फेफड़ों में इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection Symptoms, Causes, Treatment and Prevention in Hindi
बीमारी

फेफड़ों में इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव – Lungs infection Symptoms, Causes, Treatment and Prevention in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection Symptoms, Causes, Treatment and Prevention in Hindi

वर्तमान में फेफड़ों के संक्रमण से सम्बंधित अधिक मामले देखने को मिलते हैं, और यह रोग मृत्यु का कारण भी बनते हैं। फेफड़े के संक्रमण की स्थिति में सूजन, संक्रीण वायुमार्ग, क्षतिग्रस्त वायुकोष इत्यादि समस्याएं उत्पन्न होती हैं। फेफड़ों के संक्रमण की बीमारी एक वायरस, कवक या बैक्टीरिया के कारण उत्पन्न होती है। सबसे आम फेफड़ों में संक्रमण के रूप में इन्फ्लूएंजा (फ्लू), तपेदिक (टीबी), ब्रोंकाइटिस और निमोनिया शामिल हैं। फेफड़ों में इन्फेक्शन की स्थिति में व्यक्ति अनेक प्रकार के लक्षणों को महसूस करता है। यह लक्षण सर्दी या फ्लू के समान अधिक सामान्य होने के साथ-साथ अधिक गंभीर तक हो सकते हैं और लंबे समय तक रहते हैं। अतः व्यक्ति को समय पर इसके लक्षणों की पहचान कर इलाज प्राप्त करना आवश्यक होता है। आज के इस लेख में आप फेफड़ों में इन्फेक्शन का कारण, लक्षण, जांच, इलाज, बचाव और घरेलू उपचार के बारे में जानेगें।

फेफड़ों में इन्फेक्शन क्या है – What is Lungs infection in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (फेफड़ों के संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection, Symptoms, Causes Diagnosis Treatment and Prevention in Hindi

वायरस, बैक्टीरिया और कभी-कभी एक कवक (fungus) के कारण फेफड़ों के प्रभावित होने की स्थिति फेफड़ों का संक्रमण कहलाती है। जब यह सूक्ष्मजीव किसी व्यक्ति के फेफड़ों में इकट्ठा होते हैं, तो फेफड़ों में वायुकोष (air sacs) मवाद और तरल से भर जाती है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा छींकने या खांसने के दौरान बैक्टीरिया या वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो सकते हैं, और फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। फेफड़ों के संक्रमण का सबसे सामान्य प्रकार निमोनिया है।

फेफड़ों में इन्फेक्शन से सम्बंधित रोग के नाम निम्न हैं:

  • ब्रोंकाइटिस (Bronchitis)
  • निमोनिया (pneumonia)
  • इन्फ्लूएंजा (फ्लू) (Influenza)
  • तपेदिक (टीबी) (Tuberculosis)
  • श्वसन संकट सिंड्रोम (Respiratory distress syndrome)
  • ब्रोंकियोलाइटिस (bronchiolitis)
  • ब्रोन्किइक्टेसिस (Bronchiectasis) – एक ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़ों के वायुमार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

(और पढ़ें: फेफड़ों का कैंसर कारण, लक्षण, इलाज और रोकथाम)

फेफड़ों के संक्रमण रोग – Lungs infection diseases in Hindi

फेफड़ों के संक्रमण की बीमारी में मुख्य रूप से निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

इन्फ्लुएंजा – Influenza in Hindi

फ्लू (इन्फ्लुएंजा) नामक फेफड़ों का संक्रमण रोग, इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह एक सामान्य मौसमी श्वसन संक्रमण (seasonal respiratory infection) है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। बुजुर्गों, नवजात शिशुओं और पुरानी चिकित्सा स्थितियों वाले लोगों को विशेष रूप से फ्लू होने का खतरा अधिक होता है। इन्फ्लुएंजा नामक फेफड़ों का संक्रमण, गंभीर और जीवन के लिए घातक हो सकता है।

इन्फ्लुएंजा के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

तपेदिक – Tuberculosis in Hindi

तपेदिक को आमतौर पर क्षय रोग या टीबी के रूप में जाना जाता है, एक अत्यधिक संक्रामक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। अगर टीबी या तपेदिक का सही तरीके से इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकती है। यह फेफड़ों का संक्रमण रोग  शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है। तपेदिक की स्थिति निम्न लक्षणों के उत्पन्न होने का कारण बन सकती है, जैसे:

  • गंभीर खांसी की समस्या, जो तीन सप्ताह से अधिक समय तक रहती है
  • खांसी के दौरान खून या बलगम आना
  • सीने में दर्द

टीबी से सम्बंधित अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

निमोनिया – pneumonia in Hindi

निमोनिया, जो फेफड़ों के छोटे वायुकोष (air sacs) (एल्वियोली (alveoli)) को प्रभावित करता है, यह फेफड़ों का संक्रमण अक्सर बैक्टीरिया के कारण होता है, लेकिन एक वायरस के कारण भी हो सकता है। निमोनिया का आमतौर पर इलाज संभव है, लेकिन यह संक्रमण बुजुर्गों में घातक हो सकता है। निमोनिया के लक्षणों में निम्न को शामिल किया जा सकता है:

ब्रोंकाइटिस Bronchitis in Hindi

जब बड़ी ब्रोन्कियल नलिकाएं (bronchial tubes), जो फेफड़ों से हवा को बाहर ले जाती हैं, संक्रमित हो जाती हैं और उनके अस्तर में सूजन आ जाती है, तो इस स्थिति को ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) कहा जाता है। बैक्टीरिया की अपेक्षा वायरस के कारण ब्रोंकाइटिस नामक फेफड़ों का संक्रमण होने की अधिक संभावना होती है। ब्रोंकाइटिस दो प्रकार का होता है-

  • एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis),
  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis)।

वायरस, फेफड़ों या फेफड़ों तक जाने वाले वायु मार्ग पर भी हमला कर सकते हैं, और व्यक्ति को बीमार बना सकते हैं। इस रोग को ब्रोंकियोलाइटिस (bronchiolitis) कहा जाता है। वायरल ब्रोंकियोलाइटिस (Viral bronchiolitis) सबसे अधिक बच्चों और शिशुओं को प्रभावित करता है।

फेफड़ों के संक्रमण के लक्षण – Lung infection symptoms in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (फेफड़ों के संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection, Symptoms, Causes Diagnosis Treatment and Prevention in Hindi

फेफड़ों के संक्रमण से सम्बंधित लक्षण हल्के से अधिक गंभीर तक हो सकते हैं, जो कि संक्रमण रोग के प्रकार पर निर्भर करते हैं। लक्षणों की गंभीरता पीड़ित व्यक्ति की उम्र और समग्र स्वास्थ्य सहित अनेक कारकों पर निर्भर करती है। फेफड़ों में इन्फेक्शन से सम्बंधित लक्षण सर्दी या फ्लू की बीमारी के समान हो सकते हैं, लेकिन यह लंबे समय बने रहते हैं।

यदि किसी व्यक्ति को फेफड़ों का संक्रमण है, तो वह निम्न लक्षणों को प्राप्त कर सकता है, जिनमें शामिल हैं:

  • बलगम युक्त खांसी आना
  • बलगम के साथ खून आना
  • छाती (सीने) में दर्द होना
  • दर्द, जिसे ऊपरी पीठ तक महसूस किया जा सकता है।
  • शरीर और मांसपेशियों में दर्द
  • मांसपेशियों में सूजन
  • नाक बहना (Runny nose)
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • थकान महसूस होना
  • घरघराहट होना
  • त्वचा या होंठ का नीला पड़ जाना (ऑक्सीजन की कमी के कारण)
  • बुखार आना, बैक्टीरियल लंग इन्फेक्शन (bacterial lung infection) की स्थिति में बुखार 105 °F (40.5 °C) तक बढ़ सकता है।
  • बुखार के साथ-साथ निम्न लक्षणों को भी महसूस किया जा सकता है, जैसे- पसीना आना, ठंड लगना, मांसपेशियों के दर्द, निर्जलीकरण, सिरदर्द, कमजोरी महसूस होना, इत्यादि।

(और पढ़ें: साइनस इन्फेक्शन क्या है, लक्षण, कारण, इलाज और घरेलू उपाय)

फेफड़ों में संक्रमण का कारण – Lung Infection causes in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (फेफड़ों के संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection, Symptoms, Causes Diagnosis Treatment and Prevention in Hindi

फेफड़ों के इन्फेक्शन का मुख्य कारण आमतौर पर वायरस, बैक्टीरिया या फंगल हो सकते हैं। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की स्थिति से पीड़ित व्यक्ति भी फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं।

ब्रोंकाइटिस नामक फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनने वाले सूक्ष्मजीवों में निम्न शामिल हो सकते हैं, जैसे:

  • वायरस जैसे- इन्फ्लूएंजा वायरस या रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस (respiratory syncytial virus (RSV))
  • बैक्टीरिया जैसे- माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma pneumoniae), क्लैमाइडिया निमोनिया (Chlamydia pneumoniae) और बोर्डेटेला पर्टुसिस (Bordetella pertussis)

निमोनिया के लिए जिम्मेदार सबसे आम सूक्ष्मजीवों में शामिल हैं:

  • बैक्टीरिया जैसे- स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया (सबसे आम), हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और माइकोप्लाज्म न्यूमोनिया
  • वायरस जैसे- इन्फ्लूएंजा वायरस

फेफड़े में संक्रमण की स्थिति शायद ही कभी कवक (fungi) जैसे कि न्यूमोसिस्टिस जिरोवेसी (Pneumocystis jirovecii), एस्परगिलस (Aspergillus) या हिस्टोप्लाज्मा कैप्सुलटम (Histoplasma capsulatum) के कारण उत्पन्न हो सकती है।

एक फंगल लंग इन्फेक्शन (fungal lung infection) उन लोगों में अधिक होता है जो कुछ प्रकार के कैंसर या एचआईवी से या इम्यूनोसप्रेस्सिव (immunosuppressive) दवाएँ लेने से प्रतिरक्षादमन (immunosuppressed) होते हैं।

(और पढ़ें: फंगल इन्फेक्शन क्या है, कारण, लक्षण, इलाज और घरेलू उपचार )

फेफड़ों में इन्फेक्शन के जोखिम कारक – Lungs infection risk factor in Hindi

बच्चों और वृद्ध वयस्कों को फेफड़ों में संक्रमण होने का ख़तरा अधिक होता है। इसके अधिक निम्न स्थितियां भी फेफड़ों में संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • धूम्रपान करना
  • ख़राब स्वच्छता
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली होना
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीस (chronic obstructive)) pulmonary disease (COPD से ग्रस्त होना।

लंग इन्फेक्शन के लिए डॉक्टर को कब दिखाएं – When to see doctor for Lungs Infection in Hindi

यदि उपचार न किया जाए तो, फेफड़े में संक्रमण की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है और अनेक गंभीर समस्याओं को उत्पन्न कर सकती है। सामान्य तौर पर, निम्न लक्षणों के प्रगट होने पर पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जैसे:

  • 3 महीने से छोटे शिशुओं को 100.4 °F (38 °C) से अधिक बुखार होने पर।
  • 3 और 24 महीनों के बीच के शिशुओं को 102 °F (9 °C) से ऊपर बुखार होने पर।
  • बच्चों में चिड़चिड़ापन, सुस्ती या असहज व्यवहार महसूस होने पर।
  • वयस्कों में तीन दिनों से अधिक समय तक बुखार रहने पर।
  • मानसिक भ्रम, साँस लेने में कठिनाई की स्थिति उत्पन्न होने पर।
  • गर्दन में अकड़न, छाती में दर्द, बुरे स्वप्न की समस्या उत्पन्न होने पर।

फेफड़ों के संक्रमण की जांच – Lung Infection diagnosis in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (फेफड़ों के संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection, Symptoms, Causes Diagnosis Treatment and Prevention in Hindi

एक डॉक्टर फेफड़े में इन्फेक्शन की समस्या का निदान करने के लिए पहले मरीज के चिकित्सकीय इतिहास के बारे में जानकारी लेगा और लक्षणों से सम्बंधित कुछ प्रश्न पूछेगा।

फेफड़ों के संक्रमण की जाँच करने के लिए डॉक्टर निम्न परीक्षणों की सहायता ले सकता है, जैसे:

  • इमेजिंग परीक्षण, जैसे कि छाती का एक्स-रे (X-ray) या सीटी स्कैन (CT scan)
  • स्पिरोमेट्री (spirometry) परीक्षण – एक उपकरण जो सांस की मात्रा और सांस लेने की तीव्रता को मापता है।
  • पल्स ऑक्सीमेट्री (pulse oximetry) – रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को मापने के लिए ऑक्सीमीटर का उपयोग किया जाता है।
  • बलगम या लार परीक्षण (mucus or sputum test)
  • थ्रोट स्वैब (throat swab) टेस्ट
  • पूर्ण रक्त गणना (CBC) परीक्षण
  • ब्लड कल्चर टेस्ट (Blood Culture Test), इत्यादि।

ब्रोंकोस्कोपी (Bronchoscopy) – ब्रोंकोस्कोपी, फेफड़ों तक जाने वाली नलियों का एक दृश्य परीक्षण है। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर ऊतक, तरल या बलगम के नमूने को भी प्राप्त कर सकता है।

आर्टेरिअल ब्लड गैस टेस्ट (arterial blood gases test) – यह परीक्षण धमनी (artery) से प्राप्त रक्त के नमूने में ऑक्सीजन के स्तर को मापता है। डॉक्टर इस परीक्षण का उपयोग कर यह पता लगाता है कि फेफड़ों से रक्तप्रवाह में पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रही है या नहीं।

(और पढ़ें: फेफड़े के रोग, कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव)

फेफड़ों में इन्फेक्शन का इलाज – Lungs Infection treatment in Hindi

अधिक गंभीर फेफड़ों के संक्रमण की स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती रहने की सिफारिश की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति सांस लेने में कठिनाई का अनुभव करता है, तो उसे अंतःशिरा तरल पदार्थ और श्वसन चिकित्सा (respiratory therapy) या ऑक्सीजन थेरेपी प्रदान की जा सकती है। इसके अतिरिक्त फेफड़ों में संक्रमण की कारणों के आधार पर निम्न उपचार की सिफारिश की जा सकती है:

  • फेफड़ों में इन्फेक्शन का कारण बनने वाले बैक्टीरियल संक्रमण (bacterial infection) का इलाज करने के लिए डॉक्टर, आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं की सिफारिश कर सकता है।
  • एक फंगल लंग इन्फेक्शन (Fungal Lung Infections) की स्थिति में एंटिफंगल दवाएं उपचार के लिए आवश्यकता होती हैं, इन दवाओं में कीटोकोनाजोल (ketoconazole) या वोरिकोनाज़ोल (voriconazole) को शामिल किया जा सकता है।
  • वायरल संक्रमण की स्थिति में एंटीबायोटिक्स दवाएं प्रभावी नहीं होती हैं। इसके लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।

फेफड़ों में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय – Lung Infection home remedies in Hindi

फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति से पीड़ित व्यक्ति, कुछ घरेलू उपचार अपनाकर, शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार कर सकते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार ला सकते हैं। फेफड़ों में इन्फेक्शन के घरेलू उपाय के तहत निम्न को शामिल किया जा सकता है, जैसे:

  • बुखार को कम करने के लिए एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन लें।
  • अधिक मात्रा में पानी पियें।
  • शहद या अदरक के साथ गर्म चाय का सेवन करें।
  • नमक के पानी से कुल्ला करें।
  • पर्याप्त मात्रा में आराम करें।
  • हवा में नमी बनाये रखने के लिए ह्यूमिडिफायर (humidifier) का उपयोग करें।
  • डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं को समय पर ग्रहण करें।

(और पढ़ें: फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए योग)

फेफड़ों में संक्रमण से बचाव – Lung Infection Prevention in Hindi

फेफड़ों में इन्फेक्शन (फेफड़ों के संक्रमण) का कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव - Lungs infection, Symptoms, Causes Diagnosis Treatment and Prevention in Hindi

सभी प्रकार के फेफड़ों के संक्रमण को रोका नहीं जा सकता है। लेकिन व्यक्ति कुछ उपाय अपनाकर इसके जोखिमों और लक्षणों को कम करने में मदद प्राप्त कर सकता है, इन उपाय में शामिल हैं:

  • हाथों को नियमित रूप से धोएं।
  • बगैर हाथ धुले चेहरे या मुंह को छूने से बचें।
  • अन्य व्यक्तियों के साथ बर्तन, भोजन या पेय पदार्थों का साझा न करें।
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, क्योंकि ऐसी जगहों पर वायरस फैलने का ख़तरा ज्यादा होता है।
  • तंबाकू का सेवन न करें।
  • शराब, बीड़ी, सिगरेट से परहेज करें।
  • इन्फ्लूएंजा संक्रमण (influenza infection) को रोकने के लिए हर साल एक फ्लू शॉट (flu shot) को प्राप्त करने पर विचार करें।
  • बैक्टीरियल निमोनिया के जोखिम को कम करने के लिए, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCV13) और न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड वैक्सीन (PPSV23) प्राप्त करने पर विचार करें।

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