अंडकोष (वृषण) क्या है, कार्य और रोग - What Is Testicles, Function And Diseases In Hindi
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अंडकोष (वृषण) क्या है, कार्य और रोग – What Is Testicles, Function And Diseases In Hindi

अंडकोष (वृषण) क्या है, कार्य और रोग - What Is Testicles, Function And Diseases In Hindi

Testicles (Testes) In Hindi: अंडकोष (वृषण), प्रत्येक पुरुष की प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। अंडकोष पुरूष के नीचे एक थैली होती है। इसे स्क्रोटम कहा जाता है। इस थैली की त्वचा ढीली होती है। प्रत्येक पुरुष में 2 अंडकोष होते हैं जिसके अंदर वृषण होते है यह पुरुष सेक्स हार्मोन के उत्पादन, सेक्स ड्राइव (Sex Drive), प्रजनन क्षमता और मांसपेशियों तथा हड्डियों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है। अंडकोष के स्वास्थ्य में खराबी शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में कमी का कारण बन सकती है। जिसके परिणामस्वरुप पुरुष बांझपन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अतः मुख्य रूप से प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अंडकोष के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।

आज के इस लेख में आप जानेंगे कि अंडकोष (वृषण) क्या है, इसके कार्य क्या हैं तथा इससे सम्बंधित रोगों के बारे में।

विषय सूची

1. अंडकोष क्या है – What Is Testicles (Testes) In Hindi
2. अंडकोष का कार्य – Testicles Function In Hindi
3. अंडकोष की बीमारियां – Testicles Diseases In Hindi
4. अंडकोष को स्वस्थ रखने के तरीके – Healthy Testicles Tips In Hindi

अंडकोष क्या है – What Is Testicles (Testes) In Hindi

अंडकोष (Testicles), जिसे वृषण (Testes) भी कहा जाता है, यह पुरुष प्रजनन प्रणाली के अंग हैं। यह अंडे के आकार के होते हैं, तथा त्वचा की एक थैलीनुमा संरचना में स्थित होते हैं। इस त्वचा की थैलीनुमा संरचना को अंडकोश की थैली (Scrotum) कहा जाता है। इस थैली की त्वचा ढीली होती है। जो गर्मियों में अधिक बढ़कर लटक जाती है तथा सर्दियों में सिकुड़कर छोटी होती है। एक आदमी में 2 अंडकोष होते हैं, तथा प्रत्येक अंडकोष अंडे के आकार का लगभग 5 सेमी लंबा होता है। अंडकोश की लंबाई 5 cm सेमी और चौड़ाई 2.5 सेमी होती है। अंडकोष (वृषण) पुरुष प्रजनन अंग जैसे- लिंग और गुदा के मध्य अंडकोश की थैली (Scrotum) में लटके हुए होते हैं। यह शरीर के मुख्य तापमान की तुलना में अपने तापमान को दो डिग्री सेंटीग्रेड कम तापमान पर समायोजित करके रखते हैं।

कम तापमान होने का कारण यह है कि इस कम तापमान पर शुक्राणु का उत्पादन और गुणवत्ता उच्चतम होती है। अंडकोष (Testicles) मुख्य रूप से शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) नामक पुरुष सेक्स हार्मोन का उत्पादन करते हैं। टेस्टोस्टेरोन हार्मोन सेक्स ड्राइव (Sex Drive), प्रजनन क्षमता (Fertility) तथा मांसपेशियों और हड्डियों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है।

वे पुरूष जो आग के सामने कार्य करते है, अधिक गर्म पानी से स्नान करते हैं। या टाइट कच्छा पहनते हैं। उनके अंडकोष से शुक्राणु कम मात्रा में बनते है।

(और पढ़ें – अंडकोष (वृषण) में दर्द के कारण, लक्षण, जांच, उपचार और रोकथाम)

अंडकोष का कार्य – Testicles Function In Hindi

अंडकोष (वृषण) का मुख्य कार्य शुक्राणु का उत्पादन और भंडारण करना है। इसके अतिरिक्त अंडकोष का एक ओर महत्वपूर्ण कार्य यह है कि यह टेस्टोस्टेरोन या एण्ड्रोजन (Androgens) नामक पुरुष हार्मोन का निर्माण करता है। वृषण को अंडाकार आकार लोब्यूल्स (Lobules) नामक ऊतक प्रदान करते हैं। किस्सी पुरुष में अंडकोष (वृषण) के महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं:

  • अंडकोष शुक्राणु के उत्पादन का कार्य करते हैं। शुक्राणु का निर्माण अंडकोष के वीर्योत्पादक (Seminiferous) नलिकाओं में होता है। प्रत्येक अंडकोष में लगभग 700 से 900 ट्यूब (नलिकाएं) होती हैं। प्रत्येक ट्यूब की लंबाई और चौड़ाई कुछ-कुछ बाल के समान होती है। यदि इन सभी ट्यूब को एक साथ जोड़ा जाये, तो इसकी कुल लम्बाई एक फुटबॉल पिच से अधिक होगी। अतः जब शुक्राणु का उत्पादन वीर्योत्पादक (Seminiferous) नलिकाओं में होता हैं, तो यह अधिवृषण (Epididymis) में से गुजरते हैं। अधिवृषण (Epididymis) एक लंबी कुंडलित नलिका होती है, जिसमें शुक्राणु परिपक्व होते हैं। शुक्राणु परिपक्व होने के बाद वास डेफरेंस (Vas Deferens) के माध्यम से स्खलन के दौरान रिलीज़ होने के लिए तैयार होते हैं। वास डेफरेंस में वीर्य पुटिकाओं (Seminal Vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा तरल पदार्थ, शुक्राणु कोशिकाओं के साथ मिलकर वीर्य (Semen) का निर्माण होता है। यह वीर्य स्खलन के दौरान मूत्रमार्ग के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है।
  • अंडकोष (Testicles), एण्ड्रोजन नामक पुरुष हार्मोन का उत्पादन भी करते हैं। एण्ड्रोजन पुरुष प्रजनन प्रणाली को नियंत्रित करने और शरीर में मर्दाना विकास जैसे- दाढ़ी और एक गहरी आवाज आदि के लिए जिम्मेदार होता है। इसके अतिरिक्त एण्ड्रोजन यौन कार्यों को भी प्रभावित करता है। टेस्टोस्टेरोन, एण्ड्रोजन का सबसे सामान्य रूप है। यह पुरुष जननांगों के विकास और शुक्राणु उत्पादन की वृद्धि के लिए आवश्यक होता है। एक स्वस्थ पुरुष के अंडकोष प्रति दिन लगभग 6 मिलीग्राम तक टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन कर सकते हैं।

(और पढ़ें – टेस्टोस्टेरोन हार्मोन क्या है, कमी के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव)

अंडकोष की बीमारियां – Testicles Diseases In Hindi

पुरुषों के अंडकोष अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। अंडकोष से सम्बंधित बीमारियाँ या तो जन्म के दौरान या अन्य स्थितियों के परिणामस्वरूप उत्पन्न हो सकती हैं। अंडकोष से सम्बंधित बीमारियाँ निम्न है, जैसे:

  • हाइड्रोसील (Hydrocele) – पुरुषों में अक्सर अंडकोष के बढ़ने की समस्या होती है जिसे आमतौर पर हाइड्रोसील की समस्या भी कहा जाता है। हाइड्रोसील तब होता है जब एक अंडकोष के आसपास गुहाओं में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। यह समस्या चोट या सूजन के कारण उत्पन्न हो सकती है। हाइड्रोसील (Hydrocele) की स्थिति में अंडकोश में भारीपन, सूजन, दर्द आदि लक्षणों का अनुभव किया जा सकता है।
  • रीट्रेकटाइल टेस्टिकल (Retractile Testicle) – रीट्रेक्टाइल टेस्टिकल (Retractile Testicle) तब होता है, जब एक अंडकोष (टेस्टिकल) ग्रोइन एरिया (Groin Area) और अंडकोष की थैली के बीच चला जाता है। आमतौर पर, इस स्थिति में एक डॉक्टर अंडकोष को वापस अपनी उचित स्थिति में ला सकता है, लेकिन अगर यह अंडकोष एक ही स्थिति में अटक (Stuck) जाता है, तो इस समस्या को असेंडिंग अंडकोष (Ascending Testicle) या अनडिसेंडेड वृषण (Undescended Testicle) कहा जाता है। इस समस्या के इलाज के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है।
  • अनडिसेंडेड वृषण या गुप्तवृषणता (Undescended Testicle (Cryptorchidism)) – यह जन्म से पहले एक या दोनों अंडकोष का स्क्रोटम (Scrotum) में न गिराने की स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाली एक समस्या है। आमतौर पर, प्रत्येक पुरुष दो अंडकोष के साथ पैदा होता है। भूर्ण निर्माण के समय यह अंडकोष, पेट में पाए जाते हैं, और सातवें महीने के दौरान यह अंडकोष की थैली (Scrotum) में गिर जाते हैं। कभी-कभी, अंडकोष, स्क्रोटम में नहीं गिरते हैं, जिसके कारण पैदा होने वाला बच्चा अनडिसेंडेड वृषण (Undescended Testicle) की समस्या के साथ पैदा होता है।
  • वृषण मरोड़ (Testicular Torsion Or Twisted Testicle) – यह अंडकोष में लगने वाली चोट के कारण उत्पन्न होने वाली एक दुर्लभ समस्या है। वृषण मरोड़ (Testicular Torsion) तब होता है, जब वृषण की चोट या ज़ोरदार गतिविधि के कारण स्पर्मेटिक कोर्ड (Spermatic Cord) मुड़ जाती है। यह स्थिति किशोर लड़कों को अधिक प्रभावित करती है। यह मरोड़ अंडकोष को रक्त की आपूर्ति, तंत्रिका कार्य और शुक्राणु परिवहन आदि गतिविधिओं में रूकावट उत्पन्न करती है। यह स्थिति अंडकोश में दर्द, सूजन, अधिक पेशाब जाना, जी मिचलाना आदि लक्षण प्रगट करती है।
  • अण्डकोष में सूजन (Orchitis) – ऑर्काइटिस (Orchitis), अंडकोष की सूजन को प्रगट करने वाली स्थिति है। एपिडीडिमाइटिस (Epididymitis) की तरह ही अंडकोष की सूजन (Orchitis) अक्सर एक यौन संचारित रोग के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है। वृषण में दर्द और संवेदनशीलता, बुखार, जी मिचलाना और उल्टी आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं। बैक्टीरियल और वायरल दोनों प्रकार के संक्रमणों से ऑर्काइटिस (Orchitis) की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अंडकोष की सूजन आमतौर पर 7 से 10 दिनों में गायब हो जाती है।
  • अंडकोष में कैंसर (Testicular Cancer) – अंडकोष की सभी समस्याओं में सबसे अधिक गंभीर स्थिति वृषण कैंसर (Testes Cancer) है। यह समस्या आमतौर पर 15 और 34 साल के पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। अंडकोष में एक कैंसरग्रस्त ट्यूमर पास वाले ऊतकों में विकसित होकर शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह कैंसर आमतौर पर शुक्राणु पैदा करने में मदद करने वाली ट्यूबलर टेस्टिकल (Tubular Testicle) संरचनाओं से शुरू होता है।
  • हाइपोगोनैडिज्म (Hypogonadism) – हाइपोगोनाडिज्म (Hypogonadism) यह एक वृषण सम्बंधित समस्या है जो शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन में कमी का कारण बनती है। इस स्थिति से सम्बंधित व्यक्ति का मस्तिष्क, हार्मोन उत्पादन को ठीक तरह से उत्तेजित नहीं कर पाता है। यह स्थिति जन्मजात होने के अलावा चोट, संक्रमण या अन्य स्थितियां- जो कि टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को प्रभावित करती हैं, के कारण भी उत्पन्न हो सकती है।
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter’s Syndrome) – यह एक आनुवांशिक स्थिति है जो अंडकोष को सामान्य रूप से विकसित होने से रोकती है। इस स्थिति में पुरुष एक अतिरिक्त X गुणसूत्र के साथ पैदा होता है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम, टेस्टोस्टेरोन के कम उत्पादन का कारण बनती है।

अंडकोष को स्वस्थ रखने के तरीके – Healthy Testicles Tips In Hindi

अंडकोष से सम्बंधित स्वास्थ्य समस्याएँ शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन की गुणवत्ता और मात्रा में कमी का कारण बनती हैं। अतः उत्पन्न होने वाली समस्याओं से बचने के लिए अंडकोष का स्वस्थ होना आवश्यक होता है। संक्रमण, तनाव, धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन और असंतुलित आहार किसी भी पुरुष के प्रजनन स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं, अतः इन सभी कारकों से बचाव आवश्यक होता है। शरीर के सामान्य तापमान से लगभग 2 डिग्री कम तापमान पर अंडकोष को ठंडा रखकर शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है। अतः कोई भी व्यक्ति निम्न तरीकों को अपनाकर अंडकोष के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है, जैसे:

  • महीने में एक बार अंडकोष का स्वतः परीक्षण करना चाहिये।
  • नियमित रूप से नहाना चाहिए तथा नहाने के लिए अधिक गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • अंडकोष की थैली को ठन्डे पानी से साफ करना चाहिए।
  • नहाने के बाद लिंग और अंडकोश की थैली को हमेशा सूखा रखना चाहिए।
  • ढीले और आरामदायक कपड़े पहनना चाहिए।
  • नियमित तथा संतुलित व्यायाम करना चाहिए।
  • तनाव से बचना चाहिए।
  • धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सेक्स करते समय प्रोटेक्शन (कंडोम) पहनना चाहिए।

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