मानव त्वचा की संरचना – Human Skin Anatomy in Hindi

मानव त्वचा की संरचना, कार्य, स्तर, रोग, टेस्ट और इलाज - Human Skin Anatomy, Function, Layer, Diseases, Test and Treatment in Hindi
Written by Ramkumar

Human Skin Anatomy In Hindi त्वचा एक वयस्क शरीर के कुल वजन का लगभग 15% होती है। यह शरीर के आवश्यक अंगों, मांसपेशियों, ऊतकों और कंकाल प्रणाली इत्यादि की, बाहरी दुनिया से सुरक्षा करती है। अतः एक स्वास्थ्य त्वचा मनुष्यों को बैक्टीरिया, बदलते तापमान और रासायनिक जोखिम से बचाती है। सनस्क्रीन लगाने, हाइड्रेटेड रहने और अपनी डाइट में विटामिन (A, C, E and K) से भरपूर खाद्य पदार्थ को शामिल करने से त्वचा को स्वस्थ्य रखने में मदद मिलती हैं। आज के इस लेख में आप जानेगें कि त्वचा क्या है, इसकी कितनी परतें होती हैं, तथा साथ-साथ इसके कार्य, रोग, निदान और उपचार के बारे में।

1. मानव त्वचा की संरचना – Human skin anatomy in hindi
2. मानव त्वचा के कार्य – Function of skin in Hindi
3. त्वचा की परतें – Skin layers in Hindi
4. त्वचा की समस्याएं – Skin problems in Hindi
5. त्वचा रोगों की जाँच के लिए स्किन टेस्ट – Skin Tests in Hindi
6. त्वचा रोगों का इलाज – Twacha rog ka ilaj in Hindi

मानव त्वचा की संरचना – Human skin anatomy in hindi

मानव त्वचा की संरचना - Human skin anatomy in hindi

त्वचा शरीर का सबसे बड़ा बाहरी भाग है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 20 वर्ग फुट होता है। मानव त्वचा की औसत मोटाई 0.05 से 0.65 सेमी० तक होती है। त्वचा मुख्य रूप से शरीर को एक सुरक्षात्मक कवच प्रदान करती है। यह यांत्रिक प्रभाव और दबाव, तापमान में बदलाव, सूक्ष्म जीव, विकिरण और रसायन इत्यादि से शरीर की रक्षा करती है।

त्वचा को तीन परतों में विभाजित किया जाता है, जो एपिडर्मिस, डर्मिस, और चमड़े के नीचे की वसा या हाइपोडर्मिस (hypodermis) हैं। त्वचा का सबसे बाहरी स्तर, एपिडर्मिस में केराटिनोसाइट्स (keratinocytes) नामक कोशिकाओं का एक विशिष्ट समूह होता है, जो केराटिन (keratin) नामक एक सुरक्षात्मक प्रोटीन को संश्लेषित करता है। त्वचा की मध्य परत डर्मिस, मुख्य रूप से तंतुमय संरचनात्मक प्रोटीन कोलेजन (collagen) से बनी होती है। त्वचा की सबसे निचली परत हाइपोडर्मिस (hypodermis), वसा कोशिकाओं (लिपोसाइट्स) से बनी होती है। शरीर की शारीरिक रचना और भौगोलिक स्थिति के आधार पर, इन परतों की मोटाई काफी भिन्न-भिन्न होती है।

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मानव त्वचा के कार्य – Function of skin in Hindi

त्वचा शरीर का एक सुरक्षात्मक कवच होने के साथ, अनेक प्रकार के कार्यों में अपना योगदान देती हैं, जैसे:

  • त्वचा आंतरिक अंगों को सुरक्षित रखती है।
  • रोगाणुओं और विषाक्त पदार्थों से रक्षा करती है।
  • शरीर के तापमान को विनियमित करने में मदद करती है।
  • स्पर्श, गर्मी और ठंड की उत्तेजनाओं को नियंत्रित करती है।
  • त्वचा, शरीर के लिए आवश्यक विटामिन डी के संश्लेषण में भाग लेती है।
  • पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखें में मदद करती है।
  • त्वचा में तंत्रिका कोशिकाओं का एक व्यापक नेटवर्क होता है, जो पर्यावरणीय परिवर्तनों संवेदनाओं के संचरण का कार्य करता है।

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त्वचा की परतें – Skin layers in Hindi

त्वचा की परतें - Skin layers in Hindi

मानव त्वचा में परतों अर्थात स्किन लेयर की संख्या तीन होती हैं, जो कि इस प्रकार हैं:

त्वचा की ऊपरी लेयर एपिडर्मिस – Epidermis layers in Hindi

एपिडर्मिस त्वचा की सबसे बाहरी परत है, जो एक वाटरप्रूफ या जलरोधी आवरण प्रदान करती है और त्वचा को रंग प्रदान करती है। एपिडर्मिस में स्थित मेलानोसाइट्स (melanocytes) नामक विशेष कोशिकाओं द्वारा उत्पादित मेलेनिन (melanin) रंजक ही स्किन के कलर का कारण बनता है।

एपिडर्मिस को पांच सबलेयर (sublayers) में बांटा गया है:

स्ट्रेटम बेसल (Stratum basale)

यह एपिडर्मिस की सबसे निचली परत है, जिसे बेसल सेल लेयर (basal cell layer) के रूप में भी जाना जाता है। इस लेयर में स्तंभ (columnar) के आकार की बेसल कोशिकाएं होती हैं, जो विभाजित होती हैं और पुरानी कोशिकाओं को त्वचा की सतह की ओर धकेलती हैं।

स्ट्रेटम स्पिनोसम (Stratum spinosum)

इस परत को स्क्वैमस सेल लेयर (squamous cell layer) के रूप में भी जाना जाता है, जो स्ट्रेटम ग्रैनुलोसम (stratum granulosum) और स्ट्रेटम बेसल के बीच पाई जाती है। यह लेयर, एपिडर्मिस की सबसे मोटी परत है। इसमें नवीन केराटिनोसाइट्स (keratinocytes) नामक कोशिकाएं होती है, जो केराटिन प्रोटीन का गठन करती है। इस परत में लैंगरहैंस कोशिकाएं (Langerhans cells) भी पाई जाती हैं, जो संक्रमण की स्थिति को रोकने में मदद करती हैं।

स्ट्रेटम ग्रैनुलोसम (Stratum granulosum)

इस परत में त्वचा की ऊपरी सतह की ओर जाने पर, केराटिनोसाइट्स (keratinocytes) नामक कोशिकाओं की संख्या अधिक होती जाती है। यह परत जलरोधी आवरण की तरह कार्य करती है, अर्थात शरीर से तरल पदार्थ की हानि को रोकने में मदद करती है।

स्ट्रेटम ल्यूसिडम (Stratum lucidum)

स्ट्रेटम-ल्यूसिडम, एपिडर्मिस में मृत त्वचा कोशिकाओं की एक पतली और पारदर्शी या स्पष्ट परत (clear layer) होती है। यह परत केवल हाथों की हथेलियों और तलवों में पाई जाती है।

स्ट्रेटम कॉर्नियम (Stratum corneum)

स्ट्रेटम कॉर्नियम, एपिडर्मिस त्वचा की सबसे बाहरी या ऊपरी परत है, जो मृत, सपाट केराटिनोसाइट्स कोशिकाओं से मिलकर बनी होती है।

त्वचा की एपिडर्मिस परत में उत्पन्न होने वाली समस्याओं में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

  • सेबोरिक डर्मेटाइटिस (रूसी) (seborrheic dermatitis (dandruff))
  • एटॉपिक डर्मेटाइटिस (atopic dermatitis (eczema))
  • प्लाक सोरायसिस (plaque psoriasis)
  • स्किन फ्रेगिलिटी सिंड्रोम (skin fragility syndrome)
  • बालतोड़ (boils)
  • मुँहासे (acne)
  • मेलेनोमा त्वचा कैंसर (melanoma)
  • केरेटोसिस (keratosis)
  • एपिडर्मोइड सिस्ट (epidermoid cysts), इत्यादि।

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स्किन की दूसरी लेयर डर्मिस – Dermis layers in hindi

एपिडर्मिस के नीचे की परत है, जो कठोर संयोजी ऊतक की बनी होती है, इसमें बालों के रोम, लिम्फ वाहिकाएं (lymph vessels) और पसीने की ग्रंथियां मौजूद होती हैं। डर्मिस को दो भागों में बांटा गया है:

  • पैपिलरी डर्मिस (papillary dermis) – यह पतली और ऊपरी परत है।
  • रेटिकुलर डर्मिस (reticular dermis) – इसे जालीदार डर्मिस भी कहा जाता है, यह डर्मिस की निचली और मोटी परत है।
  • डर्मिस की मोटाई, शरीर के स्थान के आधार पर भिन्न होती है। पलकों पर, इसकी मोटाई 0.6 मिलीमीटर तथा पीठ, हाथों की हथेलियाँ और पैरों के तलवे पर इसकी मोटाई 3 मिलीमीटर होती है।
  • चूंकि डर्मिस में कोलेजन (collagen) और इलास्टिन (elastin) होता है, इसलिए यह परत दिखाई देने वाली त्वचा की संरचना में अपना योगदान देती है।

त्वचा की डर्मिस परत से सम्बंधित निम्न समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं:

  • डर्माटोफिब्रोमा (dermatofibroma) – पैरों पर सौम्य और हानिरहित त्वचा की गांठ
  • सिबेशियस सिस्ट (sebaceous cysts) – त्वचा पर उत्पन्न होने वाले सिस्ट या कैंसर रहित गांठ, जिसमें सीबम (sebum) होता है।
  • डर्मोइड सिस्ट (dermoid cysts) (बाल या दांत वाले सिस्ट)
  • सेल्युलाइटिस (cellulitis)
  • झुर्रियाँ (wrinkles), इत्यादि।

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त्वचा की तीसरी लेयर हाइपोडर्मिस – hypodermis layers in hindi

हाइपोडर्मिस सबसे निचली स्किन लेयर्स है, जिसे चमड़े के नीचे की वसा (subcutaneous fat) या हाइपोडर्मिस लेयर (hypodermis layer) के नाम से भी जाना जाता है। यह वसा और संयोजी ऊतकों से बनी होती है, जिसमें रक्त वाहिकाएं और तंत्रिकाएं अधिक मात्रा में उपस्थित होती हैं। यह परत इन्सुलेटर के रूप में शरीर के तापमान को विनियमित करने में मदद करती है।

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त्वचा की समस्याएं – Skin problems in Hindi

त्वचा की समस्याएं - Skin problems in Hindi

त्वचा रोग और समस्याएँ, लक्षणों और रोग की गंभीरता के आधार पर भिन्न-भिन्न होने हैं। यह समस्याएँ अस्थायी या स्थायी हो सकती हैं। त्वचा विकार में निम्न को शामिल किया जाता है:

चकत्ते या रैशेज – Rash in Hindi

त्वचा की बनावट में किसी भी प्रकार का परिवर्तन चकत्ते या रैशेज कहलाता है। अधिकांश चकत्ते साधारणतः त्वचा की जलन या खुजली का कारण बनते हैं। (और पढ़े – शिशु को डायपर रैशेज से बचाने के लिए घरेलू उपाय…)

डर्माटाइटिस – Dermatitis in Hindi

डर्माटाइटिस - Dermatitis in Hindi

डर्माटाइटिस को सामान्यतः त्वचा की सूजन के रूप में जाना जाता है। एटोपिक डर्माटाइटिस, एक्जिमा का एक सबसे आम रूप है।

(और पढ़े – सूजन के कारण, लक्षण और कम करने के घरेलू उपाय…)

एक्जिमा – Eczema in Hindi

एक्जिमा – Eczema in Hindi

एक्जिमा नामक स्थिति, डर्माटाइटिस (त्वचा की सूजन) के कारण त्वचा पर खुजली वाले चकत्ते (itchy rash) से सम्बंधित है। यह समस्या अधिकतर, एक अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण उत्पन्न होती है।

(और पढ़े – एक्जिमा क्या है, कारण, लक्षण, बचाव और घरेलू उपचार…)

सोरायसिस – Psoriasis in Hindi

सोरायसिस - Psoriasis in Hindi

यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है, अर्थात इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वास्थ्य ऊतकों पर हमला करती है, और त्वचा पर लाल चकत्ते के उत्पन्न होने का कारण बन सकती है। सोरायसिस की स्थिति में त्वचा पर सूजन, खुजली और जलन के साथ-साथ रूखी और पपड़ी जैसी मृत त्वचा इत्यादि लक्षण देखे जा सकते हैं।

(और पढ़े – सोरायसिस कारण लक्षण और निदान…)

रूसी – Dandruff in Hindi

रूसी - Dandruff in Hindi

यह सिर (खोपड़ी) की त्वचा से संबंधिति समस्या है, जिसका कारण सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस (seborrheic dermatitis), सोरायसिस या एक्जिमा जैसी स्थितियां हो सकती है।

(और पढ़े – वेट डैंड्रफ क्या है, इसके कारण और इलाज…)

मुँहासे – Acne in Hindi

मुँहासे - Acne in Hindi

यह त्वचा से सम्बंधित सबसे सामान्य स्थिति है। मुँहासे किसी भी उम्र में, 85% से अधिक व्यक्तियों को प्रभावित करते हैं।

(और पढ़े – मुँहासों को दूर करने के घरेलू उपाय…)

सेल्युलाइटिस – Cellulitis in Hindi

सेल्युलाइटिस, त्वचा की डर्मिस लेयर और चमड़े के नीचे के ऊतकों (हाइपोडर्मिस लेयर) की सूजन से सम्बंधित स्थिति है, जिसका कारण गंभीर बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण बनता है। इस रोग के परिणामस्वरुप त्वचा पर लाल, दर्दनाक चकत्ते उत्पन्न हो सकते हैं।

स्किन एब्सेस – Skin abscess in Hindi

स्किन एब्सेस - Skin abscess in Hindi

स्किन एब्सेस, त्वचा पर फोड़ा या फुंसी (Skin abscess) की स्थिति है, जो त्वचा संक्रमण के कारण उत्पन्न होती है, जिसमें त्वचा के नीचे मवाद का एक संग्रह होता है।

(और पढ़े – फोड़े फुंसी का घरेलू उपचार, उपाय और नुस्खे…)

रोजेशिया – Rosacea in Hindi

यह त्वचा से सम्बंधित एक ऐसी स्थिति है, जो चेहरे पर लालिमा और दृश्यमान रक्त वाहिकाओं का कारण बनती है। रोसैसिया (Rosacea) की स्थिति में चेहरे पर लालिमा और अक्सर छोटे, लाल, मवाद से भरे छाले या मुँहासे भी उत्पन्न हो सकते हैं।

मस्सा – Warts in Hindi

मस्सा - Warts in Hindi

जब ह्यूमन पैपिलोमावायरस के कारण त्वचा या श्लेष्म झिल्ली पर मांस में एक छोटा या अतिरिक्त उभार उत्पन्न होता है, तो इस स्थिति को मस्सा कहा जाता है। यह शरीर एक किसी भी स्थान पर हो सकते हैं।

(और पढ़े – जननांग मस्सों (जेनिटल वार्ट्स) के कारण, लक्षण, उपचार और घरेलू इलाज…)

मेलेनोमा – Melanoma in Hindi

मेलेनोमा, त्वचा कैंसर का सबसे खतरनाक प्रकार है, जो त्‍वचा के रंग का निर्माण करने वाली मेलानोसाइट्स (melanocytes) कोशिकाओं में होता है। यह शरीर के किसी भी क्षेत्र में विकसित हो सकता है लेकिन विशेष रूप से सूर्य के संपर्क में रहने वाली त्वचा को अधिक प्रभावित करता है। (और पढ़े –

बेसल सेल कार्सिनोमा – Basal cell carcinoma in Hindi

यह त्वचा कैंसर का सबसे आम प्रकार है जो बेसल कोशिकाओं से प्रारंभ होता है। बेसल कोशिकाएं (Basal cells) नवीन त्वचा कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करती हैं। बेसल सेल कार्सिनोमा, मेलेनोमा की तुलना में कम खतरनाक होता है। (और पढ़े – महिलाओं में कैंसर के लक्षण…)

सेबोरिक केरेटोसिस – Seborrheic keratosis in Hindi

सेबोरिक केरेटोसिस एक सौम्य, कैंसरमुक्त (non-cancerous) त्वचा का ट्यूमर है, जो त्वचा की बाहरी परत की कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। यह खुजली का कारण बन सकता है।

स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा – Squamous cell carcinoma in Hindi

यह स्किन कैंसर का एक सामान्य रूप, जो स्क्वैमस कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास का कारण बनता हैl स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा एक अल्सर के रूप में विकसित हो सकता है। यह आमतौर पर सूर्य के संपर्क में आने वाली त्वचा की एपिडर्मिस लेयर में विकसित होता है। (और पढ़े – सूरज की धूप लेने के फायदे और नुकसान…)

हर्पीज़ – Herpes in hindi

हर्पीज़ - Herpes in hindi

इस रोग की स्थिति में हर्पीज़ वायरस (HSV-1 and HSV-2) के कारण पीड़ित व्यक्ति की त्वचा, अधिकांशतः होंठ या जननांगों के आसपास की त्वचा पर तरल से भरे छोटे-छोटे फफोले उत्पन्न होते हैं जो जलन पैदा कर सकते हैं।

(और पढ़े – हर्पीस के कारण, लक्षण, दवा और उपचार…)

हीव्स (शीतपित्त) – Hives in hindi

हीव्स (शीतपित्त) – Hives in hindi

इस त्वचा रोग की स्थति में त्वचा पर लाल, खुजलीदार, उभरे हुऐ धब्बे (चकत्ते) अचानक उत्पन्न होते है। शीतपित्त या पित्ती की समस्या आमतौर पर एलर्जी के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है।

(और पढ़े – शीतपित्त यानि अर्टिकेरिया: कारण, लक्षण, जांच और बचाव…)

टिनिया वर्सिकलर (सेहुँआ) – Tinea versicolor in hindi

टिनिया वर्सिकलर को सेहुँआ के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का सामान्य स्किन फंगल इन्फेक्शन है। यह संक्रमण त्वचा की कम रंजकता वाले धब्बों या त्वचा पर सफ़ेद रंग के छोटे-छोटे चकत्तों के उत्पन्न होने का कारण बनता है। (और पढ़े – सफेद दाग (विटिलिगो) क्या है कारण, लक्षण, इलाज और रोकथाम…)

वायरल एक्सान्थेम – Viral exanthem in hindi

वायरल संक्रमण के कारण त्वचा के बड़े क्षेत्र को प्रभावित करने वाले लाल चकत्ते (स्किन रैश) से सम्बंधित समस्या को वायरल एक्सान्थेम (Viral exanthema) कहा जाता है। यह समस्या विशेष रूप से बच्चों को अधिक प्रभावित करती है।

शिंगल्स (हर्पीज जोस्टर) – Shingles (herpes zoster) in hindi

शिंगल्स (हर्पीज जोस्टर) - Shingles (herpes zoster) in hindi

शिंगल्स (हर्पीज जोस्टर) की स्थिति में, चेचक वायरस (chickenpox virus) के कारण, शरीर के एक तरफ दर्दनाक चकत्ते या दाने उत्पन्न होते हैं। इस स्थिति में पीड़ादायक खुजली का अनुभव होता है।

(और पढ़े – छोटी माता या चिकन पॉक्स के घरेलू उपाय…)

खाज (स्कैबीज) – Scabies in Hindi

खाज (स्कैबीज) - Scabies in Hindi

उंगलियों, कलाई, कोहनी और नितंबों की त्वचा पर एक तीव्र खुजली वाले दाने व चकत्ते उत्पन्न होने की स्थिति को खाज (स्कैबीज) के नाम से जाना जाता है। यह स्थिति काफी संक्रामक है, जो जलन व तीव्र खुजली का कारण बनती है। स्केबीज रोग, सरकोप्टस स्कैबी नामक घुन (mite) के कारण होता है।

(और पढ़े – खाज (स्कैबीज़) दूर करने के घरेलू उपाय…)

दाद – Ringworm in hindi

दाद – Ringworm in hindi

यह एक प्रकार त्वचा संक्रमण है जो कवक के कारण होता है, इसे टीनिया के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार की स्किन समस्या में रिंग के सामान खुजली वाले दाग उत्पन्न होते हैं।

(और पढ़े – दाद ठीक करने के असरदार घरेलू उपाय…)

त्वचा रोगों की जाँच के लिए स्किन टेस्ट – Skin Tests in Hindi

त्वचा रोगों की जाँच के लिए स्किन टेस्ट - Skin Tests in Hindi

स्किन डिसऑर्डर या स्किन डिजीज जैसी समस्याओं की जाँच करने के लिए डॉक्टर निम्न परीक्षणों का उपयोग कर सकते हैं, जो कि निम्न हैं:

त्वचा की बायोप्सी (Skin biopsy) – त्वचा की समस्याओं का निदान करने के लिए स्किन बायोप्सी की सिफारिश की जा सकती है। इस परीक्षण के दौरान प्रभावित त्वचा से एक छोटे से ऊतक को निकालकर, माइक्रोस्कोप की मदद से जांच की जाती है।

त्वचा परीक्षण (एलर्जी परीक्षण) (Skin testing) – एलर्जी से सम्बंधित स्किन समस्याओं का निदान करने के लिए कुछ सामान्य पदार्थों (जैसे पराग) के रस को त्वचा पर लगाया जाता है, और किसी भी प्रकार की एलर्जी प्रतिक्रियाओं का निरीक्षण किया जाता है।

तपेदिक त्वचा परीक्षण (Tuberculosis skin test) टीबी स्किन टेस्ट को मैनटॉक्स ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट (Mantoux tuberculin skin test) (TST) भी कहा जाता है। इस टेस्ट के दौरान तपेदिक (टीबी) का कारण बनने वाले बैक्टीरिया से बनाये गए प्रोटीन (ट्यूबरकुलीन) पीड़ित व्यक्ति की त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रोटीन के कारण टीबी से पीड़ित व्यक्ति की त्वचा सख्त हो जाती है।

(और पढ़े – बायोप्सी कराने का उद्देश्य, तरीका, फायदे और नुकसान…)

त्वचा रोगों का इलाज – Twacha rog ka ilaj in Hindi

त्वचा रोगों का इलाज - Twacha rog ka ilaj in Hindi

स्किन रोग या त्वचा समस्याओं के उपचार, रोग के प्रकार और इसकी गंभीरता के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids (steroids)) यह दवा प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि को कम कर त्वचाशोथ या डर्मेटाइटिस (dermatitis) की स्थिति में सुधार कर सकती हैं। अतः इस प्रकार की स्किन समस्याओं में सामयिक स्टेरॉयड (Topical steroids) का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।

एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) – एंटीबायोटिक्स दवाओं का उपयोग सेलुलाइटिस (cellulitis) और अन्य त्वचा संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए किया जाता हैं।

एंटीवायरल ड्रग्स (Antiviral drugs) – इस प्रकार की दवाओं का उपयोग वायरस (herpes virus) के प्रभाव को कम करने और त्वचा सम्बन्धी लक्षणों को कम करने के लिए जा सकता है।

ऐंटिफंगल ड्रग्स (Antifungal drugs) – अधिकांशतः फंगल स्किन इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए ऐंटिफंगल ड्रग्स या सामयिक क्रीम (Topical creams) का उपयोग किया जा सकता है।

एंटीहिस्टामिन (Antihistamines) – इस प्रकार की मौखिक या सामयिक दवाएं शरीर में हिस्टामाइन (histamine) के प्रभाव को कम कर सकती हैं। हिस्टामाइन एक कार्बनिक नाइट्रोजनयुक्त यौगिक है, जो खुजली और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं का कारण बनता है।

त्वचा की सर्जरी (Skin surgery)ज्यादातर त्वचा के कैंसर का इलाज करने के लिए सर्जरी की सिफारिश की जा सकती है।

इम्यून मॉड्यूलेटर (Immune modulators) – इम्यून मॉड्यूलेटर के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दवाएं, प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्यों में सुधार कर सकती हैं, जिसके कारण इसका उपयोग अधिकांशतः सोरायसिस (psoriasis) या जिल्द की सूजन (dermatitis) की स्थिति में किया जा सकता है।

स्किन मॉइस्चराइज़र (Skin moisturizers (emollients)) शुष्क त्वचा, जलन और खुजली जैसी स्थितियों को उत्पन्न कर सकती है। अतः स्किन मॉइस्चराइज़र का उपयोग कर त्वचा समस्याओं से सम्बंधित लक्षणों को कम किया जा सकता है।

(और पढ़े – मॉइस्चराइजर क्या होता है, लगाने का तरीका, विधि और फायदे…)

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