कालाजार (काला ज्वर) होने के कारण, लक्षण, इलाज एवं बचाव – kala Azar (Black fever) causes symptoms and treatment in Hindi




कालाजार (काला ज्वर) होने के कारण, लक्षण, इलाज एवं बचाव - kala Azar (Black fever) causes symptoms and treatment in Hindi
Written by Daivansh

What is kala Azar in hindi काला अजार परजीवियों से होने वाली एक बीमारी है और इस परजीवी का नाम लिशमेनिया(Leishmania parasite) है। यह परजीवी आमतौर पर संक्रमित सैंड फ्लाई के शरीर में रहते हैं। संक्रमित सैंड फ्लाई के काटने पर लिशमेनियासिस ((Leishmaniasis) इंसान के शरीर में फैल जाता है और उसे काला अजार हो जाता है। कालाजार या काला ज्वर के इलाज के लिए उचित संसाधनों की कमी होने से पीड़ित मरीज का सही ढंग से इलाज नहीं हो पाता है। इस आर्टिकल में हम आपको कालाजार होने के कारण (causes of kala Azar in hindi) कालाजार के लक्षण (symptoms of kala Azar in hindi) कालाजार का इलाज (treatments for kala Azar in hindi) और काला अजार से बचने के उपाय (kala Azar prevention in Hindi) भी बताएँगे।

विशेषज्ञों के अनुसार काला ज्वर(kala Azar) एक खतरनाक बीमारी है। मलेरिया के बाद परजीवियों से फैलने वाली यह दूसरी बीमारी है जिसके कारण इंसान की मौत भी हो जाती है।

काला अजार आमतौर पर तीन प्रकार का होता है- त्वचीय (cutaneous) आंत (visceral )और श्लेष्मिक(mucocutaneous )। लीशमैनिया परजीवी की विभिन्न प्रजाति काला अजार की बीमारी उत्पन्न करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 20 लीशमैनिया प्रजातियां है जो रोगों को मनुष्यों को प्रसारित करती हैं।

1. कालाजार के कारण – kala Azar Causes in hindi
2. कालाजार के लक्षण – kala Azar Symptoms in hindi
3. काला जार का इलाज – kala Azar Treatments in hindi
4. कालाजार से बचाव के उपाय – kala Azar prevention in Hindi

कालाजार होने के कारण – Causes of kala Azar in hindi

कालाजार होने के कारण - causes of kala Azar in hindi

जैसा कि हम आपको ऊपर ही बता चुके हैं कि काला अजार (black fever) लिशमैनिया प्रजाति के प्रोटोजन परजीवी (protozoan parasites)से होता है। जब सैंड फ्लाई किसी व्यक्ति को काट लेती है तो यह बीमारी हो जाती है। इस बीमारी का परजीवी मादा सैंड फ्लाई (एक प्रकार की मक्खी) के शरीर में रहता है और वहीं पर अपनी संख्या भी बढ़ता है। कालाजार (Black Fever) के परजीवी आर्द्र (humid) या नम वातावरण में ज्यादा एक्टिव हो जाता है और गर्म महीनों में रात, शाम और भोर में भी यह परजीवी सबसे अधिक संक्रमित करता है।

कुत्ते जैसे घरेलू जानवर में इस परजीवी की भरमार होती है। कुत्ते के अलावा दूसरे जानवरों के शरीर में काला अजार के परजीवी उत्पन्न होते हैं और फिर जानवरों से सैंड फ्लाई के शरीर में विकसित होते हैं और ये सैंड फ्लाई फिर इंसानों को काटकर उनके शरीर में इन परजीवियों को छोड़ देती हैं।

किसी को खून देने से या एक ही इंजेक्शन कई व्यक्तियों को लगाने से यह परजीवी कई व्यक्तियों में एक साथ फैल जाता है।

कालाजार के लक्षण – Symptoms of kala Azar in hindi

काला अजार (black fever)का परजीवी लिशमैनिया काफी लंबे समय तक मनुष्य के शरीर में रहने के बाद भी न तो उन्हें जल्दी बीमार करता है ना ही उसके शरीर में होने के कोई विशेष संकेत मिलते हैं। कालाजार के लक्षण उसके परजीवी के प्रकार पर निर्भर करते हैं।

अगर त्वचीय कालाजार (Cutaneous kala Azar) होता है तो इस बीमारी में स्किन अल्सर (skin ulcer) हो जाता है जिसमें कि दर्द नहीं होता है। सैंड फ्लाई के काटने के कुछ हफ्तों बाद ही त्वचीय काला ज्वर के लक्षण दिखाई पड़ते हैं। जब कि कभी-कभी ऐसा भी होता है कि इसके कुछ लक्षण कई महीनों या सालों तक नहीं दिखाई देते हैं।

आंत के कालाजार या काला ज्वार (Mucocutaneous kala Azar) में त्वचा के संक्रमित होने के एक से पांच साल के बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। इस बीमारी में सर्वप्रथम मुंह में अल्सर होता है इसके बाद नाक और फिर होठ को भी घेर लेता है। नाक का लगातार बहना या हमेशा भरे रहना, नाक से खून बहना और श्वसन में दिक्कत होना आंत के काला अजार के लक्षण होते हैं।

श्लेष्मिक कालाजार (Visceral kala Azar ) का लक्षण सैंड फ्लाई द्वारा शरीर में परजीवी छोड़ने के कई महीनों बाद तक भी नहीं दिखता है। जबकि कुछ मामलों में यह दो से छह महीनों के बीच ही दिखाई देने लगता है। श्लेष्मिक काला अजार में वजन घटने लगता है, इंसान कमजोरी मससूस करता है, कई हफ्ते या महीने तक बुखार बना रहता है, प्लीहा (spleen) बड़ी हो जाती है, ब्लड सेल घटने लगती हैं, रक्तस्राव होने लगता है, निम्फ नोड में सूजन आ जाता है और दूसरे तरह के भी कई संक्रमण हो जाते हैं।

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कालाजार का इलाज – Treatments for kala Azar in hindi

काला अजार के इलाज के लिए एम्फोटेरिसिन बी(amphotericin B) जैसी एंटीपैरासिटिक दवा दी जाती है। लेकिन पहले डॉक्टर मरीज की जांच करता है फिर उसी के अनुसार वह दवा भी लेने की सलाह देता है।

त्वचीय अल्सर आमतौर पर बिना किसी इलाज के ही ठीक हो जाता है। हालांकि अगर इलाज कराया जाता है तो यह तेजी से घाव को भरता है और दाग-धब्बे ठीक करता है इसके अलावा अन्य आगे बीमारी उत्पन्न होने के खतरे को कम करता है। सभी प्रकार के ऐसे स्किन अल्सर जो चेहरे को कुरूप या भद्दा कर देते हैं उनके लिए प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

आंत के कालाजार में क्षतिग्रस्त त्वचा प्राकृतिक रूप से ठीक नहीं होती है। इसे ठीक करने के लिए इलाज की ही जरूरत पड़ती है।  लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी (Liposomal amphotericin B) और पैरोमॉमिसिन (paromomycin) आंत के काला अजार के इलाज के लिए मरीज को दी जाती है।

श्लेष्मिक काला अजार को ठीक करने के लिए हमेशा इलाज की जरूरत पड़ती है। इसके लिए कई तरह की दवाएं भी उपलब्ध हैं। आमतौर पर सोडियम स्टीबोग्लूकोनेट (sodium stibogluconate),पेंटोस्टैम(Pentostam), एम्फोटेरीसिन बी (amphotericin B) आदि दवाएं कालाजार को ठीक करने के लिए दी जाती हैं।

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कालाजार से बचने के उपाय – kala Azar prevention in Hindi

इस बीमारी से बचने के लिेए कोई टीका (vaccine) या रोगनिरोधी दवा मौजूद नहीं है। कालाजार या काला ज्वर से बचने का सिर्फ एक उपाय है और वह यह है कि सैंड फ्लाई के काटने से पूरी तरह बचने की कोशिश करनी चाहिए।हम यहां कुछ टिप्स बता रहे हैं जिससे कि कालाजार से बचा जा सकता है।

  • जहां तक संभव हो शरीर को ढक कर रखें। फुल बांह की कमीज (shirts), फुल पैंट और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें ताकि सैंड फ्लाई किसी तरह आपके शरीर पर काट न सके।
  • जितने दूर तक शरीर खुला दिखे वहां इंसेक्ट रेप्लेंट का इस्तेमाल करें जैसे की पैरों के नीचे या हथेली पर। इंसेक्ट रेप्लेंट का खुली जगहों पर छिड़काव करें ताकि सैंड फ्लाई दूर भाग जाए।
  • शाम के समय और भोर (dawn) में दरवाजा न खोलें। इस समय सैंड फ्लाई ज्यादा एक्टिव होती हैं।

इस आर्टिकल में आपने जाना कालाजार होने के कारण (causes of kala Azar in hindi) कालाजार के लक्षण (symptoms of kala Azar in hindi) कालाजार का इलाज (treatments for kala Azar in hindi) और काला अजार से बचने के उपाय (kala Azar prevention in Hindi) के बारें में।

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