कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर – Differences Between Cardiac Arrest And Heart Attack in Hindi

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर - Differences between cardiac arrest and heart attack in hindi
Written by Deepanshu

हम में से ज्यादातर लोग कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) और हार्ट अटैक (heart attack) यानी दिल का दौरा को एक ही चीज समझते है। ये दोनों ही स्थित एक दूसरे की पर्याय लगती है लेकिन दोनों में मामूली सा फर्क होता है। आज के इस लेख में आप जानेगे की कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर क्या होता है (Differences between cardiac arrest and heart attack in hindi) और जान जाने का खतरा किस्मे ज्यादा होता है और कार्डियक अरेस्ट के संकेत क्या है (cardiac arrest symptoms in hindi) और कैसे इनसे बचा जा सकता है।

दिल का दौरा तब पड़ता है जब कोई नस जाम होने पर दिल के एक सेक्शन तक ऑक्सीजन वाला अच्छा खून नहीं पहुंचा पाती है। अगर जाम हो चुकी नस को तुरंत नहीं खोला जाता है तो दिल का वह हिस्सा अपने आप पोषित होने लगता है, लेकिन नस मरने लगती है। वही कार्डिक अरेस्ट की स्थित में यह दिल में एक इलेक्ट्रीकल मलफंक्शन  के कारण होता है, इससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। आज हम इस आर्टिकल में कार्डियक अरेस्ट क्या होता है, इसके लक्षण क्या है और इसका उपचार कैसे किया जा सकता है इसके बारे में बताने जा रहे है।

कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर – Differences Between Cardiac Arrest And Heart Attack in Hindi

अक्‍सर लोगों में कार्डियक अरेस्‍ट और हार्ट अटैक को लेकर बहुत से भ्रम होते हैं। इस लेख में आप कार्डियक अरेस्‍ट और हार्ट अटैक में अंतर क्‍या है यह जानेगें।

क्या है कार्डियक अरेस्ट – What Is Cardiac Arrest in Hindi

कार्डियक अरेस्ट को अगर आसान भाषा में समझना है तो हम यह कह सकते है कि कार्डियक अरेस्ट के दौरान मरीज की दिल की धड़कन रूक जाती है। कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) तब होता है जब हृदय के भीतरी विभिन्न हिस्सों के बीच सूचनाओं का आपसी आदान प्रदान बिगड़ जाता है जिससे दिल की धड़कन पर बुरा असर पड़ता है। इस अवस्था में हृदय, शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है जिसके कारण से मरीज को सांस लेने में  मुश्किल होने लगती है। ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि सांस न ले पाने की स्थित में मरीज बेहोश हो जाता है। ऐसे हालात में अगर कुछ ही देर में मरीज को डॉक्टर के पास नहीं ले जाया जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

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आइए जानते है क्या है हार्ट अटैक – What Is The Heart Attack in Hindi

हार्ट अटैक जिस मेडिकल टर्म में मायोकार्डियल इन्फ्रैक्शन भी कहते है ये तब होता है, जब शरीर की कोरोनरी आर्टरी यानी की धमनी में अचानक गतिरोध पैदा हो जाता है इस आर्टरी से हमारे हृदय की पेशियों तक खून पहुंचता है, और जब वहां तक खून पहुंचना बंद हो जाता है, तो वे निष्क्रिय हो जाती हैं, यानी हार्ट अटैक होने पर दिल के भीतर की कुछ पेशियां काम करना बंद कर देती हैं। धमनियों में आई इस तरह की ब्लॉकेज को दूर करने के लिए कई तरह के उपचार किए जाते हैं, जिनमें एंजियोप्लास्टी (Angioplasty), स्टंटिंग और दिल की सर्जरी (Heart Surgery) शामिल हैं, इन सब में कोशिश होती है कि दिल तक खून पहुंचना नियमित हो जाए।

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कार्डियक अरेस्ट के ये है संकेत – Cardiac Arrest Symptoms in Hindi

सीने के बीचों बीच अचानक से दर्द होना और कुछ देर बाद अपने आप दर्द का ठीक हो जाना कार्डियक अरेस्ट का संकेत।

  • सीने में दबाव या भार महसूस होना।
  • अचानक से हार्टबीट तेज़ हो जाना।
  • अचानक से पसीना आना, गर्मी लगना और घबराहट होना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • कमजोरी महसूस करना।
  • हल्के-फुल्के काम से भी थकान महसूस होना।
  • बिना किसी वजह सिर में या पेट में उपर कि तरफ दर्द होना।
  • पीठ या बांये हाथ, गर्दन या दांत में दर्द होना।
  • उल्टी आना या उल्टी आने जैसे महसूस करना।
  • बेचैनी रहना।

कार्डियक अरेस्ट का इलाज – Cardiac Arrest Treatment in Hindi

आपको बता दें कि कई बार कार्डिक अरेस्ट अचानक भी आता है। अगर कार्डियक अरेस्ट  के कुछ ही पलों के अंदर डॉक्टर के पास मरीज को ले जाया जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है (cardiac arrest treatment in hindi)। कार्डियक अरेस्ट के दौरान मरीज को कार्डियोपल्मनेरी रेसस्टिसेशन (CRP) दिया जाता है।  इसकी मदद से उसकी दिल की धड़कन को नियमित करने का प्रयास किया जा सकता है। इस दौरान डिफाइब्रिलेटर की मदद से मरीज को बिजली के झटके भी दिए जाते हैं जिससे दिल की धड़कन दोबारा शुरु हो जाए।

ऊपर लेख में आपने जाना की कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर क्या होता है (Differences between cardiac arrest and heart attack in hindi) और जान जाने का खतरा किस्मे ज्यादा होता है, कार्डियक अरेस्ट के संकेत क्या है (cardiac arrest symptoms in hindi) और कैसे इनसे बचा जा सकता है। जिस व्यक्ति को दिल की बीमारी होती है उसे कार्डियक अरेस्ट आने का खतरा अधिक होता है साथ ही साथ जिस व्यक्ति को पहले कभी हार्ट अटैक आ चूका हो तो उस व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आने की सम्भावना बढ़ जाती है इसलिए यदि आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी है तो आपको भी साबधान रहना चाहिए और समय समय पर अपनी जाँच कराते रहना चाहिए।

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