रोणि मांसपेशियों को अंदर खीचें। इसके बाद आप अपने पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं लगभग 1 फीट तक। इस दौरान आपका श्रोणि क्षेत्र और रीढ़ की हड्डी स्थिर होनी चाहिए। श्वांस छोडें और पैरों को वापस जमीन पर रखें।

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पेल्विक कर्ल व्‍यायाम – Pelvic curl

यह व्‍यायाम पिलट्स व्‍यायाम की तरह ही आसान है। इस व्‍यायाम को करने के लिए पहले आप पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं और अपनी भुजाओं को बाजू में रखें। इस दौरान आपकी रीढ़ की हड्डी स्थिर होनी चाहिए। अब आप अपने पैरों के घुटनों को ऊपर की ओर मोड़े। अब अपने पैर की एडियों में वजन देते हुए अपने मध्‍य भाग को ऊपर उठाएं। इस दौरान आपकी पीठ और सिर जमीन पर अच्‍छी तरह से जमे रहना चाहिए।

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व्‍यायाम करते समय याद रखने वाली बातें – Things to remember when exercising in Hindi

व्‍यायाम करते समय याद रखने वाली बातें - Things to remember when exercising in Hindi

किसी भी व्‍यायाम को करते समय पूरी सावधानी रखनी चाहिए। शुरुआत में व्‍यायाम करने के दौरान कुछ परेशानियां आ सकती हैं जो धीरे-धीरे चली जाएगीं। किसी भी व्‍यक्ति को व्‍यायाम करने के दौरान 3 से 4 बार अभ्‍यास करने के बाद वह व्‍यायाम को अच्छी तरह से करने में सक्षम हो सकता है। लेकिन व्‍यायाम करते समय इस बात का विशेष ध्‍यान रखें कि व्‍यायाम नियमित और प्रतिदिन किया जाना चाहिए। ऊपर बताए गए व्‍यायामों को प्रतिदिन 10 बार तक दोहराएं। यदि कोई व्‍यक्ति कुछ दिनों के बाद व्‍यायाम करना बंद कर देता हैं तो पैल्विक फ्लोर मांसपेशियां फिर से कमजोर होने लगती हैं। जिससे स्‍तंभन दोष या इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन फिर से वापस आ सकता है।

पेल्विक फ्लोर एक्‍सरसाइज स्तंभन दोष से राहत देने में मदद करने के साथ मूत्र असंयम को कम करने, यूरीन के बाद होने वाले रिसाव को रोकने और समग्र यौन स्वास्थ्य में सुधार करती है।

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