सेक्स एजुकेशन

किशोरावस्था में होने वाली समस्याएं, शारीरिक परिवर्तन और टिप्स – Adolescent Changes, Problems and Tips in Hindi

किशोरावस्था में होने वाली समस्याएं, शारीरिक परिवर्तन और टिप्स - Adolescent Changes, Problems and Tips in Hindi

किशोरावस्था लड़के-लड़कियों के जीवन का सबसे नाजुक दौर होता है। यह समय लड़का और लड़की के लिए 12 से 19 वर्ष के बीच रहता है। बढ़ते बच्चों के लिए यह सभी प्रकार की मानसिक शक्तियों के विकास का समय है। इस दौरान बच्चों में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव दिखाई देना शुरू हो जाते हैं। शरीर के अंगों में तमाम परिवर्तनों के साथ ही उनके व्यवहार में भी अंतर आने लगता है। हालांकि, यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि किशोर बहुत जल्दी उनके शरीर और व्यवहार में हो रहे बदलावों को स्वीकार नहीं पाते। ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी अपने किशोर बच्चों के प्रति कई गुना बढ़ जाती है। अगर आपका बेटा या बेटी भी किशोरावस्था की दहलीज पर कदम रखने जा रहा है, तो आज का हमारा ये आर्टिकल पढ़ने से आपको बहुत मदद मिलेगी।

इसमें हम किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन, बदलावों, समस्याओं और किशोरावस्था की प्रमुख विशेषताओं के बारे में बात करेंगे। साथ ही इसमें हम जानेंगे, कि इस अवस्था में युवाओं में होने वाले बदलावों के साथ उन्हें कैसे संभाला जाए और किशोरावस्था की समस्या का समाधान कैसे किया जाता है। लेकिन ये सब जानने से पहले हम आपको बताते हैं कि “किशोरावस्था क्या होती है”।

किशोरावस्था क्या है – What is adolescent age in Hindi

किशोरावस्था क्या है - What is adolescent age in Hindi

किशोरावस्था बचपन और व्यस्कता के बीच की अवधि है। इसमें लड़के और लड़कियों के शरीर में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं। इस दौरान शारीरिक, यौन, संज्ञानात्मक, सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन बच्चों और उनके परिवारों दोनों के लिए एक चुनौती है। विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार बच्चों में ये सभी बदलाव 10 से 19 साल के बीच जारी रहते हैं। हालांकि, किशोरावस्था के कई चरण होते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बात करेंगे।

(और पढ़े – किशोरावस्था की शुरुआत और पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियाँ…)

किशोरावस्था के अलग-अलग चरण – Different stages of adolescence in Hindi

किशोरावस्था के अलग-अलग चरण - Different stages of adolescence in Hindi

किशोरावस्था में हर उम्र के हिसाब से अलग-अलग परिवर्तन होते हैं, जिनके बारे में हम आपको यहां बताने जा रहे हैं।

प्रारंभिक किशोरावस्था 10 से 13 वर्ष

किशोरावस्था के इस चरण के दौरान बच्चे अक्सर तेजी से बढ़ते हैं। कई बदलाव होते हैं, जैसे आर्मपीट और जननांगों के पास बाल बढ़ना, लड़कियों में स्तन का विकास और पुरूषों में अंडकोष बढ़ना भी इसमें शामिल है। इस अवस्था में किशोरों के लिए चीजें या तो सही होती हैं या गलत। इस चरण में ज्यादातर बच्चों को प्राइवेसी की आवश्यकता महसूस होती है। इसलिए इस उम्र में वे परिवार से स्वतंत्र होने के तरीके तलाशने लगते हैं।

मध्य किशोरावस्था 14 से 17 साल

मध्यम किशोरावस्था के दौरान युवाओं में शारीरिक परिवर्तन जारी रहते हैं। उदाहरण के लिए लड़कों की आवाज में बदलाव के साथ मुंहासे विकसित हो सकते हैं। वहीं लड़कियों में रैगुलर पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। इस उम्र में कई किशोर रोमांस और प्रेम संबंधों में दिलचस्पी दिखाने लगते हैं, इसलिए परिवार में उनकी दिलचस्पी कम होने लगती है और वे दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं।

किशोरावस्था का आखिरी चरण 18 से 21 साल

किशोरावस्था के आखिरी चरण तक शरीर का विकास पूरा हो जाता है और कद भी पूरी तरह से बढ़ जाता है। इस उम्र के बाद कद बढ़ने की संभावना बहुत कम होती है। व्यस्कता में प्रेवश करने वाले किशोर स्वयं के व्यक्तित्व की एक मजबूत भावना रखते हैं। भविष्य के फैसलों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। इस उम्र तक दोस्ती और प्यार के रिश्ते स्थिर हो जाते हैं, लेकिन भावनात्मक और शारीरिक रूप से अपने परिवार से अलग हो जाते हैं। हालांकि, कई किशोर इस दौरान अपने माता-पिता के साथ एक नया रिश्ता कायम करते हैं। किशोरावस्था के विभिन्न चरणों की जानकारी तो आपको मिल चुकी है, अब आगे जान सकते हैं किशोरावस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाले अलग-अलग परिवर्तनों के बारे में भी।

(और पढ़े – लड़कियों में किशोरावस्था (टीनएज) में दिखने लगते हैं ये लक्षण…)

किशोरावस्था में होने वाले यौन परिवर्तन – Sexual changes in adolescent age in Hindi

किशोरावस्था में होने वाले यौन परिवर्तन - Sexual changes in adolescent age in Hindi

किशोरावस्था बढ़ते हुए बच्चों यानि लड़की और लड़कों के जीवन का नया अनुभव है। किशोरों द्वारा अनुभव किए गए हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन उन्हें अपनी कामुकता के बारे में अधिक जागरूक बनाते हैं। यौन परिवर्तन संक्रमण चरण के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस अवस्था में किशोर को कामुकता के बारे में विशिष्ट, सटीक जानकारी के साथ-साथ एक सहायक वातावरण की जरूरत होती है, ताकि वह लव और सेक्स के संदर्भ में स्वयं के व्यवहार और भावनाओं को समझ सकें। इसलिए महत्वपूर्ण है, कि कामुकता से संबंधित विषयों पर चर्चा करने के लिए एक खुले वातावरण का निर्माण करें। लेकिन संभोग के बारे में बात करना इतना आसान भी नहीं है। इसलिए किशोर की निजता का सम्मान करते हुए विषय को सही तरीके से दिखाने के लिए सही समय और सही रणनीति का चयन का चयन करना भी बेहद महत्वूपर्ण है।

(और पढ़े – बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा))

किशोरों में होने वाले मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन – Mental and emotional changes occurring in adolescents in Hindi

किशोरों में होने वाले मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन - Mental and emotional changes occurring in adolescents in Hindi

किशोरावस्था का समय ऐसा ही होता है, जब आपके बच्चे मानसिक और भावनात्मक परिवर्तन से गुजरते हैं। इस दौरान बच्चों के व्यवहार में बहुत बदलाव आता है। मनोवैज्ञानिक व मानसिक या फिर भावनात्मक परिवर्तन के दौरान छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, भड़क जाना, विद्रोह करना जैसे बदलाव बच्चे में नजर आ सकते हैं। वहीं हार्मोन में होने वाले बदलावों की वजह से युवाओं को कई तरह के भावनात्मक परिवर्तनों से भी गुजरना पड़ता है।

किशोरावस्था में होने वाले भावनात्मक परिवर्तन

तो सबसे पहले बात करते हैं, किशोरों में होने वाले भावनात्मक परिवर्तनों की। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवस्था में लड़के-लड़कियां अपने स्वयं की तलाश करते हैं और स्वतंत्रता की आवश्यकता महसूस करते हैं। इस उम्र में मित्रता महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके अलावा पीयर प्रेशर और माता-पिता के बीच टकराव पैदा होता है। इस उम्र में मूड स्विंग और भावनाओं में युवा जल्दी बह जाते हैं। इस दौरान किशोर नए अनुभवों की तलाश करते हैं और कभी-कभी ऐसी स्थितियों (जैसे सिगरेट पीना, शराब पीना, ड्रग्स लेना, लापरवाह ड्राइविंग या यौन व्यवहार) के संपर्क में आ जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और समाज के लिए हानिकारक हो सकती हैं।

किशोरावस्था में होने वाले मनोवैज्ञानिक परिवर्तन

बात अगर किशोरों में मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों की करें, तो यह बदलाव हार्मोनल और न्यूरोडवलपमेंट से जुड़ा हुआ है। इस दौरान युवाओं की बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे वे तर्कशील होने लगते हैं। किशोरों फिर चाहे वह लड़की हो या लड़की नैतिक व तार्किक सोच मजबूत होती है। वह तर्कसंगत निर्णय लेने में सक्षम होने लगते हैं। आइए अब एक नजर डालते हैं, किशोरवस्था में लड़के और लड़की में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों पर भी।

किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन – Physiological changes occurring in adolescence in Hindi

किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तन - Physiological changes occurring in adolescence in Hindi

यहां हम आपको किशोरावस्था में होने वाले सामान्य शारीरिक परिवर्तनों के बारे में बताएंगे। इसके बाद लड़की व लड़कों में होने वाले शारीरिक बदलावों की बात करेंगे।

किशोरावस्था में होने वाले सामान्य बदलाव

लड़कियों में किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तन

  • 2 वर्ष की उम्र से ही लड़कियों में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, जो यौवन की शुरूआत मानी जाती है।
  • स्तनों का आकार बढ़ने लगता है।
  • इस दौरान हाइट बढ़ती है।
  • शरीर का आकार भी बढ़ने लगता है, जैसे कमर और कूल्हे चौड़े होने लगते हैं।
  • गुप्तांगों के बाल भी बढ़ने लगते हैं।

लड़कों में किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक परिवर्तन

  • 12 साल की उम्र से पैर, छाती और हाथ के बाल कड़क होने के साथ बढ़ना शुरू हो जाते हैं।
  • अंडकोष बढ़ने लगता है और लिंग भी विकसित होता है।
  • हाइट बढ़ने के साथ छाती और कंधे भी चौड़े होने लगते हैं।
  • स्तनों में हल्का सा विकास होने लगता है।
  • किशोर लड़कों में इस अवस्था में सेक्स हार्मोन का उत्पादन होने लगता है।

किशोरावस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाले तमाम बदलावों के बारे में तो आप जान चुके हैं, अब आगे जानिए कि इन बदलावों के साथ उन्हें किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

(और पढ़े – महिला पुरुष के गुप्तांगों की जानकारी और कार्य…)

किशोरावस्था में लड़कियों में होने वाली समस्याएं – Problems occurring in adolescent girls in Hindi

किशोरावस्था में लड़कियों में होने वाली समस्याएं - Problems occurring in adolescent girls in Hindi

किशोरवस्था लड़कियों में परिवर्तन की उम्र है। इस उम्र में लड़कियों के शरीर में कई बदलाव होते हैं और कई नई समस्याएं भी उभरती हैं, जिन्हें डील करना लड़कियों और पैरेंट्स के लिए भी काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं लड़कियों में किशोरावस्था से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधानों के बारे में।

लड़कियों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की उम्र है किशोरावस्था

इस उम्र में लड़कियों के बीमार होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। टीनएज में उनका शेड्यूल काफी टाइट हो जाता है, जिस कारण वे न तो अच्छी डाइट ले पाती हैं साथ ही उनकी नींद में भी कमी आ जाती है। इस दौरान लड़कियां अपने वजन को लेकर ज्यादा सर्तक हो जाती हैं। कई बार इसी चिंता में उनमें एनोरेक्सिया डिसऑर्डर (ईटिंग डिसऑर्डर) डवलप हो जाता है। इन सभी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बाहर निकालना पैरेंट्स की जिम्मेदारी है। आप उन्हें खाने के साथ कुछ हेल्दी खाने की सलाह दें। इमोशनली और फिजिकली उनके साथ रहें, ताकि वे किसी भी डिसऑर्डर का सामना अच्छे से कर सकें।

किशोरावस्था में सेक्सुअल हेल्थ लड़कियों में बड़ी समस्या

टीनएज में लड़कियां सेक्सुअली काफी एक्टिव हो जाती हैं। बॉयफ्रेंड बनाना, किस करना उनके लिए इस उम्र में नया अनुभव होता है। बिना किसी प्रॉपर गाइडेंस के वे सेक्सुअली एक्टिव हो जाती हैं, फिर भले ही वे इसके लिए पूरी तरह से तैयार ना हों। इसी वजह से कम उम्र में प्रेग्रेंसी के तमाम किस्से सुनने को मिलते हैं। अनवॉन्टेड प्रेग्नेंसी सबसे बड़ा रिस्क है, जिसका सामना ज्यादातर टीनएज गल्र्स को करना होता है। पैरेंट होने के नाते आपका फर्ज है कि आप उन्हें सेफ सेक्स के महत्व को समझाएं। किशोरावस्था में अर्ली प्रेग्नेंसीज को रोकने के लिए अपने बच्चे को इससे जागरूक करना ही एक बेहतर तरीका है।

लड़कियों में डेटिंग और रिलेशनशिप

ये एक ऐसी अजीब सी उम्र होती है, जब बच्चे अपोजिट सेक्स की तरफ अट्रैक्ट होते हैं। यही वजह है, कि आज कम उम्र में ही लड़कियां डेटिंग शुरू करने लगी हैं। कॉम्पीटीशन भी उनकी सोशल लाइफ का एक बड़ा एस्पेक्ट है। इस उम्र में उनमें भावना आने लगती है, कि उनके दोस्तों के पास क्या है और उनके पास क्या नहीं। यहां की बॉयफ्रेंड्स को लेकर भी ये भावना उन्हें परेशान करती है। डेटिंग, रोमांस और सेक्स ये सब ऐसी बातें हैं, जिन पर बात करने में बच्चा कंफर्टेबल फील नहीं करेगा। इसलिए उसे पैरेंट की तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह समझाएं।

लड़कियों को किशोरावस्था में मानसिक बीमारियां करती हैं परेशान

एक रिसर्च के अनुसार किशोरों में 50 प्रतिशत मेंटल डिसऑर्डर की समस्या 14 की उम्र से शुरू हो जाती है। यहां तक की एक तिहाई टीनएजर्स इस उम्र में डिप्रेशन के कारण सुसाइड के शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है, कि ये एक आम लेकिन बहुत गंभीर समस्या है। इस समय टीनएजर के मन में सुपीरियोरिटी की भावना आ जाती है। किसी भी चीज में बेकार प्रदर्शन उन्हें होपलैस बना देता है। स्ट्रेस और प्रेशर उनमें एनजाइटी का कारण बनते हैं। उन्हें इन सभी समस्याओं से उभारने के लिए उनके लिए हेल्दी लाइफस्टाइल बनाना बहुत जरूरी है। पैरेंट्स के नाते आप उनकी समस्याओं पर उनसे बात करें और समाधान भी बताएं। डांटने-फटकारने के बजाए प्यार से बात करें। उनकी फीलिंग का मजाक न बनाएं, बल्कि उन्हें समझने की कोशिश करें कि वे क्या महसूस कर रहे हैं।

(और पढ़े – किशोर गर्भावस्‍था (टीनेज प्रेगनेंसी) क्या है, कारण, लक्षण, खतरे और बचाव…)

किशोरावस्था में लड़कों में होने वाली समस्याएं – Problems in boys in adolescence in Hindi

किशोरावस्था में लड़कों में होने वाली समस्याएं - Problems in boys in adolescence in Hindi

किशोरावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही लड़कियों की तरह लड़कों को भी कई तरह की समस्याओं का अनुभव होता है। उनकी आवाज में भारीपन, दाढ़ी-मूंछ आना जैसे बदलाव होने लगते हैं और कई समस्याओं का सामना भी उन्हें करना पड़ता है। तो चलिए जानते हैं, किशोर लड़कों को किन-किन समस्याओं से गुजरना पड़ता है। (1)

प्यूबर्टी

भारत में 96 प्रतिशत लड़कों में यौवन 9 से 14 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होता है। इस दौरान उनके पेनिस का आकार बढ़ता है (पहले लंबाई में और फिर व्यास में), इसके बाद प्यूबिक हेयर ग्रोथ की समस्या से भी युवा थोड़े परेशान रहते हैं। बता दें, कि इस उम्र में लड़कों की प्रजनन क्षमता का निर्माण होता है।

आवाज में बदलाव आना

किशोरवस्था में लड़कों की आवाज बदलने लगती है। आवाज में मधुरता के बजाए अब भारीपन आ जाता है। यह सब एंड्रोजन के प्रभाव के कारण होता है। 15 साल की उम्र में व्यस्क जैसी आवाज हो जाती है। लेकिन कुछ लड़कों में बढ़ती उम्र के साथ आवाज की पिच में परिवर्तन नहीं होता, जिस कारण उन्हें कई बार लोगों के बीच हास्य का शिकार भी होना पड़ता है।

त्वचा के बालों का न बढ़ना

पहले न दिखाई देने वाले शरीर के मुलायम बाल अनेक भागों पर बड़े, कड़क और घुंघराले दिखाई देने लगते हैं। इस दौरान लड़कों के त्वचा के बालों का न बढ़ना भी एक समस्या है।

किशोर लड़कों में प्रेम संबंध की समस्या

किशोर लड़कों में 12-14 वर्ष की उम्र में प्रेम के भाव उत्पन्न होने लगते हैं। बढ़ती उम्र के साथ प्रेम संबंध की अवधि में कम और ज्यादा समय लगता है। इस दौरान लैंगिंक और सामाजिक प्रतिभा भी बढ़ती है।

यौवन में देरी

किशोरावस्था को यौवन की उम्र कहा जाता है। लेकिन कई लड़कों में यौवन देरी से आता है, जो उनके लिए चिंता की बात है। ऐसा अक्सर पारिवारिक इतिहास के कारण होता है। लड़कों में यौवन में देरी के कारण हैं खराब शरीर, कम आत्म सम्मान, भावनात्मक संकट। ऐसे लड़कों को अक्सर लोगों के चिढ़ाने का सामना करना पड़ता है।

गाइनेकोमैस्टिया

गाइनेकोमैस्टिया उन किशोर लड़कों के लिए चिंता का विषय है, जो अपने स्तन विकास को लेकर शर्मिन्दा रहते हैं। मध्य यौवन में गाइनेकोमैस्टिया आम है। यह लगभग 70 प्रतिशत लड़कों को प्रभावित करता है। हालांकि, इसमें चिंता करने की बात नहीं है। कुछ लड़कों को समय पर, तो कुछ का देरी से स्तन विकास होता है, जिसमें एक से दो साल का समय लग सकता है।

जननांग का विकास

किशोरावस्था में लड़कों के जननांगों में भी परिवर्तन होता है। लेकिन कई लड़कों में जननांग का सही से विकास ना होना बड़ी समस्या है। इसमें लड़के अपने लिंग के आकार को लेकर चिंतित रहते हैं।

इरेक्शन की सामस्या

यौवन के दौरान इरेक्शन की समस्या आम है, लेकिन यह युवाओं के लिए बहुत शर्मनाक हो सकती है। इसमें लिंग नियमित रूप से नींद के दौरान खड़ा हो सकता है। एक बार जब लड़का किशोरावस्था में पहुंचता है, तो यौवन के कारण इरेक्शन बार-बार होता है। इसे क्लोज-फिटिंग अंडरवियर और लंबी टीशर्ट पहनकर छिपाया जा सकता है।

प्यूबिक हेयर न बढ़ना

जननांग बढ़ने के कुछ समय बाद ही प्यूबिक हेयर भी लड़कों में दिखाई देने लगते हैं। लेकिन कुछ लड़कों में इसकी ग्रोथ बहुत धीरे-धीरे होती है, जो उनके लिए एक समस्या है। कुछ लड़कों में देरी से प्यूबिक हेयर बढ़ते हैं, लेकिन अगर सही उम्र में भी यह न बढ़ें, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

फेशियल हेयर न बढ़ना

जघन बालों की उपस्थिति के बाद अगर लड़कों के हाथ, पैर, छाती, पीठ, चेहरे पर हेयर न बढ़ना भी एक बड़ी समस्या है। इस वजह से कई बार लड़कों को अपने दोस्तों के बीच शर्मिन्दा भी होना पड़ता है।

हस्तमैथुन की समस्या

18 वर्ष की आयु से पहले युवा लड़कों में हस्तमैथुन की समस्या होती है। हालांकि, इस उम्र में हस्तमैथुन सामान्य है। इससे कोई शारीरिक या मानसिक बीमारी नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार लड़के ऐसा तब ही करते हैं, जब वे एक्साइटेड फील करें। कई लोग इसे जरूरत से ज्यादा करने लगते हैं, जो इनकी आदत बन जाती है। लेकिन कई बार ऐसा करने के दौरान होने वाला दर्द समस्या का कारण बन सकता है। किशोरों की समस्याओं का समाधान करना पैरेंट्स की जिम्मेदारी है। इसलिए हमने आगे किशोरों की मदद करने के लिए कुछ शानदार सुझाव दिए हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद आप पैरेंट्स होने के नाते इस परिस्थितियों में उन्हें बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।

(और पढ़े – हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान जो आपको जानना है जरूरी…)

किशोरावस्था में बच्चों की मदद करने के टिप्स – Tips to help children in adolescence in Hindi

किशोरावस्था में बच्चों की मदद करने के टिप्स - Tips to help children in adolescence in Hindi

अगर आप एक किशोर बच्चों के माता-पिता हैं, तो इस संवेदनशील अवधि के दौरान अपने परिवार और बच्चों के बीच बैलेंस बनाए रखने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं।

  • यह ध्यान रखें, कि भले ही आपके बच्चे अब पूरी तरह से स्वतंत्र हों, लेकिन उन्हें अभी भी आपकी आवश्यकता है। इसलिए, उनकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहें।
  • उन्हें समझाएं, कि इस उम्र में शारीरिक परिवर्तन होना सामान्य है। उन्हें ऐसा महसूस कराएं कि वह आपसे किशोरवस्था से जुड़े सवाल करने से हिचके नहीं।
  • किशोरावस्था में हो रहे बदलावों को लेकर बच्चों से मजाक न करें और न ही उन्हें इसके प्रति शर्मिंदगी महसूस कराएं।
  • यही सही उम्र है, जब आप उनसे संभोग के दौरान होने वाले संक्रमण और गर्भावस्था के बारे में उनसे बात करें।
  • किशोरों को इस अवस्था में थोड़ी स्वतंत्रता और निजता की आवश्यकता होती है। इसलिए उन्हें एक स्पेस या अलग कमरा देने की कोशिश करें।
  • बच्चों की किशोरावस्था बहुत ही नाजुक उम्र होती है। इस अवस्था में कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें।
  • अपने किशोर बच्चों की बात सुनें और उनके हमदर्द बनें। अपने आप को उनकी जगह पर रखकर देखें और फिर उनकी बात को सुनें। टकराव से बचने के लिए आदेशों के बजाय विकल्पों का सुझाव दें।
  • आप किशोर को महसूस कराएं, कि वो आपके लिए महत्वपूर्ण है। उनसे उन गतिविधियों को साझा करने का सुझाव दें, जो आपके किशोर को पसंद है। यह आप दोनों की बॉन्डिंग को मजबूत बनाएगा।
  • अपने किशोर की उन सभी चीजों में जैसे दोस्तों, बातों और शौक में दिलचस्पी दिखाएं, जिसे वो महत्व देते हैं।

किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तन और समस्याओं की जानकारी तो आपको हमारे इस लेख में मिल गई होगी। देखा जाए, तो किशोरावस्था से निपटना आपके और आपके किशोर के लिए इतना आसान नहीं है। इस दौरान आपका बच्चा किसी प्रकार की कठिनाइयों का सामना कर रहा है, या ऐसे व्यवहार को अपना रहा है, जो आपके लिए चिंता का विषय है, तो उसकी मदद करने में जरा भी संकोच न करें। यह तथ्य है, कि अधिकांश लोगों के लिए किशोरावस्था एक कठिन समय है। इस समय उसे आपके सहयोग, विश्वास और प्यार की जरूरत है। ऐसे में लेख में दिए कुछ सुझावों का पालन कर आप उनके जीवन के इस पड़ाव को आसान बना सकते हैं।

इसी तरह की अन्य जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक करें। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।

आपको ये भी जानना चाहिये –

Leave a Comment

Subscribe for daily wellness inspiration