गर्भावस्था में यात्रा कैसे करें टिप्स और सावधानियां – Travelling During Pregnancy In Hindi

गर्भावस्था में यात्रा कैसे करें टिप्स और सावधानियां - Travelling During Pregnancy In Hindi
Written by Deepti

Pregnancy me travel in Hindi: गर्भवती महिलाओं के मन में अक्सर ये सवाल होता है, कि प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करनी चाहिए या नहीं। ये तो सच है, कि गर्भावस्था थका देने वाला समय है, ऐसे में यात्रा में आने वाली मुश्किलों के बारे में सोचकर ही कई गर्भवती महिलाएं परेशान हो जाती हैं। ज्यादातर महिलाएं शिशु की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं, खासतौर से लंबी दूरी की यात्रा के दौरान। लेकिन जब मजबूरी में यात्रा करनी पड़े, तो  कई दुविधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन अपने डॉक्टर से संपर्क करने के साथ कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरती जाएं, तो प्रेग्नेंसी में भी अपनी यात्रा को सुखद और आनंदमयी बनाया जा सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करने पर गर्भवती को अपने खान-पान और स्वास्थ्य का बेहद ख्याल रखना होता है, वरना थोड़ी सी लापरवाही होने वाले बच्चे के लिए खतरा पैदा कर सकती है। अगर आप गर्भावस्था के दौरान ट्रेन, बस, कार या फ्लाइट से यात्रा कर रही हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था में यात्रा करने से जुड़ी कुछ जरूरी बातें और इससे जुड़े कुछ टिप्स बताएंगे, ताकि आप अपनी यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बना सकें।

  1. क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ट्रैवलिंग करनी चाहिए – Pregnancy me safar karna chahiye ya nahi  in Hindi
  2. गर्भावस्था में यात्रा कब करनी चाहिए – Pregnancy me traveling kab kare in hindi
  3. गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान यात्रा – Travelling in the First Trimester of pregnancy in Hindi
  4. गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान यात्रा – Travel during pregnancy second trimester in Hindi
  5. गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में यात्रा – Traveling in the third trimester of pregnancy in Hindi
  6. गर्भावस्था के दौरान कार या बस से यात्रा – Bus or Car Travel During Pregnancy In Hindi
  7. प्रेगनेंसी में ट्रेन का सफर – Travel by train during pregnancy in Hindi
  8. हवाई एवं सड़क यात्रा की तुलना क्यों सुरक्षित है रेल यात्रा – Why is it safe to compare air and road travel in Hindi
  9. गर्भावस्था में हवाई यात्रा – Garbhavastha me hawai yatra in Hindi
  10. कब हवाई यात्रा करने से बचें – When to Avoid travelling by air in Hindi
  11. गर्भावस्था के दौरान समुद्री यात्रा – Sea travel during pregnancy in Hindi
  12. किन स्थितियों में गर्भवती महिला को ट्रेवलिंग नहीं करनी चाहिए – Kis condition me pregnancy me travel nahi karna chahie in hindi
  13. गर्भावस्था में यात्रा के दौरान कैसा हो खान-पान – Pregnancy me safar me kya khaye in Hindi
  14. प्रेग्नेंसी में यात्रा करने के टिप्स – Travel tips for pregnant women in Hindi

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ट्रैवलिंग करनी चाहिए – Pregnancy me safar karna chahiye ya nahi  in Hindi

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ट्रैवलिंग करनी चाहिए - Pregnancy me safar karna chahiye ya nahi  in Hindi

वैसे तो प्रेग्नेंसी के दौरान जितना हो सके, ट्रैवलिंग से बचें। क्योंकि प्रेग्नेंसी के शुरूआती तीन महीने, जिसे हम फर्स्ट ट्राइमेस्टर कहते हैं, बड़े नाजुक होते हैं। इस दौरान आपको मॉर्निंग सिकनेस से परेशानी हो सकती है और गर्भपात का खतरा भी बहुत ज्यादा रहता है, इसलिए पहली तिमाही में ट्रैवलिंग को जितना हो सके अवॉइड करें। यदि बहुत ज्यादा जरूरी है, तो आप गर्भावस्था के चौथे महीने से छठवें महीने के बीच में यात्रा कर सकती हैं। क्योंकि इस समय मॉर्निंग सिकनेस, थकान, सुस्ती जैसे शिकायतें होना कम हो जाती हैं। प्रेग्नेंसी के आखिरी कुछ महीनों में भी ट्रेवलिंग ना करें। इससे आपको कमजोरी के साथ-साथ थकावट भी हो सकती है, जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है।

(और पढ़े – गर्भावस्था के नौवें महीने के लक्षण, शारीरिक बदलाव और बच्चे का विकास…)

गर्भावस्था में यात्रा कब करनी चाहिए – Pregnancy me traveling kab kare in hindi

गर्भावस्था के चौथे से आंठवे महीने में आप यात्रा कर सकती हैं। इस दौरान आपको मॉर्निंग सिकनेस और उल्टी जैसी समस्या नहीं होती और आपमें ऊर्जा भी बहुत होती है। बस एक बात का ध्यान रखें, कि यात्रा के दौरान चलते समय आप गिरे नहीं, क्योंकि इससे आपके शिशु को नुकसान पहुंच सकता है।

गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान यात्रा – Travelling in the First Trimester of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान यात्रा - Travelling in the First Trimester of pregnancy in Hindi

प्रारंभिक गर्भावस्था में यात्रा करना यूं तो संभव है, लेकिन आमतौर पर कई जोखिमों के कारण पहली तिमाही में यात्रा करने की सलाह नहीं दी जाती। पहली तिमाही में गर्भवती को मॉर्निंग सिकनेस, मतली, उल्टी आने की शिकायत बहुत ज्यादा रहती है। इसके अलावा पहली तिमाही में जरा सी भूल की वजह से गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए लंबी सड़क और हवाई यात्रा की सलाह नहीं दी जाती। चूंकि आपके शिशु का विकास हो रहा है, इसलिए यात्रा के दौरान कोई भी जोखिम शिशु के समुचित विकास को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अपनी गर्भावस्था का मूल्यांकन करने के लिए आप अपने डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। यदि आपकी प्रेग्नेंसी स्थिर है, तो आपका डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान पहली तिमाही में भी यात्रा की अनुमति दे सकता है।

(और पढ़े – गर्भावस्था की पहली तिमाही में भ्रूण का विकास, शारीरिक बदलाव और देखभाल…)

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान यात्रा – Travel during pregnancy second trimester in Hindi

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान यात्रा - Travel during pregnancy second trimester in Hindi

आपको बता दें, कि प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। इस समय गर्भपात के जोखिम बहुत कम होते हैं और जी-मिचलाना, उल्टी भी बंद हो जाती है।, यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है, तो आपका डॉक्टर गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में यात्रा करने की सलाह कभी नहीं देगा। प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में यात्रा से पहले डॉक्टर से अपनी यात्रा पर चर्चा करना सबसे बेहतर है।

(और पढ़े – गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में भ्रूण का विकास, शारीरिक बदलाव और देखभाल…)

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में यात्रा – Traveling in the third trimester of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में यात्रा - Traveling in the third trimester of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में यात्रा करना बहुत ज्यादा परेशानी भरा नहीं होता। क्योंकि गर्भावस्था के इस चरण में आपको बच्चे के बढ़ते वजन के कारण थकान का अनुभव हो सकता है। यह आपकी बैचेनी बढ़ा सकता है और यात्रा को तनावपूर्ण भी बना सकता है। इसके अलावा यदि आपको ओलिगोहाईड्रेमनियोस और पॉलीहाइड्रमनिओस की शिकायत है (जब शिशु के आसपास एमनियोटिक फ्लूइड कम रह जाता है, तो इसे ओलिगोहाइड्रेमनियोस कहते हैं और जब इस फ्लूइड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, तब इस स्थिति को पॉलिहाइड्रेमनियोस या हाइड्रेमनियोस कहा जाता है.), तो इस गंभीर समस्या से बचने के लिए यात्रा न करें।

(और पढ़े – गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में भ्रूण का विकास, शारीरिक बदलाव और देखभाल…)

गर्भावस्था के दौरान कार या बस से यात्रा – Bus or Car Travel During Pregnancy In Hindi

गर्भावस्था के दौरान कार या बस से यात्रा - Bus or Car Travel During Pregnancy In Hindi

गर्भावस्था में कार या बस से यात्रा करना सुविधाजनक हो सकता है, खासतौर से शॉर्ट डिस्टेंस के लिए। हालांकि मामला थोड़ा रिस्की होता है। क्योंकि खराब सड़कों पर धक्के लगना स्वभाविक है, ऐसे में छोटा सा धक्का भी आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है। गर्भावस्था के दौरान कार से यात्रा करते समय सुरक्षा की दृष्टी से सावधानियां बरतना जरूरी होता है। लेकिन फिर भी कभी आपको इमरजेंसी में कार का सफर तय करना ही पड़े, तो इसके लिए हम आपको नीचे कुछ टिप्स बता रहे हैं। इनकी मदद से गर्भावस्था के दौरान कार में आपका सफर सुरक्षित होगा और आप बिना किसी डर के अपनी प्रेग्नेंसी को एन्जॉय कर पाएंगी।

  • गर्भावस्था में अगर आपको कार का सफर करना ही पड़ रहा है, तो कार में बैठते ही सबसे पहले सीट बेल्ट पहनें। ध्यान रखें, सीट बेल्ट को पेट के नीचे ही बांधें।
  • कार में बैठने के दौरान खासतौर से प्रेग्नेंसी में एयरबैग का उचित उपयोग महत्वपूर्ण है। यदि आप एयरबैग के सामने बैठी हैं, तो जितना हो सके सीट को पीछे की ओर खिसकाएं। अपनी छाती और एयरबैग के बीच की दूरी बढ़ाने के लिए सीट को थोड़ा पीछे की ओर झुकाएं।
  • अपने पैरों में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने और मूत्राशय के दबाव को कम करने के लिए लंबी यात्रा पर कम से कम हर दो घंटे में बाथरूम जरूर जाएं।
  • कार में बहुत ज्यादा सिकुड़कर न बैठें। यात्रा के दौरान कार में इस तरह बैठें, कि आप अपने पैर आसानी से फैला सकें और हिला सकें। इससे ऐंठन होने पर आपको अपना पॉश्चर बदलने में दिक्कत नहीं होगी।
  • कार में आराम से बैठने के लिए कुशन का इस्तेमाल जरूर करें।
  • प्रेग्ग्रेंसी के दौरान कार में जब भी सफर करें, तो कार चलाने वाले से कार को धीमी गति में चलाने के लिए कहें।
  • कार में हमेशा खिड़की की तरफ बैठने की कोशिश करें और हमेशा खिड़की खुली रखें। इस दौरान कई बार जी मिचलाने की समस्या होती है।
  • गर्भावस्था में कार खुद ड्राइव करने की भूल बिल्कुल भी ना करें। यदि किसी परीस्थिति में कार ड्राइव कर भी रही हैं, तो किसी को अपने साथ जरूर ले जाएं। लेकिन फिर भी रात के समय कार ड्राइव करने से बचें।
  • कार या बस में सफर करने के दौरान किसी तरह की दुर्घटना हो जाए, तो गर्भवती महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल में ले जाएं। यदि गर्भवती महिला को छोटी -मोटी चोट भी आई है, तो अस्पताल ले जाने में देरी न करें। इस दौरान उनकी जांच होना बहुत जरूरी है।

(और पढ़े – जानिए गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए पति को क्या करना चाहिए…)

प्रेगनेंसी में ट्रेन का सफर – Travel by train during pregnancy in Hindi

प्रेगनेंसी में ट्रेन का सफर - Travel by train during pregnancy in Hindi

वैसे तो गर्भावस्था में ट्रेन यात्रा सबसे सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन किसी भी असुविधा से बचने के लिए हमारे द्वारा नीचे दिए गए टिप्स पढ़ सकते हैं।

  • ट्रेन की यात्रा करने से पहले ये सुनिश्चित कर लें, कि आपकी टिकट कंफर्म है या नहीं। अगर टिकट वेटिंग या आरएसी में भी है, तो ऐसी यात्रा करने से बचें।
  • हमेशा ऐसी ट्रेन चुनें, जिसके ज्यादा स्टॉप न हो।
  • अगर आप प्रेग्रेंट हैं, तो हमेशा लोअर सीट ही बुक करें। ऊपर की सीट पर बैठने से बचें। इससे बार-बार चढऩे-उतरने में दिक्कत हो सकती है। कोशिश करें, कि आप साइड लोअर बर्थ के लिए अप्लाई करें। बता दें, कि रेलवे गर्भवती महिलाओं को एसी, एसी2, एसी3 और स्लीपर कोच में 2 निचली बर्थ का कोटा देती है। यदि यह उपलब्ध न हो, तो सहयात्रियों से या टीटी से बात करें, वे आपको निचली सीट दिलाने में मदद कर सकते हैं।
  • अगर आप गर्भवती हैं, तो घर से निकलने से पहले ये जरूर चैक कर लें कि ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आने का सही समय क्या है। ऐसा करने से आप अनचाही भीड़ और कई समस्याओं का सामना करने से बच जाएंगी।
  • प्रेग्नेंसी में अकेले ट्रेन में यात्रा करना थोड़ा रिस्की होता है। क्योंकि इस दौरान कब क्या हो जाए, पता नहीं। इसलिए अपने साथ हमेशा किसी को साथ लेकर जाएं।
  • अकेले यात्रा करने पर हल्के बैग ही पैक करें। साथ में अगर ट्रॉली बैग ले जाएंगी, तो आपको सामान उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ध्यान रखें, प्रेग्नेंसी के किसी भी महीने में भारी वजन उठाने की मनाही होती है, ऐसे में भारी बैग उठाना आपको चोट पहुंचा सकता है।
  • यदि प्लेटफॉर्म पर आपको ट्रेन तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां चढ़नी -उतरनी हैं, तो सामान ढोने के लिए एक कुली (सहायक) बुक कर लें। इससे आपको आसानी होगी।
  • जब तक प्लेटफॉर्म पर ट्रेन पूरी तरह से रूक न जाए, ट्रेन से उतरने या चढ़ने की कोशिश न करें। हमारी ये सलाह केवल प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि सभी यात्रियों के लिए है।
  • लंबे सफर में बैठे-बैठे आपको तकलीफ हो सकती है, इसलिए किसी चीज का सपोर्ट लेकर ट्रेन में टहल सकती हैं।
  • चलती ट्रेन में एक बोगी से दूसरी बोगी तक जाने की कोशिश न करें। इससे कई बार आपका बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे चोट लग सकती है।

(और पढ़े – गर्भावस्था में सोते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान…)

हवाई एवं सड़क यात्रा की तुलना क्यों सुरक्षित है रेल यात्रा – Why is it safe to compare air and road travel in Hindi

विशेषज्ञों की माने तो गर्भावस्था के दौरान हवाई एवं सड़क यात्रा की तुलना में रेल यात्रा का विकल्प कम जोखिम भरा होता है। सड़क मार्ग पर पड़ने वाले खराब रास्ते, टेढ़े-मेढ़े मोड़ एवं ऊँचे-नीचे मार्ग का चयन गर्भावस्था के दौरान जोखिम को निमंत्रण देना है। वहीं ज्यादातर एयरलाइंस कम्पनियां गर्भवती महिलाओं को एक विशेष समय के बाद यात्रा की अनुमति नहीं देती है। ऐसे में एक निश्चित गति से चलने वाली रेलगाड़ी को ही गर्भावस्था के दौरान सफर करने के लिए बेहतर विकल्प माना गया है।लेकिन गर्भावस्था के दौरान रेलयात्रा करने से पहले गर्भवती महिला को अपने डॉक्टर से अनिवार्य रूप से सलाह लेनी चाहिए।

गर्भावस्था में हवाई यात्रा – Garbhavastha me hawai yatra in Hindi

गर्भावस्था में हवाई यात्रा - Garbhavastha me hawai yatra in Hindi

गर्भावस्था में सुरक्षित हवाई यात्रा कैसे करें? प्रेग्नेंसी में महिलाओं के लिए हवाई यात्रा सबसे ज्यादा सेफ मानी जाती है। खासतौर से, लंबी यात्रा के लिए यह बहुत अच्छी है। फ्लाइट में यात्रा करने का सबसे अच्छा समय 18 से 24 हफ्तों के दौरान होता है। इस दौरान प्रीटर्म लेबर और गर्भपात जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। हालांकि, ज्यादातर एयरलाइन्स गर्भवती महिलाओं को केवल आंठवे महीने तक ही प्लेन में सफर करने की अनुमति देती हैं। नौंवे महीने में गर्भवती महिला को हवाई यात्रा करने की अनुमति केवल डॉक्टर की परमिशन के आधार पर ही दी जाती है। नीचे बताए गए कुछ टिप्स से आप अपनी हवाई यात्रा को और सुरक्षित और आरामदायक बना सकती हैं।

  • उड़ान बुक करने से पहले गर्भवती महिलाएं एयरलाइन के रूल्स जरूर पढ़ लें। क्योंकि कुछ एयरलाइन्स 35 सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाओं को हवाई यात्रा करने की अनुमति नहीं देती हैं। हर फ्लाइट के नियम और शर्ते अलग-अलग हैं, इसलिए इस बारे में जानकारी जरूर ले लें।
  • फ्लाइट में बैठने के बाद सीट बेल्ट अपनी निचली जांघों पर पहनें।
  • यात्रा करते समय अपनी नियत तारीख का दस्तावेज साथ लेकर चलें, क्योंकि कुछ एयरलाइन्स इस जानकारी को चैक करने के लिए कहती हैं।
  • लंबी यात्रा के दौरान गर्भवती महिलाएं बीच में उठकर थोड़ी वॉक कर लें। ऐसा करने से पैरों का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
  • यदि संभव हो, तो हमेशा साइड की सीट ही चुनें। इससे प्लेन में टहलना आसान हो जाएगा और अन्य यात्रियों को आपसे असुविधा भी नहीं होगी।
  • ज्यादातर फ्लाइट्स में रास्ते और बाथरूम छोटे होते हैं, इसलिए चलते समय थोड़ी असुविधा महसूस हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका होती है, खासतौर से तब, जब वे दो से ज्यादा बच्चों को जन्म देने वाली हों, उन्हें 32वें हफ्ते से हवाई यात्रा करने से बचना चाहिए। वरना आगे की यात्रा उनके लिए जोखिम भरी हो सकती है।
  • जब आप फ्लाइट से उतरती हैं, तो अपनी मांसपेशियों को रिलेक्स करने के लिए अपने पैरों को फैलाएं और इन्हें आराम दें।
  • यदि आपको लैंडिंग के समय कोई असुविधा होती है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

(और पढ़े – प्रेगनेंसी के आठवें महीने की जानकारी और केयर टिप्स…)

कब हवाई यात्रा करने से बचें – When to Avoid travelling by air in Hindi

  • आप अपने गर्भावस्था के 36वें महीने में पहुंच गई हों।
  • गर्भवती महिलाओं को 7000 फीट से ऊपर की ऊचांई पर नहीं जाना चाहिए। अगर कोई फ्लाइट इससे ऊपर जाती है, तो ऐसी यात्रा करना आपके लिए सेफ नहीं है।
  • अगर आपके डॉक्टर ने हवाई यात्रा करने की अनुमति नहीं दी हो।
  • यदि आप एयरप्लेन पायलट, फ्लाइट अटैंडेंट, एयर मार्शल, कुरियर या बिजनेस के कारण कई बार हवाई यात्रा करती हैं, तो गर्भावस्था के दौरान कॉस्मिक रेडिएशन लिमिट 1 मिलीसेवर सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि, ऑकेजनल फ्लाइट इस तरह का जोखिम उठाने से बचती हैं, लेकिन कम ऊंचाई वाली घरेलू उड़ानें या ज्यादा ऊंचाई वाली अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भ्रूण में कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान समुद्री यात्रा – Sea travel during pregnancy in Hindi

यदि आपकी गर्भावस्था में कई जटिलताएं हैं, तो समुद्री यात्रा करना आपके लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। नीचे जानिए समुद्र में यात्रा करने के लिए कुछ जरूरी टिप्स।

  • किसी भी शिप या क्रूज पर जाने से पहले संबंधित कार्यालय से इस बात की जानकारी ले लें, कि जहाज ने सभी निरीक्षणों को मंजूरी दे दी है।
  • इस बात की पुष्टि करें, कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाता हर समय जहाज पर मौजूद रहे। उनसे पूछें कि हर स्टॉप पर चिकित्सा देखभाल उपलब्ध हो सकती है या नहीं।
  • क्रूज पर सुरक्षा उपायों का ध्यान रखें।
  • यात्रा के दौरान क्रूज या शिप के नियम को आवश्यक रूप से पढ़ लें।
  • डेक पर बहुत ज्यादा समय बिताने से बचें। इससे आपको सनबर्न और ओवरहीटिंग की समस्या हो सकती है।
  • गर्भावस्था में शिप में ट्रेवल करते समय गिरने से बचने के लिए फिसलन वाली जगहें पर नहीं जाना चाहिए।
  • बंदरगाहों पर लोकल फूड खाने से बचें।
  • किसी भी तरह के संक्रमण को रोकने के लिए आम पूल के बजाए प्राइवेट पूल या जकूजी का विकल्प चुनें।

किन स्थितियों में गर्भवती महिला को ट्रेवलिंग नहीं करनी चाहिए – Kis condition me pregnancy me travel nahi karna chahie in hindi

किन स्थितियों में गर्भवती महिला को ट्रेवलिंग नहीं करनी चाहिए - Kis condition me pregnancy me travel nahi karna chahie in hindi

कई ऐसे नाजुक और संवेदनशील मामले होते हैं, जिसमें गर्भवती को यात्रा करने से बचना चाहिए। नीचे जानिए ऐसी स्थितियों के बारे में।

गर्भपात का खतरा- यदि आपका या आपके परिवार में किसी का गर्भपात हुआ है, तो यात्रा करने से बचना चाहिए। क्योंकि ये स्थिति कई बार अनुवांशिक भी होती है। अगर परिवार में गर्भपात का इतिहास रहा है, तो आपके साथ ऐसा होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।

एक से ज्यादा प्रेग्नेंसी- अगर आप एक से ज्यादा यानि जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली हैं, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर खुद आपको यात्रा करने की अनुमति नहीं देते।

प्रीक्लेमपसिया या उक्त रक्तचाप – गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लेम्पसिया से पीडि़त महिलाओं को यात्रा करते समय कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर से लंबी यात्रा आपको थका सकती है।

प्लेसेंटल असामान्यताएं- प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेसेंटा एब्डोमिनिस जैसी स्थितियां आपके और बच्चे के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। यदि आप इन स्थितियों से पीडि़त हैं, तो रक्तस्त्राव भी आम हो सकता है। इसलिए, इस स्थिति में यात्रा करने की सलाह नहीं दी जाती।

जेस्टेशनल डायबिटीज – जेस्टेशनल डायबिटीज वाली गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त आराम और देखभाल की आवश्यकता होती है। इसलिए, यदि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है, तो किसी भी तरह की यात्रा करने से बचना चाहिए।

गर्भावस्था के दौरान भारी रक्तस्त्राव- गर्भावस्था के दौरान कुछ रक्तस्त्राव तो आम बात है। लेकिन आपको प्रेग्नेंसी में ज्यादा रक्तस्त्राव फील हो रहा है, तो किसी भी जटिलता और असुविधा से बचने के लिए ट्रेवल करने से बचें।

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी होना- एक्टोपिक गर्भावस्था (गर्भ अपने स्थान से हट कर अन्य कहीं स्थापित होता है, उस को अस्थानिक यानि एक्टोपिक गर्भ कहते है)  मां के लिए बहुत खतरनाक स्थिति होती है, खासतौर से तब जब मां को ये प्रीक्लेम्पसिया के साथ हो। ऐसे में जटिलताओं को कम करने के लिए यात्रा न करने की सलाह दी जाती है।

(और पढ़े – जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भकालीन मधुमेह) के कारण, लक्षण, निदान और इलाज…)

गर्भावस्था में यात्रा के दौरान कैसा हो खान-पान – Pregnancy me safar me kya khaye in Hindi

गर्भावस्था में यात्रा के दौरान कैसा हो खान-पान - Pregnancy me safar me kya khaye in Hindi

गर्भावस्था में यात्रा चाहे ट्रेन की हो, फ्लाइट की या फिर कार और बस की। सभी में अपने खानपान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। छोटी सी चूंक आपकी प्रेग्नेंसी पर भारी पड़ सकती है। गर्भावस्था में यात्रा के दौरान आपका खान-पान कैसा होना चाहिए, इसकी जानकारी हम आपको नीचे दे रहे हैं।

  • हमेशा अपने साथ पर्याप्त पानी लेकर चलें। ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले पानी पर भरोसा न करें। ये पूरी तरह से स्वस्थ और स्वच्छ नहीं होता। इसलिए अपने पास पानी रखें और बार-बार पानी पीते रहें, जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए।
  • स्टेशन या ट्रेन के अंदर मिलने वाले किसी भी खाद्य पदार्थ को खाने से बचें। ये स्वच्छ नहीं होते, इससे आपको फूड पॉइजनिगं की शिकायत भी हो सकती है। फिर भी यदि आप मुंह का स्वाद बदलने के लिए कुछ ले रही हैं, तो ऐसी चीज लें, जो लंबे समय तक खराब न हो।
  • अपने साथ खाने में बहुत ज्यादा ऑयली और मसालेदार भोजन पैक न करें। इससे आपको तकलीफ हो सकती है।
  • अगर यात्रा लंबी है, तो अपने साथ ऐसी खाने की चीजें रखें, जिन्हें आप कम से कम दो दिन तक खा सकते हों।
  • यात्रा से पहले बेहतर होगा, कि आप अपने डॉक्टर से उक्त दिनों का डाइट चार्ट बनवा लें। इससे आपके खाने का रूटीन बिगड़ेगा नहीं।
  • गर्भावस्था में थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते -पीते रहें। अपने साथ सूखे मेवे, संतरे, केले, नमकीन और प्रोटीन बिस्किट तो हमेशा रखें।
  • सफर के दौरान कैफीन युक्त पदार्थों का सेवन कम करें, क्योंकि ये आपके शरीर में पानी की कमी करते हैं।
  • किसी भी पैक्ड जूस को खरीदते समय इसके पैक पर एक्सपायरी डेट जरूर चैक कर लें।

(और पढ़े – गर्भावस्था के लिए बेस्ट ड्राई फ्रूट्स और उनके फायदे…)

प्रेग्नेंसी में यात्रा करने के टिप्स – Travel tips for pregnant women in Hindi

प्रेग्नेंसी में यात्रा करने के टिप्स - Travel tips for pregnant women in Hindi

गर्भावस्था अपने आप में ही बहुत सेंसिटिव मामला है। वैसे तो गर्भवती महिला को इस अवस्था में कहीं आने-जाने की सलाह नहीं दी जाती, लेकिन फिर भी जरूरत पडऩे पर जाना ही पड़े, तो हमारे द्वारा टिप्स को अपनाकर अपनी यात्रा को सुखद बना सकती हैं।

  • प्रेग्नेंसी में लंबी सड़क यात्रा करने से बचें।
  • ट्रैवलिंग की योजना बनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। क्योंकि वो ही आपकी प्रेग्नेंसी के बारे में अच्छे से जानते हैं।
  • एक ट्रेवल किट पैक जरूर करें। इसमें प्रीनेटल विटामिन, मेडिकल डॉक्यूमेंट्स, डॉक्टर की कॉन्टेक्ट डिटेल, हेल्दी स्नैक्स, हैंड सैनेटाइजर और दवा मुख्य रूप से रखी गई हों।
  • फ्लाइट में सफर करने के दौरान एयरलाइन्स आपसे डॉक्टर द्वारा कंफर्मेशन लेटर मांगती है, ये जानने के लिए कि आपकी प्रेग्नेंसी में कोई कॉम्प्लीकेशन तो नहीं है और आपकी ड्यू डेट क्या है।
  • ट्रैवलिंग के दौरान नियमित रूप से पानी पीती रहें। शरीर में पानी की कमी न होने दें
  • कार से हमेशा यात्रा करते समय अपने प्रीनेटल रिकॉर्ड साथ रखें।
  • यात्रा के दौरान आपात स्थिति के लिए अपने पास मोबाइल फोन और उसमें बैलेंस जरूर रखें।
  • यात्रा के दौरान अपने साथ कुछ कैश भी साथ रखें। क्योंकि हर बार एटीएम से पैसा निकलना संभव नहीं हो पाता। या तो उस जगह पर एटीएम नहीं होता, या फिर उसमें कैश नहीं होता।
  • गर्भावस्था में ट्रैवलिंग के दौरान बाहर का कुछ भी खाने से बचें। बेहतर है घर के बने स्नैक्स साथ रखें।
  • यात्रा में स्टाइलिश दिखने के लिए टाइट और शॉर्ट कपड़ न पहनें। ये आपको अनकंफर्टेबल फील करा सकते हैं।
  • सफर के दौरान अपनी मांसपेशियों को स्ट्रेच करते रहें। जितना हो सके, अपने पैरों को फैलाएं।
  • गर्भावस्था में ट्रेवल के दौरान अगर आपको लेबर पेन होने लगे और डिलीवरी की नौबत आ जाए, तो ऐसी स्थिति को हैंडल करने के लिए ट्रेवल इंश्योरेंस जरूर कराएं। यह आपकी गर्भावस्था और मेडिकल बिलों को कवर करेगा।
  • यदि आप प्रेग्नेंसी में अंतरराष्‍ट्रीय यात्रा कर रही हैं, तो आपको आपके और बच्चे के सुरक्षा कारकों पर चर्चा करने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से संपर्क करना महत्वपूर्ण है। उनके टीकाकरण पर चर्चा करें और अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड की एक कॉपी अपने साथ रखें।
  • अपनी अंतरराष्‍ट्रीय यात्रा से संबंधित टीकाकरण तथ्यों के साथ सुरक्षा जानकारी प्राप्त करने के लिए रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (800) 311 -3435  पर संपर्क करें या www.cdc.gov वेबसाइट पर जाएं।
  • जिस देश में जाने की योजना बना रहे हैं, वहां एक चिकित्सा केंद्र जरूर खेाजें। ऐसे केंद्र की तलाश करें, जहां इमरजेंसी में सिजेरियन कर सकते हों। इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर मेडिकल असिस्टेंस इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।
  • यात्रा के लिए ट्रेन, बस या आदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चढ़ते-उतरते या भीड़ भाड़ वाली जगह पर चलने में जल्दबाजी न करें। धैर्य रखें। किसी भी तरह के धक्के को रोकने के लिए आगे वाली यात्री को पहले जाने दें।
  • यात्रा के दौरान शौचालय का उपयोग करते समय अगर आपके पास ऑप्शन है, तो वेस्टर्न के बजाए स्क्वाट टॉयलेट का उपयोग करें। यदि आपका पार्टनर आपके साथ हैं, तो किसी भी असुविधा से बचने के लिए उनसे वॉशरूम के बाहर खड़े रहने के लिए कहें।
  • सही सावधानियों और देखभाल के साथ गर्भावस्था में यात्रा संभव है। यह भी सलाह दी जाती है, कि किसी भी तरह की यात्रा प्लान करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। क्योंकि पहली और आखिरी तिमाही में सफर करना थोड़ा रिस्की होता है। ध्यान रखें कि, सुरक्षित यात्रा के लिए अच्छी योजना और सावधानियों की जरूरत होती है, जो आपके और आपके विकासशील बच्चे को सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।

(और पढ़े – प्रेगनेंसी के नौवे महीने में रखें इन बातों का ध्यान…)

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