मोतियाबिंद के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव - Cataracts (Motiyabind) in Hindi
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मोतियाबिंद के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव – Cataracts (Motiyabind) Causes, Symptoms, And Prevention in Hindi

मोतियाबिंद के कारण, लक्षण, इलाज और बचाव - Cataracts causes, symptoms, treatment and prevention in Hindi

Motiyabind in hindi मोतियाबिंद आमतौर पर आंखों की लेंस पर धुंधलापन छा जाने की समस्या को कहते हैं। मोतियाबिंद होने पर व्यक्ति को आंखों से स्पष्ट दिखायी नहीं देता है अर्थात् कोई भी वस्तु धुंधली (cloudy) दिखायी देती है। आंखों में यह धुंधलापन मोतियाबिंद के कारण ही होता है जिसके कारण व्यक्ति को पढ़ने, गाड़ी चलाने और लोगों के चेहरे के हावभाव को पहचानने में कठिनाई होती है। मोतियाबिंद आंखों में धीरे-धीरे फैलता है और आंखों की रोशनी को कम कर देता है। यह आमतौर पर दोनों आंखों को प्रभावित करता है लेकिन यह दोनों आंखों में एक साथ नहीं होता है। वृद्ध व्यक्तियों (old age) में यह बीमारी बहुत आम है। मोतियाबिंद होने पर इस बीमारी का निदान कराने के बाद ही इलाज कराना चाहिए।

  1. मोतियाबिंद होने के कारण – Causes of Cataracts in Hindi
  2. क्या होते है मोतियाबिंद के लक्षण – Symptoms of Cataracts in Hindi
  3. मोतियाबिंद का निदान – Diagnosis of Cataracts in Hindi
  4. जाने मोतियाबिंद का इलाज कैसे किया जाता है – Treatment of Cataracts in Hindi
  5. मोतियाबिंद से बचाव – Cataracts Prevention in Hindi

मोतियाबिंद के कारण – Causes of Cataracts in Hindi

मोतियाबिंद होने के कारण - Causes of Cataracts in Hindi

 

जब आंखों के लेंस में प्रोटीन बनने लगता है और यह आंखों की रोशनी को धुंधला कर देता है तब व्यक्ति को मोतियाबिंद होने की संभावना होती है। यह स्पष्ट रूप से प्रकाश को गुजरने नहीं देता है जिसके कारण आंखों की रोशनी खोने का खतरा रहता है। अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को मोतियाबिंद हो सकता है क्योंकि इस बीमारी का सबसे बड़ा जोखिम व्यक्ति की बढ़ती उम्र ही है।

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आमतौर पर मोतियाबिंद होने के पीछे कई कारण होते हैं। इनमें के कुछ कारण निम्न हैं-

  • उम्र
  • परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी होना
  • डायबिटीज
  • अधिक देर तक सूर्य की रोशनी आंखों पर पड़ना
  • आंख में सूजन होना
  • आंख में चोट लगना
  • धूम्रपान
  • अल्ट्रावायलेट रेडिएशन
  • आघात
  • रेडिएशन थेरेपी
  • अनुवांशिक

इसके अलावा गर्भ में संक्रमण, चोट या गर्भ (womb) का सही तरीके से विकास न होने के कारण नवजात शिशु को भी मोतियाबिंद हो सकता है।

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मोतियाबिंद के लक्षण – Symptoms of Cataracts in Hindi

आपको बता दें कि मोतियाबिंद (motiyabind) विकसित होने में आमतौर पर कई साल लगते हैं और यह वृद्धावस्था में प्रकट होता है। इस उम्र में आंखों का लेंस धुंधला हो जाता है। मोतियाबिंद होने पर व्यक्ति को विशेषरूप से रात के समय वाहन चलाने में कठिनाई होती है और लोगों के चेहरे के हाव-भाव पहचानने में भी मुश्किल आती है। चूंकि मोतियाबिंद धीरे-धीरे विकसित होता है इसलिए ज्यादातर लोगों को शुरूआत में इसका पता भी नहीं चल पाता है। लेकिन जैसे-जैसे धुंधलापन गहराता जाता है आंखों की रोशनी भी धीरे-धीरे घटने लगती है।

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मोतियाबिंद  के लक्षण निम्न हैं – motiyabind ke lakshan in Hindi

  • आंखों में धुंधलापन और आंखों की रोशनी घटना
  • आंखों से रात में स्पष्ट दिखाई न देना
  • प्रकाश और चमक के प्रति संवेदनशीलता
  • पढ़ने या अन्य काम करने के लिए तेज प्रकाश की आवश्यकता
  • जल्दी-जल्दी चश्मे का लेंस बदलना
  • आंखों से वस्तुएं पीली या धुंधले रंग की दिखाई देना
  • एक आंख से एक वस्तु दो बार दिखाई देना
  • दिन के प्रकाश में आंखें चमकना
  • रात में वाहन चलाने में कठिनाई होना

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मोतियाबिंद का निदान – Diagnosis of Cataracts in Hindi

आंखों की समस्या होने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। आंख का परीक्षण और कुछ टेस्ट करने के बाद डॉक्टर मोतियाबिंद का निदान करते हैं।

आंखों के विशेषज्ञ आंखों की बीमारी का पता लगाने के लिए आमतौर पर विजुअल एक्यूइटी टेस्ट (visual acuity test) करते हैं जिसमें यह परीक्षण किया जाता है कि मरीज को कोई वस्तु कितनी स्पष्ट दिखाई पड़ रही है। इसमें मरीज को एक कमरे में बिठाकर सामने से अक्षरों की सूची पढ़ने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा आंखों की बीमारी के निदान के लिए स्लिट लैंप परीक्षण भी किया जाता है जिसमें माइक्रोस्कोप की सहायता से कॉर्निया और आइरिस, लेंस और आइरिस एवं कॉर्निया के बीच के स्थान का परीक्षण किया जाता है। इसके अलावा आई ड्रॉप डालने के बाद आंखों की रेटिना का परीक्षण किया जाता है।

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मोतियाबिंद का इलाज – Treatment of Cataracts in Hindi

यदि किसी व्यक्ति को मोतियाबिंद होने पर उसकी दैनिक दिनचर्या जैसे, लिखना-पढ़ना और वाहन चलाने में अत्यधिक कठिनाई महसूस हो रही हो तो डॉक्टर उसे सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा आंखों की अन्य बीमारियों के इलाज में जब मोतियाबिंद के कारण रूकावट पैदा होती है तब भी डॉक्टर मरीज को सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। सर्जिकल प्रकिया को फैकोइमल्सिफिकेशन (phacoemulsification) कहते हैं, इसमें अल्ट्रासाउंड तरंगों के माध्यम से लेंस को अलग किया जाता है और टुकड़ों को हटाया जाता है। मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक्स्ट्राकैप्सुलर सर्जरी भी की जाती है, इसमें आंखों की कॉर्निया में एक लंबा चीरा लगाकर लेंस के धुंधले हिस्से को हटाया जाता है। जो मरीज सर्जरी नहीं कराना चाहते हैं उन्हें डॉक्टर अच्छी गुणवत्ता एवं लेंस के चश्मे लगाने की सलाह देते हैं।

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मोतियाबिंद से बचाव – Cataracts Prevention in Hindi

मोतियाबिंद से बचने के लिए लोगों को अपनी आंखों का नियमित परीक्षण करवाना चाहिए, विशेषरूप से वृद्धावस्था में आंखों के प्रति अधिक सचेत रहना चाहिए। कुछ सावधानियां बरतकर आंखों की इस बीमारी से बचा जा सकता है।

  • धूम्रपान (smoking) आंखों की कई बीमारियों का मुख्य कारण होता है और एक स्टडी में पाया गया है कि धूम्रपान करने से motiyabind होने की संभावना 3 गुना बढ़ जाती है। इसलिए धूम्रपान करने से बचें।
  • स्वस्थ भोजन शरीर की अन्य बीमारियों सहित motiyabind के खतरे को भी कम कर देता है। खाने में पर्याप्त फल, सब्जी, होल ग्रेन, उच्च गुणवत्ता के फैट, एवोकैडो, ओमेगा ऑयल और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन करें।
  • मोटापे के कारण टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना अधिक होती है जिससे की मोतियाबिंद होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखें और डायबिटीज को भी कंट्रोल में रखें।
  • घर से बाहर निकलने से पहले धूप के चश्मे या अल्ट्रा वायलेट रेडिएशन से बचने के लिए चश्मा पहने और रात में कम से कम 7 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें। (और पढ़े – अनिद्रा के कारण, लक्षण और उपचार)
  • एल्कोहल का कम से कम सेवन करने से भी इस बीमारी से बचा जा सकता है।

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