पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका, फायदे और सावधानियां – Paschimottanasana (Forward Bend Pose) in Hindi

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका, फायदे और सावधानियां - Paschimottanasana (Forward Bend Pose) in Hindi
Written by Anamika

जानिए पश्चिमोत्तानासन योग की विधि, चरण, लाभ, पश्चिमोत्तानासन के फायदे, करने का तरीका और सावधानियों के बारे में। (Paschimottanasana in Hindi, Benefits of Paschimottanasana in Hindi, How to do Paschimottanasana in Hindi.) पश्चिमोत्तानासन संस्कृत भाषा का शब्द है, जहां पश्चिम का अर्थ पीछे की ओर (west direction) उत्तान का अर्थ खिंचना या तानना (stretched) और आसन का अर्थ (pose) है। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से अर्थात् रीढ़ की हड्डी (spine) में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है। यहां पश्चिम का अर्थ पश्चिम दिशा से नहीं बल्कि पीछे के भाग से है। पश्चिमोत्तानासन देखने में बहुत आसान लगता है लेकिन वास्तव में इस आसन का अभ्यास करना काफी कठिन है।

इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिच (stretch) जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है।

1. पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका – Paschimottanasana (Forward Bend Pose) karne ka tarika in Hindi
2. पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे – Paschimottanasana ke fayde in Hindi

3. पश्चिमोत्तानासन करते समय सावधानियां – Precautions for Paschimottanasana (Forward Bend Pose) in Hindi

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका – Paschimottanasana (Forward Bend Pose) karne ka tarika in Hindi

किसी भी आसन का अभ्यास शुरू करने से पहले उसके सही तरीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए अन्यथा उस आसन का पूरा लाभ हमें नहीं मिल पाता है।

तो आइये जानते हैं कि पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका क्या है –

  • जमीन पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और जितना संभव हो पैरों को सीधे रखें। इसके साथ ही गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें।
  • इसके बाद अपनी दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों (knees) पर रखें।
  • अब अपने सिर और धड़ (trunk) को धीरे से आगे की ओर झुकाएं और अपने घुटनों को बिना मोड़े हाथों की उंगलियों से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें।
  • इसके बाद गहरी श्वास लें और धीरे से श्वास को छोड़ें। अपने सिर और माथे को दोनों घुटनों से छूने की कोशिश करें।
  • बांहों को झुकाएं और कोहनी (elbow)से जमीन को छूने की कोशिश करें।
  • श्वास को पूरी तरह छोड़ दें और इसी मुद्रा में कुछ देर तक बने रहें।
  • कुछ सेकेंड के बाद वापस पहली वाली मुद्रा में आ जाएं।
  • अब सामान्यरूप से श्वास लें और इस आसन को 3 से 4 बार दोहराएं।

पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास खाली पेट किया जाता है। लेकिन यदि आप किसी कारणवश भोजन करने के बाद इस आसन का अभ्यास करना चाहते हैं तो यह सुनिश्चित कर लें कि आसन करने से लगभग 6 घंटे पहले भोजन कर लें। भोजन सही तरीके से पचने के बाद आसन का अभ्यास करने में शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है। इस योगासन का अभ्यास करने का बेहतर समय सुबह होता है लेकिन शाम को भी इसका अभ्यास किया जा सकता है।

पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे – Paschimottanasana ke fayde in Hindi

अन्य योगासन की तरह पश्चिमोत्तानासन करने से शरीर के विभिन्न विकार दूर हो जाते हैं और व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है। यह एक ऐसा आसन है जिसका अभ्यास करने से पूरे शरीर की मांसपेशियों(muscle) में खिंचाव होता है जिसके कारण यह कई बीमारियों के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद होता है। आइये जानते हैं पश्चिमोत्तानासन के फायदों के बारे में।

तनाव दूर करने में पश्चिमोत्तानासन के फायदे – Forward Bend Pose Benefits for stress in hindi

पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर के साथ सिर और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण यह आसन तनाव, चिंता, और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में बहुत सहायक होता है। इसके अलावा यह क्रोध और चिड़चिड़ापन (irritability) को भी दूर करता है और दिमाग को शांत रखता है।

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पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे पेट की चर्बी दूर करने में – Paschimottanasana ke fayde Pet Kam Karne Me

सही तरीके से पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करते समय पेट (abdomen) की मांसपेशियों खिंचती हैं जिसके कारण पेट और उसके आसपास की जगहों पर जमी चर्बी दूर हो जाती है।

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पश्चिमोत्तानासन करने के लाभ हड्डियों को लचीला बनाने में – Forward Bend Pose Benefits for Bones in hindi

पश्चिमोत्तानासन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न करता है और उन्हें लचीला बनाने का काम करता है। इसके अलावा इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति की लंबाई भी बहुत आसानी से बढ़ने लगती है।

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नपुंसकता दूर करने में पश्चिमोत्तानासन के फायदे – Forward Bend Pose Benefits to Impotence of Impotence

पश्चिमोत्तासनासन एक ऐसा आसन है जिसका प्रतिदिन अभ्यास करने से नपुंसकता दूर हो जाती है और व्यक्ति के यौन शक्ति में वृद्धि होती है। इसके अलावा पेट और श्रोणि अंग (pelvic organs) भी अच्छे तरीके से टोन हो जाते हैं।

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पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे महिलाओं के लिए – Paschimottanasana ke fayde Mahilaon Ke Liye

डिलीवरी के बाद पश्चिमोत्तानासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से महिलाओं का शरीर फिर से अपनी प्रारंभिक आकृति में आ जाता है और पेट एवं कूल्हों की चर्बी कम हो जाती है। इसके अलावा यह आसन करने से मासिक धर्म भी सही तरीके से होता है।

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बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद है पश्चिमोत्तानासन – Paschimottanasana ke fayde for digestion in hindi

पश्चिमोत्तानासन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और खाना न पचने के कारण अक्सर कब्ज एवं खट्टी डकार आने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करने से किडनी, लिवर, महिलाओं का गर्भाशय एवं अंडाशय अधिक सक्रिय(activated) होता है।

पश्चिमोत्तानासन के फायदे अनिद्रा की समस्या दूर करने में – Paschimottanasana Benefits for Insomnia in hindi

इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति को सही तरीके से नींद आती है और अनिद्रा (insomnia) की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, बांझपन (infertility) और डायबिटीज की समस्या को दूर करने में भी यह आसन फायदेमंद होता है।

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पश्चिमोत्तानासन करते समय सावधानियां – Precautions for Paschimottanasana (Forward Bend Pose) in Hindi

किसी भी आसन का अभ्यास करने पर फायदों के साथ उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। लेकिन आमतौर पर नुकसान तब होता है जब शरीर में कोई विशेष परेशानी हो औऱ हम उसकी अनदेखी कर किसी आसन का अभ्यास कर रहे हों। आइये जानते हैं पश्चिमोत्तानासन में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • गर्भवती महिलाओं को पश्चिमोत्तानासन करने से बचना चाहिए।
  • स्लिप डिस्क (slip disc), साइटिका, अस्थमा और अल्सर जैसे रोगों से पीड़ित लोगों को यह आसन करने से परहेज करना चाहिए।
  • पीठ एवं कमर में दर्द के साथ ही डायरिया से पीड़ित व्यक्ति को यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • यदि शरीर में किसी प्रकार की सर्जरी हुई हो तो यह आसन करने से बचना चाहिए।
  • यदि पेट के किसी अंग का ऑपरेशन हुआ हो तो पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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