यूटेराइन प्रोलैप्स (बच्चेदानी/गर्भाशय का बाहर आना) – Uterine Prolapse Causes Symptoms Treatment In Hindi

यूटेराइन प्रोलैप्स (बच्चेदानी/गर्भाशय का बाहर आना) के लक्षण, कारण, इलाज और उपचार - Uterine Prolapse Causes Symptoms Treatment In Hindi
Written by Akansha

Uterine Prolapse in Hindi गर्भाशय और योनि का आगे की तरफ बढ़ाव (uterine and vaginal prolapse) तब होता है जब पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों और लिगामेंट में खिंचाव होता है जिससे यह कमजोर हो जाते हैं और जब यह गर्भाशय को पर्याप्त सपोर्ट नहीं दे पाते है तो नतीजतन, गर्भाशय नीचे की ओर फिसल जाता है या योनि से बाहर निकल जाता है। पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स (pelvic organ prolapse) की समस्या किसी भी उम्र की महिलाओं में हो सकती है। लेकिन यह अक्सर पोस्टमेनोपॉज़ल (postmenopausal) महिलाओं को प्रभावित करता है जिनके एक या इससे अधिक योनि प्रसव हो चुके हैं। अगर गर्भाशय हल्का सा आगे की ओर बढ़ा है तो आमतौर पर उसके लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।

लेकिन अगर गर्भाशय का नीचे की तरफ बढ़ना आपको असहज महसूस करा रहा है या आपके सामान्य जीवन को बाधित करता है, तो आपको इसका उपचार लेना चाहिए इससे आपको लाभ हो सकता है। आज इस लेख के द्वारा हम जानेंगे की प्रोलैप्स यूटरस क्या है और इसके क्या लक्षण और कारण होते है प्रोलैप्स गर्भाशय कितने प्रकार के होते है, और वेजाइनल प्रोलैप्स की जांच और इलाज कैसे किया जा सकता है।

  1. प्रोलैप्स यूटरस क्या है – What is a Prolapsed Uterus in hindi
  2. यूटेराइन प्रोलैप्स के चरण – Stages of Uterine Prolapse in hindi
  3. यूटेराइन प्रोलैप्स (गर्भाशय का बाहर निकलना) के प्रकार – Types of Uterine prolapse in hindi
  4. बच्चेदानी बाहर आने के लक्षण – Pelvic Organ Prolapse symptoms in hindi
  5. पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स होना का कारण – Pelvic Organ Prolapse causes in hindi
  6. प्रोलैप्स गर्भाशय का निदान – Prolapsed Uterus Diagnosis in hindi
  7. बच्चेदानी बाहर आने का इलाज – Pelvic Organ Prolapse Treatment in hindi
  8. पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स के लिए एक्सरसाइज – Pelvic Organ Prolapse Exercise in hindi
  9. प्रोलैप्स गर्भाशय का प्राकृतिक उपचार कैसे करें – How to treat Prolapse naturally in hindi

प्रोलैप्स यूटरस क्या है – What is a Prolapsed Uterus in Hindi

प्रोलैप्स यूटरस क्या है - What is a Prolapsed Uterus in hindi

गर्भाशय (गर्भ) एक मस्कुलर स्ट्रक्चर है जो पैल्विक मांसपेशियों और लिगामेंट के पास की जगह में होता  है। यदि इन पेल्विक मांसपेशियों या लिगामेंट में खिंचाव होता है और यह कमजोर हो जाते हैं, तो उसके बाद यह गर्भाशय को सपोर्ट देने में सक्षम नहीं रहते हैं, जिससे गर्भाशय में आगे को बढ़ाव महसूस होता है जिसे प्रोलैप्स यूटरस (बच्चेदानी बाहर आना) कहा जाता है। इस समस्या को पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स और वेजाइनल प्रोलैप्स भी कहा जाता है।

गर्भाशय में आगे को बढ़ाव तब होता है जब गर्भाशय अपनी सामान्य स्थिति से निकल जाता है या फिसल कर योनि (जन्म नहर) में चला जाता है। पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स दो तरह से होता है अधूरा या पूरा। एक अधूरा प्रोलैप्स (incomplete prolapse) तब होता है जब गर्भाशय केवल योनि में आंशिक रूप से नीचे की तरफ आता है। परन्तु एक पूर्ण प्रोलैप्स (complete prolapse) तब होता है जब गर्भाशय इतनी नीचे गिर जाता है कि इसके कुछ टिश्यू योनि के बाहर फैल जाते हैं।

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यूटेराइन प्रोलैप्स के चरण – Stages of Uterine Prolapse in Hindi

यूटेराइन प्रोलैप्स के चरण – Stages of Uterine Prolapse in Hindi

यूटेराइन प्रोलैप्स (गर्भाशय का खिसकना) को विभिन्न चरणों में वर्णित किया गया है, यह चरण दर्शाते है कि यह प्रोलैप्स कितनी नीचे आ चुका है। इसमें अन्य पैल्विक अंगों जैसे मूत्राशय (bladder) या आंत्र (bowel) भी योनि में फिसल कर आ सकती है, इसलिए वेजाइनल प्रोलैप्स की चार श्रेणियां हैं, जिनमें शामिल है-

  • स्टेज I (stage I) – गर्भाशय योनि के ऊपर तरफ आधे हिस्से में आ जाता है।
  • स्टेज II (stage II) गर्भाशय योनि के ओपनिंग के पास लगभग उतर चुका है।
  • स्टेज III (stage III) – गर्भाशय योनि से बाहर निकलने लगता है।
  • स्टेज IV (stage IV) – गर्भाशय पूरी तरह से योनि से बाहर निकल आता है।

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यूटेराइन प्रोलैप्स (गर्भाशय का बाहर निकलना) के प्रकार – Types of Uterine prolapse in Hindi

यूटेराइन प्रोलैप्स (गर्भाशय का बाहर निकलना) के प्रकार – Types of Uterine prolapse in hindi

शरीर में प्रोलैप्स की स्थिति तब होती है जब शरीर का कोई अंग अपने सामान्य स्थान से नीचे गिर जाता है या फिसल जाता है। योनि और गर्भाशय प्रोलैप्स के आलावा इसके अन्य प्रकारों में शामिल हैं-

यूटेराइन प्रोलैप्स (Uterine prolapse) – इस प्रकार में गर्भाशय उभरा हुआ होता है या योनि में फिसल गया होता है, और कभी-कभी ऐसा भी होता है कि यह योनि की ओपनिंग से बाहर आ जाता है।

योनि में आगे को बढ़ाव (Vaginal vault prolapse) – इसमें योनि का शीर्ष योनि नलिका में नीचे की तरफ चला जाता है। यह आमतौर पर उन महिलाओं में होता है जिन्होंने हिस्टेरेक्टॉमी (यानि गर्भाशय को हटाने) की सर्जरी करवाई हो।

सिस्टोसेल (Cystocele) – इस प्रकार में मूत्राशय (bladder) योनि में आ जाता है।

मूत्रमार्ग (Urethrocele) – इसमें मूत्रमार्ग (एक नली जो मूत्र को मूत्राशय से बाहर ले जाती है) योनि में प्रवेश करती है। बहुत सी महिलाओं में सिस्टोसेल और मूत्रमार्ग की समस्या अक्सर एक साथ पाई जाती हैं।

रेक्टोसेल (Rectocele) – मलाशय (rectum) योनि में या उसके बाहर निकल आता है।

एंट्रोसेल (Enterocele) – योनि की पिछली दीवार के पीछे छोटी आंत पर उभार आ जाता है। एंट्रोसेल और योनि वॉल्ट प्रोलैप्स की समस्या अक्सर एक साथ होती हैं।

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बच्चेदानी बाहर आने के लक्षण – Pelvic Organ Prolapse symptoms in hindi

बच्चेदानी बाहर आने के लक्षण – Pelvic Organ Prolapse symptoms in hindi

माइल्ड पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स होने पर आमतौर पर कोई संकेत या लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। परन्तु अगर गंभीर रूप से बच्चेदानी बाहर आने की समस्या हो तो इसमें निम्न लक्षण दिखाई दे सकते है, जिनमें शामिल हैं-

पेल्विक एरिया में कुछ भरा हुआ महसूस होना, साथ ही भारीपन या दर्द की भावना महसूस होना। अक्सर यह अहसास दिन पर दिन और खराब होता जाता है ऐसे में खड़े होने, कुछ उठाने या खांसने पर स्थिति और खराब हो जाती है।

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पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स होना का कारण – Pelvic Organ Prolapse causes in hindi

पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स होना का कारण - Pelvic Organ Prolapse causes in hindi

पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कई कारणों से कमजोर हो सकती हैं, जिनमें मुख्य कारण है-

  • गर्भावस्था होना
  • प्रसव से संबंधित कुछ कारक, जिसमें शामिल है ट्रामा, एक बड़े बच्चे को जन्म देना या योनि प्रसव होना
  • यदि आपकी उम्र बढ़ रही हो, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति के बाद, जब एस्ट्रोजन सर्कुलेशन का स्तर कम हो जाता है।
  • लगातार भारी चीजे उठाने से।
  • मल त्याग के समय परेशानी होना।
  • कोई पुरानी खांसी
  • पेल्विक सर्जरी का कोई इतिहास रहा हो।
  • कोई आनुवंशिक कारक जिसकी वजह से कनेक्टिव टिश्यू कमजोर हो गयी हो।
  • यह सभी कारण आगे चलकर उच्च स्तर पर जोखिम और जटिलताएं भी पैदा कर सकती है, जैसे बहुत अधिक मोटापा बढ़ना, बहुत दिनों तक खांसी आना और गंभीर कब्ज की समस्या भी हो सकती है।

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प्रोलैप्स गर्भाशय का निदान – Prolapsed Uterus Diagnosis in hindi

प्रोलैप्स गर्भाशय का निदान – Prolapsed Uterus Diagnosis in hindi

प्रोलैप्स गर्भाशय का निदान आमतौर पर कुछ विभिन्न परीक्षणों द्वारा किया जाता है, जिनमें शामिल है-

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बच्चेदानी बाहर आने का इलाज – Pelvic Organ Prolapse Treatment in Hindi

बच्चेदानी बाहर आने का इलाज – Pelvic Organ Prolapse Treatment in hindi

बच्चेदानी बाहर आने का इलाज इस समस्या की गंभीरता पर निर्भर करती है। फिर भी आप कुछ उपाय अपनाकर पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स का इलाज कर सकती है, जो दो तरह से होते है एक नॉन सर्जिकल और दूसरा सर्जिकल।

नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट (Non surgical treatment)-

इस तरह के इलाज में आप सेल्फ केयर तरीके अपना सकती है जैसे-

  • पैल्विक स्ट्रक्चर पर कम तनाव पड़े इसके लिए अपना वजन कम करें।
  • भारी सामान उठाने से बचें।
  • केगेल एक्सरसाइज करें, जो एक पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज हैं जो योनि की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करती हैं।

योनि पेसरी का इस्तेमाल करें (vaginal pessary) –

यह एक प्रकार का योनि उपकरण है जो गर्भाशय को सपोर्ट प्रदान करता है और इसे अपनी सही स्थिति में रखता है। पेसरी की देखभाल, इसे हटाने और लगाने के तरीकों की जानकारी के लिए इस पर दिए गए निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है। गंभीर प्रोलैप्स के मामलों में, पेसरी की वजह से आपको जलन, अल्सर और यौन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर के साथ चर्चा करें कि क्या यह उपचार आपके लिए सही है।

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बच्चेदानी बाहर आने का सर्जिकल ट्रीटमेंट (Surgical Treatment) –

आपका डॉक्टर गर्भाशय के आगे बढ़ने की समस्या का  ट्रीटमेंट करने के लिए सर्जरी की सलाह दे सकता है। इसके इलाज के लिए न्यूनतम इनवेसिव (लैप्रोस्कोपिक) (Minimally invasive (laparoscopic) या योनि सर्जरी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

इस सर्जरी में शामिल हो सकती हैं-

कमजोर पेल्विक फ्लोर के ऊतकों की मरम्मत – Repair of weakened pelvic floor tissues –

यह सर्जरी आमतौर पर योनि के माध्यम से की जाती है लेकिन कभी-कभी यह पेट के माध्यम से भी होती है। इस प्रक्रिया में सर्जन आपके पैल्विक अंगों को सपोर्ट देने के लिए आपके कमजोर पैल्विक फ्लोर स्ट्रक्चर पर आपके अपने टिश्यू , डोनर टिश्यू या एक सिंथेटिक मटेरियल को ग्राफ्ट करता है।

आपके गर्भाशय को हटाना (हिस्टेरेक्टॉमी) – Removal of your uterus (hysterectomy) –

कुछ मामलों में गर्भाशय के आगे बढ़ जाने की वजह से डॉक्टर आपको हिस्टेरेक्टोमी की सलाह दे सकता है। हिस्टेरेक्टॉमी की प्रक्रिया आमतौर पर बहुत सुरक्षित होती है, लेकिन किसी भी सर्जरी के साथ जटिलताओं का खतरा तो होता ही है।

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पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स के लिए एक्सरसाइज – Pelvic Organ Prolapse Exercise in hindi

पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स के लिए एक्सरसाइज – Pelvic Organ Prolapse Exercise in hindi

पेल्विक ऑर्गन प्रोलैप्स की समस्या से बचने के लिए आप केगेल व्यायाम, वजन प्रबंधन और भारी वजन ना उठाने का प्रयास करें। उपचार के सफल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है केगेल एक्सरसाइज को ठीक तरह से करना। यह एक्सरसाइज कहीं भी और किसी भी समय की जा सकती है और यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने में भी मदद कर सकती है। आपका चिकित्सक आपको यह निर्देश दे सकता है कि केगेल एक्सरसाइज को उचित तरह से कैसे करना है। तो चलिए देखते है केगेल एक्सरसाइज करने का सही तरीका क्या होता है-

  • सबसे पहले आप अपनी पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को कस लें, जैसे कि आप पेशाब को रोकने का प्रयास कर रही हों और अब इसे 5 सेकंड के लिए होल्ड करने का प्रयास करें।
  • फिर 5 सेकंड का ब्रेक लें और अब इस एक्सरसाइज के तीन सेट दोहराएं, प्रतिदिन कम से कम 10 बार।
  • प्रत्येक बार व्यायाम करने पर आपका अंतिम लक्ष्य 10 सेकंड के लिए संकुचन को रोके रखना होना चाहिए।

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प्रोलैप्स गर्भाशय का प्राकृतिक उपचार कैसे करें – How to treat Prolapse naturally in hindi

प्रोलैप्स गर्भाशय का प्राकृतिक उपचार कैसे करें – How to treat Prolapse naturally in hindi

प्रोलैप्स का उपचार इसके विभिन्न चरणों और गंभीरता पर निर्भर करता है। कुछ प्राकृतिक उपाय प्रोलैप्स गर्भाशय के जोखिम को कम कर सकते हैं और इसे बिगड़ने से रोक सकते हैं। बच्चेदानी बाहर आने के घरेलू उपाय में शामिल है-

  • केगेल एक्सरसाइज को नियमित रूप से और सही ढंग से करना।
  • कब्ज की समस्या को रोकना और उसका उचित उपचार करना।
  • भारी सामान उठाने से बचना।
  • पुरानी खांसी का सही इलाज करवाना।
  • पौष्टिक आहार और व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखना।
  • रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजेन रिप्लेसमेंट थेरेपी पर विचार कर सकती है।
  • यदि प्रोलैप्स के बिगड़ने के लक्षण दिखाई देते है, तो आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर अन्य प्रकार के आवश्यक उपचार ले सकती हैं।

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