ऑटिज्म के कारण, लक्षण और बचाव – Autism Symptoms Causes And Treatment In Hindi

ऑटिज्म के कारण, लक्षण और बचाव - Autism Symptoms Causes And Treatment In Hindi
Written by Deepti

Autism In Hindi ऑटिज्म एक तरह की न्यूरो-डेवलपमेंटल डिस्ऑर्डर या मानसिक बीमारी है, जिसके लक्षण बचपन से ही नजर आने लगते हैं। भारत में प्रति वर्ष ऑटिज्म के 1 मिलियन से अधिक मामले सामने आते हैं। इस रोग से पीड़ित बच्चों में विकास अन्य बच्चों की तुलना में बहुत धीरे होता है। ये रोग जन्म से लेकर तीन वर्ष की आयु तक विकसित होता है और बच्चे के मानसिक विकास को रोक देता है। ऐसे बच्चे समाज में घुल मिल नहीं पाते, बात नहीं कर पाते और इनका आई कॉन्टेक्ट बहुत खराब होता है। इनमें कई बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो अपनी अलग ही भाषा में अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। ऐसे बच्चों के लिए स्पीच थैरेपी बढ़िया विकल्प है।

ऑटिज्म के साथ एक बच्चा बहुत संवेदनशील होता है। जो बच्चे ऑटिस्टिक होते हैं, उनके शरीर में स्टीरियोटाइप्ड बॉडी मूवमेंट जैसे शरीर का हिलना, फडफड़ाना और हाथ हिलाना हो सकता है। कई बार, ये बच्चे अपने आसपास हो रही गतिविधियों पर ध्यान नहीं देते। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में दौरे भी पड़ सकते हैं, जिसके बाद उन्हें हैंडल करना बहुत मुश्किल होता है। भले ही यह बच्चे मानसिक रूप से कमजोर होते हैं, लेकिन अन्य क्षेत्र में इनका दिमाग सामान्य बच्चों की तुलना में बहुत तेज चलता है। हालांकि इस बीमारी का कोई निश्चित इलाज नहीं है, फिर भी ट्रीटमेंट और थैरेपी की मदद से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे ऑटिज्म के लक्षण, कारण और बचाव के बारे में। लेकिन इससे पहले ये जानना जरूरी है, कि ऑटिज्म होता क्या है।

  1. ऑटिज्म क्या होता है –  What Is Autism In Hindi
  2. ऑटिज्म बच्चों को कैसे प्रभावित करता है – How does autism affect children in Hindi
  3. ऑटिज्म के लक्षण – Symptoms of autism in Hindi
  4. ऑटिज्म के कारण – Autism ke karan in hindi
  5. ऑटिज्म के प्रकार – Types of autism in Hindi
  6. ऑटिज्म का निदान – How to diagnose autism in Hindi
  7. ऑटिज्म का इलाज कैसे किया जाता है – Autism ka ilaj kaise kiya jata hai in hindi
  8. ऑटिज्म की जटिलताएं – Complication of autism in Hindi
  9. ऑटिज्म के बचाव – How to prevent autism in Hindi

ऑटिज्म क्या होता है –  What Is Autism In Hindi

ऑटिज्म क्या होता है -  What Is Autism In Hindi

ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोबिहेविरियल स्थिति है। लक्षणों की सीमा के कारण इसे ऑटिज्म स्पैक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) कहा जाता है। एएसडी मुख्य रूप से विकलांगता से जुड़ा होता है। ये एक बच्चे के जीवन को विनाशकारी बना देता है, जिसे मुख्य रूप से संस्थागत देखभाल की जरूरत होती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को संवाद करने में परेशानी होती है, यह सोशल स्किल से दूर होते हैं, समय पर बोलते नहीं है, आवाज सुनने के बावजूद प्रतिक्रिया नहीं देते, उन्हें यह समझने में परेशानी होती है कि दूसरे लोग क्या सोचते हैं और महसूस करते हैं। इससे उनके लिए खुद को शब्दों के साथ चेहरे के भाव और स्पर्श के माध्यम से व्यक्त करना बेहद मुश्किल हो जाता है। लड़कियों की अपेक्षा लड़कों मे ऑटिज्म के लक्षण चार गुना ज्यादा देखे जाते हैं।

(और पढ़े – नवजात शिशुओं के बारे में रोचक तथ्य…)

ऑटिज्म बच्चों को कैसे प्रभावित करता है – How does autism affect children in Hindi

ऑटिज्म बच्चों को कैसे प्रभावित करता है - How does autism affect children in Hindi

ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चों से बहुत अलग होते हैं। वे अन्य बच्चों के साथ एक्टिविटीज में इनवॉल्व नहीं होते। उन्हें दूसरे बच्चों से बात करने में परेशानी हो सकती है। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों को सोने, खाने में परेशानी होती है। अगर आपका बच्चा ऑटिस्टिक है, तो आपको उनके लिए कोई अच्छा स्थानीय सहायता समूह तलाशना चाहिए।

(और पढ़े – डाउन सिंड्रोम होने के कारण, लक्षण और इलाज…)

ऑटिज्म के लक्षण – Symptoms of autism in Hindi

ऑटिज्म के लक्षण - Symptoms of autism in Hindi

ऑटिज्म एक विकासात्मक विकलांगता है, जो लोगों के संचार, व्यवहार और अन्य लोगों के साथ बातचीत करने के तरीके को प्रभावित करती हैं। अगर आप इसके लक्षणों के बारे में जान लें, तो जल्द ही इस बीमारी के लिए उपचार लिया जा सकता है। नीचे जान सकते हैं, ऑटिज्म के लक्षणों के बारे में।

  • बहुत कम सामाजिक मेलजोल होना
  • किसी से बातचीत न करना, अपने में ही गुम रहना
  • किसी के बुलाने या बात करने पर प्रतिक्रिया न देना
  • बहुत जल्दी गुस्सा आना
  • बोलते समय शब्दों का उपयोग न करने के बजाए गाने या फिर अलग ही आवाज में अपनी बात को व्यक्त करना।
  • कुछ चीजों में बहुत इंटरेस्ट दिखाना
  • दिनचर्या में बदलाव किए जाने पर नाराजगी दिखाना
  • किसी गाने, किताब या खेल से अधिक लगाव होना
  • जिद पर अड़ जाना और अपनी बात को मनवाने के लिए जोर-जोर से अलग-अलग आवाज निकालना
  • आई कॉन्टेक्ट न करना
  • इमोशन्स को न समझना
  • चलने के दौरान अपनी बाहों को ऊपर न खींचना
  • एक जगह टिककर बैठने से परेशानी होना
  • खाने को फील और स्मैल करना, कुछ नया खाना पसंद न करना

(और पढ़े – जिद्दी बच्चों को ठीक करने के उपाय…)

ऑटिज्म के कारण – Autism ke karan in hindi

ऑटिज्म के कारण - Autism ke karan in hindi

ऑटिज्म के कारणों का तो आज तक पता नहीं चल पाया है। इसे लेकर कई रिसर्च तो अब भी चल रही है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के अनुसार अनुवांशिकी और पर्यावरण दोनों ही निर्धारित कर सकते हैं कि ये ऑटिज्म की कंडीशन पैदा कर सकते हैं या नहीं। फिर भी शोधकर्ताओं द्वारा बताए गए कुछ कारणों के बारे में हम आपको बता रहे हैं।

परिवार में अनुवांशिकता भी ऑटिज्म का प्रमुख कारण माना जाता है, साथ ही पर्यावरणीय कारण ऑटिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर आपका बच्चा विकासात्मक समस्याओं को दर्शाता है, तो यह चिंता की बात होती है। इस पर डॉक्टर आपको अधिक परीक्षणों के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करने को कहेगा।

(और पढ़े – अपरिपक्व शिशु (प्रीमैच्योर बेबी) के लक्षण, कारण, जांच, जटिलताएं और उपचार…)

ऑटिज्म के प्रकार – Types of autism in Hindi

ऑटिज्म तीन प्रकार का होता है, जिसके बारे में आप नीचे जान सकते हैं।

आस्पेर्गर सिंड्रोम – Asperger’s Syndrome in Hindi

आस्पेर्गर सिंड्रोम - Asperger's Syndrome in Hindi

यह ऑटिज्म  का एक हल्का प्रकार है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में दो तरह की बातें कई बार दिखाई दे सकती हैं। पहला कि वह दूसरों से ज्यादा स्मार्ट होता है, लेकिन उसे सामाजिक कौशल से पेरशानी होती है। हालांकि ऐसे लोगों को भाषा संबंधित और बौद्धिक समस्याएं नहीं होती।

ऑटिस्टिक डिसऑर्डर – Autistic disorder in Hindi

जो बच्चे देरी से बोलते हैं, असामान्य व्यवहार और रूचियां रखते हैं, वे ऑटिस्टिक डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं। इन लोगों की कई बौद्धिक समस्याएं भी होती हैं।

(और पढ़े – किशोरावस्था की शुरुआत और पैरेंट्स की ज़िम्मेदारियाँ…)

पर्सेसिव डवलपमेंट डिसऑर्डर – Pervasive development disorder in Hindi

जिन लोगों में ऑटिस्टिक और आस्पेर्गर सिंड्रोम के कुछ लक्षण दिखाई दें, वे पर्सेसिव डवलपमेंट डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं।

चाइल्डहुड डिसइंटीग्रेटिड सिंड्रोम – Childhood disintegrated syndrome in Hindi

यह ऑटिज्म का सबसे दुलर्भ और गंभीर प्रकार है। यह उन बच्चों को परिभाषित करता है, जो सामान्य रूप से विकसित तो होते हैं, लेकिन बहुत जल्दी कई सामाजिक, भाषा और मानसिक कौशल खो देते हैं। आमतौर पर दो से चार साल की उम्र के बीच।

(और पढ़े – बच्चों को तेज दिमाग के लिए क्या खिलाएं और घरेलू उपाय…)

ऑटिज्म का निदान – How to diagnose autism in Hindi

ऑटिज्म का निदान - How to diagnose autism in Hindi

प्रारंभिक अवस्था में निदान ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन एएसडी का निदान आसान नहीं होता। इसके लिए खासतौर से कोई लैब टेस्ट नहीं होता, लेकिन डॉक्टर छोटे बच्चों के व्यवहार को देखते हैं और उनके माता-पिता द्वारा बताई गई समस्याओं को जानते हैं। ऑटिज्म के डाइग्नोसिस का काम मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक मिलकर करते हैं। भारत में ऑटिज्म के निदान के लिए आमतौर पर एक टूल का प्रयोग होता है, जिसे इंडियन स्केल फॉर असिसमेंट ऑफ ऑटिज्म और चाइल्ड हुड ऑटिज्म रेटिंग स्केल कहा जाता है। ऑटिज्म का निदान दो चरणों में होता है।

विकास संबंधी जांच- बाल रोग विशेषज्ञ ऑटिज्म की जांच करने का पहला कदम है। हर बच्चे का 18-24 महीनों में चेकअप होता है, कि वो ट्रैक पर है या नहीं। भले ही फिर उन्हें कोई लक्षण न दिखे। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ आपके बच्चे को देखेगा और उससे बात करेगा।

  • वह आपसे आपके पारिवारिक इतिहास और बच्चे के बारे में पूछेगा।
  • वह जानना चाहेगा कि क्या आपका बच्चा 6 महीने में मुस्कुराया था।
  • उसने 9 महीने तक आपकी आवाज और चेहरे के हावभाव की नकल की।
  • वह 12 महीने से ही खुद में बड़बड़ा रहा है।
  • उनका कोई व्यवहार असामान्य है।
  • उसे आंखों का संपर्क बनाने में कोई परेशानी होती है।
  • वह लोगों के साथ बातचीत करने के साथ अपने अनुभव साझा करता है।
  • वह लोगों के सवाल के जवाब देता है।
  • क्या वह प्रकाश, शोर या तापमान के प्रति संवेदनशील है।
  • उसे नींद या पाचन संबंधी कोई समस्या है।
  • वह अक्सर नाराज या गुस्से में रहता है।

विस्तृत नैदानिक मूल्यांकन ( डिटेल डाइगनॉस्टिक इवैल्यूएशन) यह ऑटिज्म के निदान का दूसरा चरण होता है। इसमें बच्चे के व्यवहार और उसमें होने वाले विकास की जांच की जाती है। इसमें जेनेटिक टेस्ट और न्यूरोलॉजिकल जैसे टेस्ट शामिल होते हैं। बता दें, कि आपके बच्चे की स्क्रीनिंग में आपकी प्रतिक्रियाएं बहुत महत्व रखती हैं।

(और पढ़े – छोटे बच्चों के पेट फूलने के कारण, लक्षण और घरेलू उपचार…)

ऑटिज्म का इलाज कैसे किया जाता है – Autism ka ilaj kaise kiya jata hai in hindi

ऑटिज्म का इलाज कैसे किया जाता है - Autism ka ilaj kaise kiya jata hai in hindi

ऑटिज्म के लिए कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन उपचार संबंधी विचार लोगों को बेहतर महसूस करने या उनके लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। कई ट्रीटमेंट में थैरेपीज शामिल हैं, जैसे-

  • व्यवहार चिकित्सा
  • प्ले थैरेपी
  • ऑकुपेशनल थैरेपी
  • फिजिकल थैरेपी
  • स्पीच थैरेपी

(और पढ़े – विद्यार्थी जीवन में खेलों का महत्व…)

ऑटिज्म की जटिलताएं – Complication of autism in Hindi

ऑटिज्म की जटिलताएं - Complication of autism in Hindi

  • यदि किसी को ऑटिज्म है, तो उसे शोर या रोशनी से भावनात्मक रूप से असुविधा हो सकती है। यहां तक की आपको सर्दी, गर्मी और दर्द का भी अहसास नहीं होता।
  • आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) वाले लोगों में दौरे पड़ना आम बात है। ये अक्सर बचपन से या फिर किशोरावस्था में शुरू हो जाते हैं।
  • एएसडी (आटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर) से आपको अवसाद, चिंता और मूड स्विंग का खतरा होता है।
  • ऑटिज्म वाले लोगों में मानसिक कमजोरी होती है। फ्रैगाइल एक्स सिंड्रोम वाले बच्चों में एएसडी विकसित होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। यह मानसिक कमजोरी का एक सामान्य कारण है, जो ज्यादातर लड़कों में देखा जाता है।
  • ट्यूमर स्केलेरोसिस एक दुलर्भ विकार है, जो आपके मास्तिष्क सहित सभी अंगों में बढऩे का कारण बनता है।
  • अन्य समस्याएं जो एएसडी के साथ हो सकती हैं, उनमें आक्रमकता, असामान्य नींद की आदत, खाने की असामान्य आदतें और पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हैं।

(और पढ़े – डिप्रेशन और उदासी दूर करने के उपाय…)

ऑटिज्म के बचाव – How to prevent autism in Hindi

ऑटिज्म के बचाव - How to prevent autism in Hindi

डॉक्टरों के अनुसार जीन बच्चा पैदा करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। दुलर्भ मामलों में डॉक्टरों का यह भी कहना है, कि अगर शिशु के गर्भ में होने पर बच्चे को रसायनों के संपर्क में लाया गया, तो बच्चा जन्म दोष के साथ पैदा होता है। लेकिन डॉक्टर यह नहीं पता लगा सकते, कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे को ऑटिज्म है या नहीं। ऑटिस्टिक विकार वाले बच्चे को पूरी तरह से तो ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन जीवनशैली में सुधार करके स्वस्थ बच्चा होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं।

  • महिलाएं प्रेग्नेंसी में नियमित जांच कराएं, अच्छी तरह से संतुलित भोजन और व्यायाम करें। कोशिश करें, कि प्रसव से पहले देखभाल अच्छी तरह हो और इसके साथ सभी अनुवांशित विटामिन और सप्लीमेंट लें
  • गर्भावस्था के दौरान कोई ड्रग्स न लें। कोई भी दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर से पूछें।
  • गर्भावस्था में शराब के सेवन से बचें
  • मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपचार की तलाश करें। यदि आपको सिलिएक रोग है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • गर्भवती होने से पहले रूबेला का टीका जरूर लगवाएं। यह रूबेला से जुड़े ऑटिज्म को रोकने में सक्षम होता है।

सही मायने में देखा जाए, तो ऑटिज्म का कोई परफेक्ट इलाज नहीं है। लेकिन फिर भी कुछ थैरेपी और ट्रीटमेंट के जरिए इनका उपचार करके स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। बेहतर होगा, कि ऑटिज्म से पीड़ित अपने बच्चे को किसी एनजीओ में एडमिट कराएं। वहां उसे कई चीजें सिखाई जाएंगी, इसके साथ ही आप खुद भी बच्चे को उसके मन मुताबिक चीजें सिखाने में मदद कर सकते हैं, ध्यान रखें कि आप उसे उसकी क्षमताओं से अलग कुछ भी सिखाने की कोशिश न करें। घर में अभिभावकों द्वारा किए गए प्रयासों से कुछ हद तक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

(और पढ़े – तेज होगा बच्चा अगर गर्भावस्था के दौरान इन बातों पर गौर करेगी मां…)

इसी तरह की अन्य जानकरी हिन्दी में पढ़ने के लिए हमारे एंड्रॉएड ऐप को डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। और आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

आपको ये भी जानना चाहिये –

Leave a Comment

Subscribe for daily wellness inspiration