कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है, कारण, लक्षण और ट्रीटमेंट – What is Color Blindness, Symptoms, Causes, Treatment in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है, कारण, लक्षण और ट्रीटमेंट - What is Color Blindness, Symptoms, Causes, Treatment in Hindi
Written by Shivam

Color Blindness in hindi कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) को रंग देखने की क्षमता में कमी के रूप में जाना जाता है। यह एक सामान्य स्थिति है जो ज्यादातर पुरुषों को प्रभावित करती है। वर्णांधता (Color Blindness) रोग से प्रभावित व्यक्तियों में अधिकतर लोग वंशानुगत वर्णांधता रखते हैं। यह रोग आँखों के अंधापन से सम्बंधित नहीं होता है। इस लेख में आप जानेंगे कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है, वर्णांधता का कारण क्या होता है , वर्णांधता के लक्षण और कलर ब्लाइंडनेस ट्रीटमेंट के बारे में।

आँख की रेटिना में, दो प्रकार की कोशिकाएं होती हैं, जो प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता रखती हैं। उन्हें rods और cones कहा जाता है। ये दोनों कोशिकाएं रंग का बोध कराती हैं। अतः कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) की स्थिति रेटिना कोशिकाओं में दोष उत्पन्न होने के कारण प्रगट होती है। कुछ स्थितियों में वर्णांधता सामान्य से जटिल हो सकती है, जिसके कारण रंगहीनता (Achromatosis) की स्थिति पैदा हो सकती है। अतः इस स्थिति से बचने के लिए कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारणों, प्रारम्भिक लक्षणों को जानना अति आवश्यक है।

इस लेख के माध्यम से आप जानेंगे कि कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) क्या है, इसके कारण, लक्षण, प्रकार, उपचार, ट्रीटमेंट और बचाव क्या हैं।

1. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है – What is Color Blindness in Hindi
2. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के प्रकार – Types of Colour Blindness in Hindi
3. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के लक्षण – Colour Blindness Symptoms in Hindi
4. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण – Colour Blindness Causes in Hindi
5. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का निदान – Diagnosis of Colour Blindness in Hindi
6. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का इलाज – Colour Blindness Treatment in Hindi
7. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के जोखिम और जटिलताएं – Colour Blindness Risks & Complications in Hindi
8. कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) से बचाव – Prevention of Colour Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है – What is Color Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) क्या है - What is Color Blindness in Hindi

रंगों की पहचान करने या रंगों में अंतर करने की क्षमता में कमी को कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) कहा जाता है।

वर्णांधता (Color Blindness) आंखों से सम्बंधित वह समस्या है, जिसमें रंगों के बीच अंतर स्पष्ट करने में कठिनाई होती है। इसका संबंध आँखों के अंधापन से नहीं होता है। यह आँखों द्वारा रंगों की स्पष्ट पहचान न कर पाने से सम्बंधित है। दृष्टि की इस समस्या के कारण सम्बंधित व्यक्ति को नीले और पीले रंग या लाल और हरे रंग जैसे कुछ रंगों की अलग-अलग पहचान करने में कठिनाई होती है।

वर्णांधता या स्पष्ट रूप से रंग दृष्टि (Color vision) की कमी, एक आनुवंशिक या वंशागत स्थिति है, जो महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को अधिक प्रभावित करती है। लाल-हरे रंग की दृश्यता में कमी वर्णांधता (Color Blindness) का सबसे सामान्य रूप है।

व्यक्तियों में नीले और पीले रंगों को देखने की क्षमता में कमी का पाया जाना बहुत अधिक दुर्लभ होता है। यह नीली पीले रंग की कमी आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करती है।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के प्रकार – Types of Colour Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के प्रकार - Types of Colour Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है।

  • प्रथम प्रकार की वर्णांधता से प्रभावित व्यक्ति को लाल और हरे रंग के बीच अंतर बताने में परेशानी होती है।
  • दुसरे प्रकार की वर्णांधता (Color Blindness) से प्रभावित व्यक्ति को पीले और नीले रंग की अलग-अलग पहचान करने में कठिनाई होती है।
  • और तीसरे प्रकार की वर्णांधता को एक्रोमैटोप्सिया (achromatopsia) कहा जाता है। इस प्रकार की वर्णांधता वाला व्यक्ति कोई भी रंग नहीं देख सकता है, सभी वस्तुएं उसे भूरे रंग की दिखाई देती है। एक्रोमैटोप्सिया (Achromatopsia) कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का गंभीर रूप है।

इसके अतिरिक्त वर्णांधता (Color Blindness) के निम्न प्रकार भी हो सकते हैं।

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आनुवंशिक वर्णांधता – Inherited Color Blindness

आनुवंशिक वर्णांधता (Inherited Color Blindness) एक सामान्य प्रकार है। यह कलर ब्लाइंडनेस व्यक्ति में एक अनुवांशिक दोष के कारण उत्पन्न होता है। अर्थात यह स्थिति परिवार के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित की जाती है। जिन व्यक्ति के परिवार में कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) से पीड़ित सदस्य हैं, तो उस परिवार का कोई भी व्यक्ति इस स्थिति को ग्रहण कर सकता है।

अक्वायर्ड कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) – Acquired Color Blindness

अक्वायर्ड कलर ब्लाइंडनेस (Acquired Color Blindness) जीवन के किसी भी पक्ष में विकसित हो सकती है और यह स्थिति पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित कर सकती है। वे रोग जो ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) या आंख की रेटिना (retina) को नुकसान पहुंचाते हैं, अक्वायर्ड कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का कारण बन सकते हैं। इसलिए यदि किसी कारणवश रंग दृष्टि (color vision) बदलती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के लक्षण – Colour Blindness Symptoms in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के लक्षण - Colour Blindness Symptoms in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) के लक्षण काफी सामान्य होते हैं। ये लक्षण हल्के से गंभीर भी हो सकते हैं। बहुत से व्यक्तियों में इतने हल्के लक्षण होते हैं कि वे वर्णांधता (Color Blindness) का पता ही नहीं लगा पाते है। अतः इसके लक्षणों में शामिल हैं:

  • सामान्य रूप से रंगों की पहचान करने और रंगों की चमक देखने में परेशानी,
  • समरूप रंगों के बीच अंतर स्पष्ट करने में असमर्थता। यह समस्या मुख्य रूप से लाल और हरे या नीले और पीले रंग के साथ सबसे अधिक उत्पन्न होती है।

सामान्य स्थितियों में कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness), दृष्टि की तीव्रता को प्रभावित नहीं करता है। इसके अतिरिक्त सभी रंगों को देखने में असमर्थता और भूरे रंग में सभी वस्तुओं को देखने की समस्या को एक्रोमैटोप्सिया (achromatopsia) कहा जाता है। इस दुर्लभ स्थिति के साथ अक्सर निम्न समस्याएं जुड़ी होती है:

  • मंददृष्टि (amblyopia)
  • अक्षिदोलन (nystagmus)
  • प्रकाश संवेदनशीलता,
  • कमजोर दृष्टि (poor vision)

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण – Colour Blindness Causes in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के कारण - Colour Blindness Causes in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं

आनुवंशिकता (Heredity) – अधिकांश व्यक्तियों में वर्णांधता (Color Blindness) का मुख्य कारण आनुवंशिकता है, जो व्यक्ति को विरासत के रूप में दिया जाता है। यह रोग आम तौर पर मां से बेटे को दिया जाता है।

रोग (Diseases) – कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) की स्थिति रेटिना की बीमारी या चोट के परिणामस्वरूप प्राप्त की जा सकती है। दृष्टि को प्रभावित करने वाली बीमारियां, जो वर्णांधता का कारण बनती हैं, निम्न हैं:

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दवाएं (Medications) – कुछ दवाएं रंग दृष्टि (color vision) में परिवर्तन कर कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) का कारण बन सकती हैं इन दवाओं में शामिल हैं:

एंटीसाइकोटिक (antipsychotic) दवाएं, क्लोरप्रोमेज़िन (chlorpromazine (Thorazine)) और thioridazine (Mellaril) (मेलेरिल)।

एंटीबायोटिक ethambutol (Myambutol),

वर्णांधता के अन्य कारण (Other Factors) – जब आँख की रेटिना में उपस्थित प्रकाश संवेदनशील कोशिकाएं, आने वाले प्रकाश की तरंग दैर्ध्य में अंतर स्पष्ट करने में असफल होती हैं, तब यह समस्या वर्णांधता (Color Blindness) का कारण बनती है। यह समस्या बढ़ती उम्र, कुछ प्लास्टिक में मौजूद स्टायरिन (styrene) जैसे जहरीले रसायनों और अत्यधिक शराब पीने की आदत के कारण भी उत्पन्न हो सकती है।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का निदान – Diagnosis of Colour Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) की संभावनाओं का निराकरण करने के लिए नेत्र रोग विशेषज्ञ प्रभावित व्यक्ति का एक सरल परीक्षण कर सकते हैं।

कलर ब्लाइंड टेस्ट (colour blind test) – इस परीक्षण में “स्यूडोइओक्रोमैटिक प्लेट्स” (pseudoisochromatic plates) नामक विशेष छवियों का उपयोग किया जाता है। इन विशेष प्रकार की प्लेट्स में बहुत से रंगीन बिंदुओं से बना पैटर्न दिखाया जाता है। ये पैटर्न संख्याओं और प्रतीकों के रूप में होते हैं, जिन्हें केवल सामान्य दृष्टि वाले व्यक्ति ही देख सकते हैं। जो व्यक्ति कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) से पीड़ित है, वह इन पैटर्न को नहीं देख सकते हैं या फिर उन्हें कोई ओर पैटर्न दिखाई दे सकता हैं।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का इलाज – Colour Blindness Treatment in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) का इलाज - Colour Blindness Treatment in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) का इलाज, इसके कारणों का निदान करने के बाद किया जा सकता है। वर्णांधता का कारण बनने वाली अंतर्निहित स्थितियां या रोगों का इलाज करने के लिए दवाओं की सिफारिश की जा सकती है। अतः अंतर्निहित कारण का इलाज, रंगों की पहचान में सुधार करने में मदद कर सकता है।

आनुवंशिक कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के लिए कोई उचित इलाज नहीं है। लेकिन वर्णांधता (Color Blindness) की स्थिति में आवश्यक रंग की कमी को दूर करने के लिए संपर्क लेंस (contact lenses) और चश्मे (glasses) का उपयोग किया जा सकता है।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के जोखिम और जटिलताएं – Colour Blindness Risks & Complications in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) के जोखिम और जटिलताएं - Colour Blindness Risks & Complications in Hindi

महिलाओं की तुलना में एक पुरुषों को जो वर्णांधता (Color Blindness) के साथ पैदा होता है, उसे अधिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। वर्णांधता के जोखिम को बढ़ाने वाली कुछ स्थितियां निम्न हैं:

  • आंख का रोग
  • पार्किंसंस रोग
  • अत्यधिक शराब पीने की आदत
  • अल्जाइमर रोग
  • ल्यूकेमिया (leukemia)
  • मधुमेह
  • सिकिल सेल अनेमिया (sickle cell anemia)

इसके अतिरिक्त कुछ दवाएं भी इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

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कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) से बचाव – Prevention of Colour Blindness in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) से बचाव - Prevention of Colour Blindness in Hindimptoms, Causes, Treatment in Hindi

कलर ब्लाइंडनेस (Color Blindness) रोग अधिकतर वंशानुगत होता है। इस रोग को ज्यादातर लड़के, अपनी मां से प्राप्त करते हैं, और कुछ स्थितियों में लड़कियां अपने माता-पिता दोनों से प्राप्त कर सकती हैं। अतः वंशानुगत कलर ब्लाइंडनेस की रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं है।

इसके अतिरिक्त कुछ स्वास्थ्य बीमारियाँ जैसे मधुमेह, पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease), मोतियाबिंद (Cataracts), अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s disease) आदि के प्रति जागरूक रहकर और इन बीमारियों का उचित समय में इलाज प्राप्त कर, कलर ब्लाइंडनेस (वर्णांधता) (Color Blindness) के जोखिम को कम किया जा सकता है।

शराब का अत्यधिक सेवन भी वर्णांधता का कारण बनता है, अतः शराब के सेवन बहुत कम मात्रा में करना चाहिए।

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