शुक्राणु क्या है, कैसे बनते है, कार्य और संचरना – What is Sperm – Function Definition and Structure in Hindi

शुक्राणु क्या है, कैसे बनते है, कार्य और संचरना – What is Sperm – Function Definition and Structure in Hindi
Written by Daivansh

Sperm in hindi स्पर्म या शुक्राणु, पुरुषों में प्रजनन (reproductive) कोशिका होती है, जिसे एक व्यक्ति की उत्तेजना के समय वीर्य संबंधी तरल या वीर्य के साथ निष्कासित किया जाता है। मनुष्यों में, शुक्राणु बच्चे के लिंग को निर्धारित करता है। इस लेख में आप जानेंगे शुक्राणु क्या है, शुक्राणु कैसे बनते है, शुक्राणु की संरचना, शुक्राणु की संख्या, शुक्राणु के कार्य के बारे में।

शुक्राणु (Sperm) का कार्य निषेचन की क्रिया के दौरान अंडाणु कोशिका को निषेचित करना है। स्पर्मेटोजोआ गर्भावस्था के 9 महीने के दौरान गर्भ में भ्रूण के विकसित होने के लिए एक नए जीव जिसे युग्मनज या गैमीट (zygote) कहा जाता है, का निर्माण करता है। मानव शुक्राणु कोशिकाएं हैंप्लोइड (haploid) हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें 23 गुणसूत्र होते हैं।

स्पर्म या शुक्राणु मानव प्रजनन में सहायता करते है। इनके बिना मानव प्रजनन संभव नहीं है।

  1. शुक्राणु क्या है – Shukranu Kya Hota Hai, What is Sperm in Hindi
  2. शुक्राणु कैसे बनते है – shukranu kaise banate hai
  3. स्पर्म की संरचना – Structure of human sperm in Hindi
  4. मानव शुक्राणु का जीवनकाल – lifespan of human sperm in Hindi
  5. शुक्राणु किन चीजों से मिलकर बनता है – What is sperm made of in Hindi
  6. शुक्राणु के कार्य – Function of a Sperm in Hindi
  7. स्पर्म से सम्बंधित रोग और दोष – Sperm diseases in Hindi
  8. शुक्राणु की संख्या, स्पर्म काउंट क्या है – Shukranu Ki Sankhya Kitni Hoti Hai in Hindi
  9. स्पर्म या शुक्राणु की गतिशीलता – speed of sperm in Hindi

शुक्राणु क्या है – Shukranu Kya Hota Hai, What is Sperm in Hindi

शुक्राणु क्या है - Shukranu Kya Hota Hai, What is Sperm in Hindi

स्पर्म या शुक्राणु कोशिकाएं पुरुष यौन कोशिकाएं (male sex cells) होती हैं। जिनका प्रमुख कार्य महिला यौन कोशिकाओं (female sex cell) के साथ मिलकर या जुड़कर पूरी तरह से एक नया जीव बनाना है। शुक्राणु को वीर्यपात के दौरान वीर्य संबंधी तरल (semen) के साथ निष्कासित किया जाता है।

पुरुषों में शुक्राणु (स्पर्मेटोजोआ) का उत्पादन वृषण (testis) में होता है, जबकि महिला के अंडाशय में ओसाइट्स (oocytes) या अंडाणु कोशिकाएं उत्पन्न होती हैं। जब एक अंडाणु और शुक्राणु एकजुट होते हैं, तो वे एक जायगोट (zygote) बनाते हैं, जो एक embryo में विकसित होता है, और बाद में भ्रूण (fetus) के रूप में विकसित हो जाता है।

पुरुषों की शुक्राणु कोशिका, नई जीव (भ्रूण) के लिंग को निर्धारित करती है। इसका मतलब है कि शुक्राणु या तो Y गुणसूत्र या X गुणसूत्र ले सकता है, जबकि अंडाणु कोशिकाओं में हमेशा X गुणसूत्र होता है। इसलिए लड़का या लड़की का होना पूरी तरह पुरुष के गुणसूत्र पर निर्भर करता है।

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शुक्राणु कैसे बनते है – shukranu kaise banate hai

लिंग के नीचे की तरफ एक अंडकोश (scrotum) की थैली होती है। अंडकोश पुरुष हार्मोन टेस्‍टोस्‍टेरोन और शुक्राणुओं का उत्पादन करते हैं। स्खलन (ejaculation) पर शुक्राणुओं को मूत्र मार्ग से मुक्त किया जाता है। यौन संबंध के दौरान, लिंग गर्भाशय (cervix) के पास होता है, जहां से शुक्राणु आगे की ओर जाते हैं और अंडाशय (ovum) तक पहुंचते हैं। अंडकोश (testicles) के अंदर उत्पादित शुक्राणुओं को परिपक्वता के लिए वृषण (testes) से अधिवृषण (epididymis) में आ जाते हैं। यहां पर शुक्राणु लगभग 15-20 दिनों तक संग्रहीत रहते है अगर उन्हें तो (सेक्स या हस्तमैथुन द्वारा) बाहर नहीं किया जाता है।

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स्पर्म की संरचना – Structure of human sperm in Hindi

स्पर्म की संरचना - Structure of human sperm in Hindi

वैज्ञानिक एंटनी वैन लीवेंहोइक ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सन् 1677 में सबसे पहले एक शुक्राणु कोशिका की संरचना का वर्णन किया था। सामान्यतः सभी स्तनीयजन्तुओं में शुक्राणुजन (spermatozoa) की संचरना में कुछ हिस्से सामान्य होते है, तथा उनकी संचरना में बहुत कम अंतर होता है।

मानव शुक्राणु एकमात्र ऐसी कोशिका है जिनमें फ्लैगेला (flagella) पाया जाता है। स्पर्म मुख्यता तीन भागों से बने होते हैं: सिर, मध्य-भाग और पूंछ।

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सिर (Head)

सिर की एक अंडाकार जैसी संरचना होती है, जिसका आकार 5 से 8 µm (माइक्रोन) तक है। यह दो भागों से मिलकर बना है:

अग्रपिण्डक (Acrosome): इस अंग का आकार शुक्राणु के सम्पूर्ण सिर का 40% से 70% होता है, और यह शुक्राणु कोशिका के एक छोर पर स्थित होता है। इसमें प्रोटीलोइटिक एंजाइम (proteolytic enzymes) पाए जाते हैं जो अंडाणु कोशिका की बाहरी परत को नष्ट करने में मदद करते हैं, जिससे शुक्राणु, अंडाणु में आसानी से प्रवेश कर सके।

नाभिक (Nucleus): नाभिक में शुक्राणु कोशिका के सभी 23 गुणसूत्र पाए जाते हैं, मतलब इसमें नये जीव की आधी आनुवंशिक सूचनाएं होती हैं। शुक्राणु कोशिका का केवल नाभिक ही अंडाणु कोशिका में प्रवेश करता है। यह शुक्राणु का एक प्रमुख हिस्सा है, क्योंकि यह अंडाणु के नाभिक के साथ एकजुट होकर 46-क्रोमोसोम सेल बनता है, जिसे ज़ीगोट (zygote) कहा जाता है।

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गर्दन और मध्यम भाग (Neck and middle-piece)

  • मध्य भाग और गर्दन शुक्राणु के वे भाग हैं जो सिर और पूंछ के बीच पाए जाते हैं। इनका कार्य शुक्राणु कोशिका के दोनों सिरों को आपस में जोड़ना है।
  • गर्दन में कुंडलित रूप में लाखों माइटोकॉन्ड्रिया व्यवस्थित होते हैं। इसका प्रमुख कार्य शुक्राणु को मादा प्रजनन क्षेत्र में उतारने के लिए, कशाभिका (flagellum) द्वारा आवश्यक ऊर्जा प्रदान करना है।

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पूंछ (Tail)

  • शुक्राणु में पूंछ एक लंबी संरचना है, जिसे कशाभिका (flagellum) के नाम से भी जाना जाता है। इसका मुख्य कार्य शुक्राणु को सांप जैसी गतिशीलता प्रदान करना है।
  • पूंछ की लंबाई लगभग 50 µm होती है। यह शुकाणु को लगभग 3 मिलीमीटर प्रति मिनट तैराकी वेग से जाने की अनुमति देती है।
  • शुक्राणु की पूंछ में दोष या परिवर्तन उत्पन्न होना, पुरुष प्रजनन समस्याओं का कारण बन सकता है, जिससे अस्थेनोजोस्पर्मिया (asthenozoospermia) सबसे अधिक होता है।

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मानव शुक्राणु का जीवनकाल – lifespan of human sperm in Hindi

वीर्यपात (ejaculation) के बाद, अधिकांश शुक्राणु महिला के जननांग पथ के बाहर कुछ मिनटों में ही मर जाते हैं। यदि स्पर्मेटोज़ा (spermatozoa) मादा प्रजनन प्रणाली (गर्भाशय ग्रीवा) में प्रवेश करती है, तो वे 1-2 दिनों तक जीवित रह सकते हैं, और अधिक से अधिक 5 दिनों तक। तथा प्रयोगशाला स्थितियों के तहत ये 7 दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

इसलिए, निष्कर्ष के रूप में कह सकते है कि मानव शुक्राणुओं का जीवनकाल 24-48 घंटे है, लेकिन इनका यह जीवनकाल पर्यावरण की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

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शुक्राणु किन चीजों से मिलकर बनता है – What is sperm made of in Hindi

वास्तव में, वीर्य पुटिका (seminal vesicles) से निष्कासित वीर्य में 65-75% निम्न तरल पदार्थ शामिल हैं:

  • अमीनो अम्ल
  • एंजाइम
  • प्रोटीन
  • विटामिन सी
  • साइट्रेट (Citrate)
  • फ्लाविन्स (Flavins)
  • फ्रुक्टोज
  • प्रोस्टाग्लैंडिंस Prostaglandins
  • Phosphorylcholine

संक्षेप में, वीर्य आमतौर पर सफेद या भूरे रंग के रंग के साथ पारदर्शी होता है, कभी-कभी पीला होता है।

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शुक्राणु के कार्य – Function of a Sperm in Hindi

शुक्राणु के कार्य - Function of a Sperm in Hindi

शुक्राणु का मुख्य कार्य निम्न है:

  • पैतृक अनुवांशिक सामग्री का निर्वाह करना
  • अंडाशय को सक्रिय करना है।
  • बच्चे के लिंग का निर्धारित करता है
  • अंडाणु कोशिका के साथ मिलकर एक नये जीव जिसे जायगोट (zygote ) कहते हैं, का निर्माण करना।

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स्पर्म से सम्बंधित रोग और दोष – Sperm diseases in Hindi

स्पर्म या शुक्राणु कोशिका के रोग या दोष बहुत अधिक सामान्य होते हैं। यह रोग और दोष, शुक्राणु कोशिका की संरचना में उत्पन्न होते हैं, जो पुरुषों में बांझपन का कारण बन सकते हैं, जिससे निषेचन की क्रिया रुक जाती है।

टेराटोज़ोस्पर्मिया (Teratozoospermia) एक सामान्य विकृति है, जो शुक्राणु के आकार को प्रभावित करती है। इस दोष के कारण शुक्राणु कोशिकाओं का आकार बदल जाता है (उदाहरण के लिए, 2 सिर वाले शुक्राणु कोशिकाओं में परिवर्तन)। यह दोष, सिर, गर्दन, पूंछ या फिर एक ही समय में कई भागों में पाया जा सकता है।

शुक्राणु कोशिका, फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube) की ओर बढ़ने के लिए फ्लैगेला (flagella) का उपयोग करती है; अगर फ्लैगेला क्षतिग्रस्त हैं या फिर काम नहीं कर रहे हैं, तो शुक्राणु कभी डिंब (egg) से नहीं मिलेगा। जिसके परिणामस्वरूप निषेचन नहीं होगा।

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शुक्राणु की संख्या, स्पर्म काउंट क्या है – Shukranu Ki Sankhya Kitni Hoti Hai in Hindi

शुक्राणु की संख्या, स्पर्म काउंट क्या है - Shukranu Ki Sankhya Kitni Hoti Hai in Hindi

सामान्यतः प्रति मिलीलीटर में 15 मिलियन से लेकर 200 मिलियन या इससे अधिक स्पर्म या शुक्राणु हो सकते है। यदि 15 मिलियन से कम शुक्राणु प्रति मिलीलीटर में या 39 मिलियन से कम शुक्राणु प्रत्येक वीर्यपात में पाए जाते हैं, तो इस स्थिति को शुक्राणु की कमी माना जाता है।

  • खराब शुक्राणु संख्या : 10 मिलियन प्रति मिलीलीटर से नीचे।
  • बहुत कम शुक्राणु संख्या : 5 मिलियन से कम प्रति मिलीलीटर।

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स्पर्म या शुक्राणु की गतिशीलता – Speed of sperm in Hindi

स्पर्म या शुक्राणु का लगभग 3 मिलीमीटर प्रति मिनट तैराकी वेग होता है। और यह वेग शुकाणु को उसकी पूंछ प्रदान करती है।

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