चिकनपॉक्स (छोटी माता) के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज – Chickenpox Causes Symptoms And Treatment in Hindi

चिकनपॉक्स (छोटी माता) के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज - Chickenpox causes symptoms and prevention and treatment in Hindi
Written by Anamika

chickenpox in hindi चिकनपॉक्स जिसे छोटी माता भी कहा जाता है एक वायरल बीमारी है जिसमें पूरे शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और उसमें खुजली एवं जलन होती है। चिकन पॉक्स को वैरिसेला (varicella) भी कहते हैं। यह बीमारी ज्यादातर बच्चों में होने वाली एक सामान्य संक्रामक बीमारी है। लेकिन इस बीमारी की चपेट में आने से बैक्टीरियल निमोनिया जैसी खतरनाक बीमारी होने का खतरा भी बना रहता है। इस आर्टिकल में हम आपको चिकनपॉक्स होने के कारण (What causes chickenpox in Hindi), चिकनपॉक्स के लक्षण (symptoms of chickenpox in Hindi), चिकनपॉक्स से बचाव (prevention of chickenpox  in Hindi), चिकनपॉक्स का इलाज (chickenpox treatments in Hindi) के विषय में बताएंगे।

जो व्यक्ति एक बार चिकन पॉक्स से ग्रसित हो चुके होते हैं उन्हें जीवन में दोबारा चिकनपॉक्स होने की संभावना कम होती है। हालांकि चिकनपॉक्स का वायरस शरीर में निष्क्रिय रूप में रहता है जो जीवन में यह वायरस कभी-कभी सक्रिय भी हो जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को दाद या चर्मरोग हो जाता है। वर्ष 1990 से देश में चिकनपॉक्स की वैक्सीन लोगों को इस इंफेक्शन से बचने के लिए दी जाती है।

1. चिकनपॉक्स होने के कारण – chickenpox causes in Hindi
2. चिकनपॉक्स लक्षण – chickenpox symptoms in Hindi
3. चिकनपॉक्स होने से बचाव – chickenpox Prevention in Hindi
4. चिकनपॉक्स इलाज -chickenpox Treatments in Hindi

चिकनपॉक्स होने के कारण – What Causes Chickenpox in Hindi

छोटी माता या चिकनपॉक्स का इंफेक्शन वैरीसेला-जोस्टर वायरस (VZV) के कारण होता है। यह बीमारी छींकने से, कफ के माध्यम से, लार से, बीमार व्यक्ति के बिस्तर, कपड़े का इस्तेमाल करने या इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलती है। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 21 दिनों के बाद इस बीमारी के लक्षण व्यक्ति के शरीर में दिखने लगते हैं। शरीर पर चकत्ते आने के एक या दो दिन पहले से ही यह बीमारी सबसे ज्यादा संक्रामक होती है और जब तक चकत्ते पूरी तरह से सूखकर ठीक नहीं हो जाते, तब तक इस बीमारी के वायरस का इंफेक्शन फैलने का खतरा बना रहता है।

(और पढ़ें – छोटी माता या चिकन पॉक्स के घरेलू उपाय)

चिकनपॉक्स के लक्षण – Chickenpox Symptoms in Hindi

यदि इस बीमारी के लक्षणों की बात की जाए तो चिकनपॉक्स आमतौर पर गर्दन, चेहरे और पीठ पर होता है। शरीर के विभिन्न हिस्सों पर लाल चकत्ते दिखना इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। इस बीमारी में करीब सात से 10 दिन तक बॉडी पर लाल दाने और चकत्ते बने रहते हैं और उसमें द्रव या पानी भरा रहता है जो देखने में छाले की तरह लगता है। ये लाल दाने मुंह, सिर की त्वचा, आंखों और जननांगों के आसपास के क्षेत्र में अगर होते हैं तो अधिक पीड़ादायक होते हैं।

इसे पूरी तरह से ठीक होने में समय लगता है क्योंकि पुराने दाने ठीक होते हैं तो नए उभर आते हैं, यह चक्र करीब दो हफ्तों तक चलता रहता है। यह बीमारी पूरी तरह से संक्रामक होती है और जब तक शरीर के पूरे दाने ठीक न हो जाएं, इसके वायरस दूसरे व्यक्ति के शरीर में भी फैलने का खतरा रहता है।

चिकनपॉक्स के लक्षण में शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना चिकनपॉक्स का सामान्य लक्षण है। यह इंफेक्शन शरीर पर चकत्ते आने के सात से 21 दिन पहले ही शरीर में हो जाता है और आपके शरीर पर लाल चकत्ते और दाने उभरने के 48 घंटे पहले ही आपके शरीर से इसका संक्रमण दूसरे व्यक्ति में फैलने लगता है।

शरीर पर चकत्ते आने से पहले आपको

  • बुखार आता है
  • सिर दर्द होता है
  • कम भूख लगती है

चिकनपॉक्स के संक्रमण से जब चकत्ते निकलने शुरू हो जाते हैं तो शरीर पर ये लक्षण दिखते हैं

  • पूरे शरीर पर लाल या गुलाबी रंग के दाने या चकत्ते उभर आते हैं।
  • इन चकत्तों या बड़े दानों में पानी या तरल पदार्थ भर जाता है।
  • धीरे धीरे ये चकत्ते चिपटे होने लगते हैं और फिर सूखने लगते हैं।

चिकनपॉक्स की बीमारी में शरीर पर पड़ने वाले चकत्ते पूरे शरीर पर एक जैसे नहीं होते हैं। संक्रमण के कारण नए चकत्ते लगातार उभरते रहते हैं और इनमें खुजली और जलन महसूस होती है।

(और पढ़े – सिर दर्द दूर करने के घरेलू उपाय)

चिकनपॉक्स से बचाव – Prevention Of Chickenpox in Hindi

चिकन पॉक्स के वैक्सीन से 98 प्रतिशत लोग चिकनपॉक्स की चपेट में आने से बच जाते हैं। चिकनपॉक्स से बचाव के लिए वैक्सीन की दो खुराक लेने से इस बीमारी से पूरी तरह से बचा जा सकता है।

बारह से पंद्रह वर्ष के बच्चों में चिकनपॉक्स का वायरस तेजी से फैलता है इसलिए चिकनपॉक्स से बचाव के लिए अपने बच्चों को चार से छह वर्ष की उम्र में ही चिकनपॉक्स का वैक्सीन दिलवाना चाहिए।

चिकन पॉक्स वयस्कों में भी तेजी से फैलता है इसलिए उन्हें भी चिकनपॉक्स के वायरस से बचने के लिए टीका लगवाना चाहिए।

जो लोग किसी वजह से टीके नहीं लगवा पाते हैं उन्हें चिकनपॉक्स से पीड़ित व्यक्तियों से बहुत दूर रहना चाहिए, अन्यथा वे भी इस बीमारी से ग्रसित हो सकते हैं।

चिकनपॉक्स का इलाज – Treatments Of Chickenpox in Hindi

चिकन पॉक्स एक संक्रामक बीमारी है इसलिए यदि आपका बच्चा इस संक्रमण के चपेट में आ जाए तो उसे घर से बाहर ना निकलने दें। वयस्कों को भी यदि यह संक्रमण हो जाए तो उन्हें घर में ही रहना चाहिए। चिकनपॉक्स के ज्यादातर मामलों में इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है, या यूं कहें कि बहुत ही कम इलाज की जरूरत होती है या सिर्फ चिकनपॉक्स के लक्षणों को दूर  करने के लिए इलाज किया जाता है।

  • चिकनपॉक्स का इलाज के लिए डॉक्टर आमतौर पर एंटी हिस्टामिन दवाएं या मलहम लगाने की सलाह देते हैं। ये दवाएं या मलहम चकत्तों की खुजली को दूर करने में मदद करते हैं इससे शरीर को राहत पहुंचती है। इसके अलावा आप खुजली को दूर करने के लिए
  • गुनगुने पानी से स्नान कर सकते हैं।
  • शरीर पर कोई अच्छा लोशन लगा सकते हैं।
  • सूती और हल्के रंग के वस्त्र पहन सकते हैं।

यदि चिकनपॉक्स ज्यादा गंभीर रूप ले लेता है या इसका कोई विपरीत प्रभाव पड़ने लगता है तो इस स्थिति में डॉक्टर एंटीवायरल दवाएं देते हैं। एंटीवायरल दवाएं चिकनपॉक्स को ठीक नहीं करती हैं बल्कि सिर्फ उसके लक्षणों को कम कर देती हैं। जिससे की शरीर का इम्यून सिस्टम धीरे-धीरे सुधरने लगता है।

(और पढ़ें – छोटी माता (चिकनपॉक्स) का आयुर्वेदिक उपचार)

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